27 जून 2026
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा: सनातन धर्म ने कभी खुद को नहीं थोपा, विविधता और सहअस्तित्व है इसकी पहचान

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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा: सनातन धर्म ने कभी खुद को नहीं थोपा, विविधता और सहअस्तित्व है इसकी पहचान

सारांश

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में अंतरधार्मिक संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म ने कभी खुद को थोपा नहीं — विविधता ही उसकी पहचान है। 'भारतीयता' और 'कश्मीरियत' को एक ही दर्शन की दो अभिव्यक्तियाँ बताते हुए उन्होंने युवाओं से इस विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 27 जून 2026 को श्रीनगर में अंतरधार्मिक संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म — विश्व का सबसे प्राचीन जीवित धर्म — ने कभी स्वयं को किसी पर नहीं थोपा।
प्राचीन भारत ने ईसाई धर्म, इस्लाम, यहूदी धर्म और पारसी धर्म को फलने-फूलने की स्वतंत्रता दी।
' कश्मीरियत ' को ' भारतीयता ' के दर्शन की ही अभिव्यक्ति बताया गया।
12वीं-13वीं शताब्दी में आए सूफी संतों और इस्लामी विद्वानों ने भारत की प्रेम और करुणा आधारित संस्कृति को अपनाया।
युवा पीढ़ी से वसुधैव कुटुंबकम के विचार को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाने का आह्वान।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार, 27 जून 2026 को श्रीनगर में आयोजित एक अंतरधार्मिक संवाद कार्यक्रम में कहा कि प्राचीन हिंदू धर्म — सनातन धर्म — ने अपने हजारों साल के इतिहास में कभी स्वयं को किसी पर थोपा नहीं, बल्कि विविधता और सहअस्तित्व को अपनी मूल शक्ति के रूप में अपनाया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद और अंतरधार्मिक सद्भाव फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।

भारतीय सभ्यता की विरासत

उपराज्यपाल सिन्हा ने भारत को एक ऐसी प्राचीन सभ्यता के रूप में रेखांकित किया जो आपसी सम्मान की नींव पर खड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत में विभिन्न धर्म न केवल सहअस्तित्व में रहे हैं, बल्कि फले-फूले हैं और विश्व को शांति का संदेश भी दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राचीन भारत ने ईसाई धर्म, इस्लाम, यहूदी धर्म और पारसी धर्म को यहाँ पनपने की पूर्ण स्वतंत्रता दी।

सिन्हा ने कहा, वेद और उपनिषद जैसे प्राचीन ग्रंथ सदैव सद्भावपूर्ण जीवन का पाठ पढ़ाते आए हैं। उन्होंने इस दर्शन को 'भारतीयता' की संज्ञा दी — वह लोकाचार जो विश्व को सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान, सत्य की खोज, विविधता में एकता और वसुधैव कुटुंबकम का विचार देता है।

सनातन धर्म का वैश्विक संदेश

उपराज्यपाल ने कहा कि संघर्षों और असहिष्णुता से जूझ रही आज की दुनिया में सनातन धर्म और भारतीय दर्शन की मूल भावना एक मार्गदर्शक प्रकाश का काम कर सकती है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया धर्म, भाषा और नस्ल के आधार पर बंटी हुई है, लेकिन भारतीय विचार में इन विभाजनों को पाटने की अनूठी क्षमता है।

उन्होंने ऋषियों के उस शाश्वत सिद्धांत का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि सत्य किसी एक मार्ग तक सीमित नहीं है — सत्य अनंत है और उस तक पहुँचने के अनेक मार्ग हैं। इसीलिए, उन्होंने कहा, भारत ने विविधता को विभाजन नहीं बल्कि वरदान माना है।

कश्मीरियत और भारतीयता का संबंध

सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर को भारत का 'मुकुट रत्न' बताते हुए कहा कि यहाँ सदियों से सद्भाव और सहअस्तित्व जीवन का अभिन्न अंग रहा है। उन्होंने 'कश्मीरियत' शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि यह वास्तव में 'भारतीयता' के दर्शन से उत्पन्न हुआ है — वह भावना जो वैदिक काल से ही सभी धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं के प्रति समान सम्मान का आह्वान करती है।

गौरतलब है कि यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब जम्मू-कश्मीर में अंतरधार्मिक संवाद और सामाजिक एकजुटता को नई गति देने के प्रयास तेज हो रहे हैं।

इस्लाम और भारतीय संस्कृति का संगम

उपराज्यपाल ने कहा कि जब 12वीं और 13वीं शताब्दी में इस्लाम भारत आया और सूफी संत तथा इस्लामी विद्वान यहाँ पधारे, तो उन्होंने प्रेम, आध्यात्मिकता, करुणा और समानता पर आधारित एक अद्वितीय भारतीय संस्कृति पाई। यह मिलन भारत की उस सहिष्णु परंपरा का प्रमाण है जो विभिन्न विचारधाराओं को आत्मसात करने में सक्षम रही है।

युवा पीढ़ी से आह्वान

सिन्हा ने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएँ और विश्व को यह याद दिलाएँ कि आपसी सम्मान के माध्यम से ही स्थायी शांति संभव है। उन्होंने कहा कि भारत एक जीवंत विचार है जो यह घोषणा करता है कि मानवता को एक परिवार की तरह मिलकर रहना चाहिए। आने वाले समय में इस संवाद की निरंतरता और इसका विस्तार ही भारत की वैश्विक भूमिका को परिभाषित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि ऐसे संवाद तब तक अधूरे हैं जब तक ज़मीनी स्तर पर अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी और उनकी चिंताओं को नीतिगत प्रतिक्रिया नहीं मिलती। वसुधैव कुटुंबकम का आदर्श तभी सार्थक होगा जब यह मंच से उतरकर प्रशासनिक व्यवहार में भी दिखे।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सनातन धर्म के बारे में क्या कहा?
उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि सनातन धर्म — विश्व का सबसे प्राचीन जीवित धर्म — ने कभी स्वयं को किसी पर नहीं थोपा, बल्कि विविधता और सहअस्तित्व को अपनाया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत ने ईसाई धर्म, इस्लाम, यहूदी धर्म और पारसी धर्म को फलने-फूलने की स्वतंत्रता दी।
यह कार्यक्रम कहाँ और किसने आयोजित किया था?
यह 'अंतरधार्मिक संवाद' कार्यक्रम 27 जून 2026 को श्रीनगर में राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद और अंतरधार्मिक सद्भाव फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।
'कश्मीरियत' और 'भारतीयता' में क्या संबंध बताया गया?
उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि 'कश्मीरियत' वास्तव में 'भारतीयता' के दर्शन से उत्पन्न हुई है — वह भावना जो वैदिक काल से ही सभी धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं के प्रति समान सम्मान का संदेश देती है। दोनों को एक ही मूल विचार की दो अभिव्यक्तियाँ बताया गया।
सिन्हा ने युवाओं से क्या अपील की?
उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे भारत की सहिष्णुता और आपसी सम्मान की विरासत को आगे बढ़ाएँ और विश्व को यह याद दिलाएँ कि स्थायी शांति केवल परस्पर सम्मान के माध्यम से ही संभव है।
भारत में इस्लाम के आगमन पर उपराज्यपाल ने क्या कहा?
सिन्हा ने कहा कि जब 12वीं और 13वीं शताब्दी में इस्लाम भारत आया और सूफी संत तथा इस्लामी विद्वान यहाँ पधारे, तो उन्होंने प्रेम, आध्यात्मिकता, करुणा और समानता पर आधारित एक अद्वितीय भारतीय संस्कृति पाई — जो भारत की सहिष्णु परंपरा का प्रमाण है।
राष्ट्र प्रेस
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