भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद: नवारो बोले — ट्रंप और मोदी खुद सुलझाएंगे रूसी तेल का मामला
सारांश
मुख्य बातें
व्हाइट हाउस ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने मंगलवार, 11 अगस्त को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद और अमेरिका की ओर से प्रस्तावित ऊंचे टैरिफ के मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता के जरिए सुलझाएंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापार संबंधी बातचीत सक्रिय रूप से जारी है।
नवारो का बयान: 'दोनों नेता खुद निपटाएंगे'
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नवारो ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री के बीच बहुत अच्छे कार्य संबंध हैं। वे इस मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। इस मामले में उनके बीच आकर टिप्पणी करना मेरा काम नहीं है।' नवारो ने संभावित टैरिफ के स्वरूप या समयसीमा पर सीधे कोई जवाब नहीं दिया।
लिंडसे ग्राहम विधेयक की पृष्ठभूमि
नवारो एक ऐसे सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम से जुड़े एक विधेयक का उल्लेख था। पिछले सप्ताह अमेरिकी सीनेट ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' को 86-11 मतों से पारित किया। इस कानून के तहत रूसी तेल और गैस के पाँच सबसे बड़े खरीदार देशों तथा प्रतिबंधों से बचने में शामिल पाँच प्रमुख देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। गौरतलब है कि इस विधेयक में भारत का नाम ऐसे किसी देश के रूप में स्वतः शामिल नहीं किया गया है जिस पर अनिवार्य रूप से टैरिफ लगाया जाएगा।
भारत-रूस ऊर्जा व्यापार पर नवारो के आरोप
नवारो ने फाइनेंशियल टाइम्स में कुछ महीने पहले लिखे अपने एक लेख का हवाला दिया, जो भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार से संबंधित था। उन्होंने कहा, 'रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस के तेल व्यापार में ज्यादा शामिल नहीं था, लेकिन उसके बाद उसकी भागीदारी काफी बढ़ गई।' नवारो ने यह भी आरोप लगाया कि भारत रूसी तेल से जुड़े उत्पादों की बिक्री कर रहा है और इस व्यापार से रूस को युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक मदद मिली है — हालाँकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आँकड़ा पेश नहीं किया।
नवारो का दावा: मामला 'सुलझ चुका'
नवारो ने कहा कि यह मुद्दा अब हल हो चुका है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस कार्रवाई के बाद यह समस्या समाप्त हुई — या वे भारत की तेल खरीद, पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री या व्यापार के किसी अन्य पहलू की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'यह मुद्दा अब हल हो चुका है। हो सकता है कि मेरे उस लेख की भी इसमें कुछ भूमिका रही हो।'
ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति का बचाव
नवारो ने ट्रंप प्रशासन की व्यापक टैरिफ नीति का भी पक्ष लेते हुए कहा कि टैरिफ के कारण विदेशी कंपनियाँ अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित कर रही हैं और घरेलू निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि महंगाई के कारण अमेरिकी नागरिक अभी भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि नीतियों के सकारात्मक परिणाम मिलने शुरू हो गए हैं। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का अगला दौर दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक दबाव की पृष्ठभूमि में आकार लेगा।