रूसी तेल पर अमेरिकी कानून का भारत करेगा अध्ययन, पीयूष गोयल बोले — 'उचित समय पर होगी चर्चा'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत सरकार पहले नए अमेरिकी कानून के विवरण का गहन अध्ययन करेगी, जिसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। गोयल ने कहा कि इस विषय पर 'उचित समय पर' चर्चा की जाएगी। यह बयान उस समय आया है जब भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत पहले से जारी है।
नया अमेरिकी कानून क्या है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट, 2026' को कानूनी रूप दिया है। यह विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित किया गया था। इस कानून के अंतर्गत ट्रंप प्रशासन को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पाँच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का व्यापक अधिकार प्राप्त हुआ है।
गौरतलब है कि यह 100 प्रतिशत टैरिफ स्वचालित रूप से लागू नहीं होगा — यह नए कानून के तहत अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाया जा सकने वाला अधिकतम शुल्क है।
भारत और चीन पर असर की आशंका
चीन और भारत रूसी कच्चे तेल के दो सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं। यदि यह टैरिफ लागू होता है, तो इन देशों के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे दोनों देशों के व्यापार संबंध प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए यह एक संवेदनशील कूटनीतिक और आर्थिक संतुलन का प्रश्न है।
कानून की विशेषताएँ और अपवाद
यह कानून केवल रूसी तेल तक सीमित नहीं है — इसमें ईरान के ऊर्जा और हथियार क्षेत्रों पर भी प्रावधान शामिल हैं। साथ ही, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूसी सरकार के वरिष्ठ सदस्यों, बैंकों और रूस की तथाकथित 'शैडो फ्लीट' के टैंकरों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी है।
हालाँकि, विधेयक में उन देशों के लिए अपवाद का भी उल्लेख है जो अपनी प्राकृतिक गैस का 15 प्रतिशत से कम रूस से आयात करते हैं और धीरे-धीरे रूस पर निर्भरता घटाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस कानून का नाम दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है, जिनका जुलाई 2026 में निधन हो गया था और जो यूक्रेन के सबसे मजबूत अमेरिकी समर्थकों में से एक थे।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और दोनों पक्ष नियमित संपर्क में हैं। मंत्री गोयल इस महीने के अंत में मिल्वौकी में होने वाली जी20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर के साथ द्विपक्षीय चर्चा कर सकते हैं। इस बैठक को नए कानून के संदर्भ में भारत की प्रतिक्रिया स्पष्ट करने के लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
भारत सरकार फिलहाल कानून के सभी पहलुओं की समीक्षा कर रही है। नई दिल्ली की प्रतिक्रिया इस बात पर भी निर्भर करेगी कि अमेरिकी प्रशासन इस कानून को किस तरह लागू करता है और भारत को 'अपवाद' की श्रेणी में रखने की गुंजाइश कितनी है। अगले कुछ हफ्तों में मिल्वौकी में होने वाली द्विपक्षीय वार्ता इस मामले पर भारत के रुख को और स्पष्ट कर सकती है।