रूस तेल खरीद पर अमेरिकी 'सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट': भारत बोला — 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा से नहीं होगा समझौता
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय ने 17 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पर सरकार बारीकी से नज़र रख रही है और 140 करोड़ भारतीय नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यह कानून रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान करता है।
कानून का स्वरूप और मतदान
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को इस विधेयक को 262 बनाम 159 मतों से पारित किया। इससे पहले 7 अगस्त को सीनेट ने भी इसे 86 बनाम 11 मतों से मंजूरी दे दी थी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा, जिनके सलाहकारों ने भी इसे अनुमोदित करने की सिफारिश की है।
इस कानून का मूल उद्देश्य यूक्रेन के विरुद्ध रूस के सैन्य अभियान को आर्थिक रूप से कमज़ोर करना है। इसके तहत रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा क्षेत्र की संस्थाओं और रूस के सैन्य अभियानों का समर्थन करने वाली विदेशी इकाइयों को निशाना बनाया गया है।
भारत पर संभावित असर
गौरतलब है कि भारत का नाम इस कानून में किसी विशेष लक्षित देश के रूप में नहीं रखा गया है और न ही भारत के लिए कोई अलग शुल्क-दर निर्धारित की गई है। हालाँकि, कानून के प्रावधान उन बड़े देशों पर लागू हो सकते हैं जो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करते हैं या रूस पर लगे तेल-प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद करते हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इस सूची की समीक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर अन्य देशों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है — यह प्रावधान भारत जैसे बड़े रूसी ऊर्जा-आयातकों के लिए दीर्घकालिक अनिश्चितता का स्रोत बन सकता है।
भारत की आधिकारिक स्थिति
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ महीनों में इस मुद्दे पर अमेरिका के विभिन्न अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा की है। भारत ने स्पष्ट रूप से अमेरिका को बताया है कि इस कानून का असर केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों पर नहीं, बल्कि समूचे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पर भी पड़ सकता है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा हासिल करने की नीति जारी रखेगा और बाज़ार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति को अनुकूलित करता रहेगा।
व्यापार और उद्योग पर प्रभाव
सरकार ने कहा कि वह इन घटनाक्रमों के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक बना हुआ है — एक ऐसी स्थिति जो 2022 के बाद से भारत की ऊर्जा आयात-नीति की धुरी बन चुकी है।
यदि भविष्य में भारत को इस कानून के दायरे में लाया गया, तो यह देश के ऊर्जा आयात बिल और व्यापार संतुलन दोनों को प्रभावित कर सकता है। आने वाले हफ्तों में राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर और उसके बाद की समीक्षा-प्रक्रिया भारत की ऊर्जा कूटनीति की दिशा तय करेगी।