अमेरिका और भारत का तेल बाजार में सहयोग: सर्जियो गोर
सारांश
Key Takeaways
- भारत की रूस से तेल खरीद ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- सर्जियो गोर ने भारत की भूमिका को सराहा है।
- ईरान संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव हो रहा है।
- व्हाइट हाउस ने भारत को तेल खरीदने की छूट दी थी।
- भारत का तेल कंजम्पशन वैश्विक नीति पर असर डालता है।
नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने तेल की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उल्लेख किया कि भारत का रूस से तेल खरीदना ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए आवश्यक है।
गोर का कहना है कि भारत तेल की कीमतों को स्थिर रखने में एक महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है। अमेरिका का मानना है कि भारत द्वारा रूस से तेल की निरंतर खरीद इसी दिशा में एक कदम है।
उन्होंने आगे कहा, "भारत विश्व का सबसे बड़ा तेल कंज्यूमर और रिफाइनर है, और अमेरिका और भारत को मिलकर मार्केट में स्थिरता लाने के लिए काम करना आवश्यक है।"
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक तेल बाजार में ईरान संकट के कारण बड़ा उतार-चढ़ाव हो रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल की आपूर्ति पर खतरा है और कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
भारत तीसरा सबसे बड़ा तेल कंज्यूमर और रिफाइनर है, इसलिए इसके नीतिगत निर्णय वैश्विक बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।
इससे पहले, व्हाइट हाउस ने कहा था कि ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की कोशिश के तहत, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए छूट दी थी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि यह निर्णय राष्ट्रपति, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सदस्यों के बीच चर्चा के बाद लिया गया।
लेविट ने एक सवाल के जवाब में कहा, "राष्ट्रपति और ट्रेजरी सचिव तथा पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम इस निर्णय पर इसीलिए पहुंची क्योंकि भारत में हमारे सहयोगी अच्छे रहे हैं।"
उन्होंने बताया कि यह कदम ईरान के संकट के कारण होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति में रुकावटों को दूर करने के लिए उठाया गया है। लेविट ने कहा, "जब हम ईरान के कारण दुनिया भर में तेल की आपूर्ति के इस 'अस्थायी अंतर' को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तब हमने उन्हें अस्थायी रूप से रूसी तेल लेने की अनुमति दी है।"
लेविट ने कहा कि छूट मिलने से पहले ही शिपमेंट भेज दिए गए थे। व्हाइट हाउस के अनुसार, प्रशासन को उम्मीद नहीं है कि इस व्यवस्था से मास्को को आर्थिक रूप से कोई खास लाभ होगा।