रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ: अमेरिकी संसद ने 'ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026' पारित किया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी कांग्रेस ने 17 सितंबर 2026 को 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' पारित कर दिया, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है और रूसी उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान है। यह विधेयक अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा, जिनके सलाहकारों ने इसे पहले ही अपनी मंजूरी दे दी है।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इस विधेयक को 262 बनाम 159 मतों से पारित किया। इससे पहले 7 अगस्त को सीनेट इसे 86 बनाम 11 मतों से स्वीकृति दे चुकी थी — एक असाधारण द्विदलीय बहुमत जो रूस के खिलाफ अमेरिकी विधायी दृढ़ता को दर्शाता है। 58 डेमोक्रेट सांसदों ने इसका समर्थन किया, जबकि केवल 7 रिपब्लिकन इसके विरोध में रहे।
विधेयक का नाम सीनेटर लिंडसे ग्राहम की स्मृति में रखा गया है, जिन्होंने इस पैकेज को तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। यह कानून फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर व्यापक सैन्य हमले के बाद से डेमोक्रेट और रिपब्लिकन नेताओं के एक वर्ष से अधिक के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
विधेयक में क्या है
हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी के अनुसार, इस विधेयक में रूसी उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान है। इसके अलावा, रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इसकी समीक्षा करेगा और ज़रूरत पड़ने पर अन्य देशों को भी इस सूची में जोड़ा जा सकता है।
विधेयक रूस के बड़े वित्तीय संस्थानों, प्रतिबंधित रूसी बैंकों के साथ लेन-देन करने वाले विदेशी बैंकों, और रूसी प्रतिबंधों को दरकिनार करने में सहायक जहाजों, उनके मालिकों, संचालकों, बीमा कंपनियों तथा बंदरगाहों को भी निशाना बनाता है। इसके साथ ही, ईरान सैंक्शन्स एक्ट 1996 की अवधि 2031 तक बढ़ाई जाएगी।
गौरतलब है कि विधेयक रूस और उसके ऊर्जा क्षेत्र में नए अमेरिकी निवेश पर रोक लगाता है, साथ ही रूसी सरकारी ऋण खरीदने और प्रतिबंधों की परिधि से बाहर निकलने के लिए इस्तेमाल होने वाली वित्तीय सेवाओं पर भी पाबंदी लगाई जाएगी।
छूट के प्रावधान
सीनेटर केटी ब्रिट के कार्यालय के अनुसार, जिन देशों की रूस से प्राकृतिक गैस आयात की मात्रा रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है और जो अपनी खरीद घटाने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं, उन्हें इस कानून से छूट मिल सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत का नाम किसी विशेष लक्षित देश के रूप में नहीं दिया गया है और न ही भारत के लिए कोई अलग टैरिफ दर निर्धारित की गई है।
विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया
कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने इस विधेयक का विरोध यह कहते हुए किया कि राष्ट्रपति ट्रंप को दिए जाने वाले टैरिफ अधिकारों का दुरुपयोग हो सकता है। डेमोक्रेट प्रतिनिधि जोकिन कास्त्रो ने कहा, 'मुझे चिंता है कि इस विधेयक से मिले टैरिफ अधिकारों का इस्तेमाल ट्रंप अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए कर सकते हैं, न कि उन देशों पर दबाव बनाने के लिए जो रूसी तेल खरीदते हैं।' हालाँकि कई अन्य डेमोक्रेट सांसदों का मानना था कि मतभेदों के बावजूद इस विधेयक को पारित किया जाना चाहिए।
यूक्रेन कॉकस के सह-अध्यक्ष ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने कहा, 'शांति तभी संभव होती है जब आक्रामकता की कीमत उसके लाभ से ज़्यादा हो जाए।' प्रतिनिधि स्टेनी होयर ने बहस के दौरान कहा, 'यह रूस-विरोधी और यूक्रेन-समर्थक विधेयक है। हमें इसे पारित करना चाहिए।'
आगे क्या होगा
विधेयक के कानून बनने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर ज़रूरी हैं। रूस से संबंधित प्रतिबंधों को स्थायी रूप से हटाने के लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस को यह प्रमाणित करना होगा कि रूस ने यूक्रेन की स्वतंत्र सरकार द्वारा स्वीकृत शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और सैन्य कार्रवाई बंद की है। यह विधेयक रूस पर आर्थिक दबाव को नई ऊँचाई तक ले जाने का प्रयास है, जिसके दूरगामी भू-राजनीतिक असर होने की संभावना है।