रूसी तेल छूट का बचाव: स्कॉट बेसेंट बोले — बिना राहत के कीमत 150 डॉलर तक पहुंचती
सारांश
Key Takeaways
- स्कॉट बेसेंट ने सीनेट समिति में कहा — रूसी तेल छूट न होती तो कीमत 150 डॉलर/बैरल तक पहुंच सकती थी।
- इस छूट से 25 करोड़ बैरल से अधिक तेल वैश्विक बाजार में बनाए रखा गया।
- सीनेटर क्रिस कून्स ने चेतावनी दी कि छूट से रूस को अरबों डॉलर मिल सकते हैं और युद्ध लंबा खिंच सकता है।
- 10 से अधिक गरीब देशों की अपील पर यह राहत केवल 30 दिनों के लिए बढ़ाई गई।
- अमेरिका में डेलावेयर और रोड आइलैंड में लोग 4 डॉलर प्रति गैलन से अधिक पर पेट्रोल खरीद रहे हैं।
- बेसेंट के अनुसार तेल बाजार 'बैकवर्डेशन' में है — भविष्य में कीमतें घट सकती हैं।
वाशिंगटन, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रूस के तेल पर लगे प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी छूट को पूरी तरह उचित ठहराते हुए कहा कि यह निर्णय वैश्विक तेल बाजार को संकट से बचाने के लिए जरूरी था। उन्होंने दावा किया कि यदि यह राहत नहीं दी जाती, तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती थी। वहीं, विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषण का रास्ता खुल सकता है।
सीनेट समिति में बेसेंट का पक्ष
अमेरिकी सीनेट की एक समिति के सामने गवाही देते हुए स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह छूट उस दौर में दी गई जब वैश्विक तेल बाजार में भारी अनिश्चितता छाई हुई थी। उनका तर्क था कि इस कदम से आपूर्ति श्रृंखला स्थिर रही और कीमतों में असामान्य उछाल को रोका जा सका।
उन्होंने कहा, "हम 25 करोड़ बैरल से अधिक तेल बाजार में बनाए रखने में सफल रहे।" बेसेंट ने स्पष्ट किया कि आज तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल है, जबकि छूट न मिलने पर यह 150 डॉलर तक जा सकती थी। उनके अनुसार, यह नीति सीधे तौर पर आम नागरिकों को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई है।
डेमोक्रेट नेताओं का विरोध
सीनेटर क्रिस कून्स ने इस छूट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इससे रूस को अरबों डॉलर की अतिरिक्त आय हो सकती है, जो युद्ध को लंबा खींचने में सहायक बन सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय रूस पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाए रखना बेहद जरूरी है।
कून्स ने यह भी इशारा किया कि आम अमेरिकी नागरिकों को इस नीति का कोई ठोस लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा, "डेलावेयर में लोग आज भी 4 डॉलर प्रति गैलन के हिसाब से पेट्रोल खरीद रहे हैं।" इसी तरह सीनेटर जैक रीड ने भी कहा कि ऊंची ईंधन कीमतें आम परिवारों की जेब पर भारी बोझ बन रही हैं।
बेसेंट का जवाब और गरीब देशों की अपील
कून्स के सवालों का जवाब देते हुए बेसेंट ने कहा कि रूस या ईरान को इस छूट से कोई बड़ा रणनीतिक फायदा नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा, "मैं इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं।"
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस छूट को आगे बढ़ाने का निर्णय 10 से अधिक विकासशील और गरीब देशों की अपील पर लिया गया। उन्होंने कहा, "इन देशों ने हमसे राहत जारी रखने की गुजारिश की थी, इसलिए इसे केवल 30 दिनों के लिए बढ़ाया गया।"
तेल बाजार और आगे की राह
बेसेंट ने बताया कि वर्तमान में तेल बाजार 'बैकवर्डेशन' की अवस्था में है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में कीमतें नीचे आने की संभावना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाप्त होने के बाद पेट्रोल की कीमतें पहले जैसी या उससे भी कम हो सकती हैं।
यह विवाद अमेरिकी राजनीति में गहरे मतभेद को उजागर करता है। एक तरफ सरकार का तर्क है कि लचीली नीति से बाजार स्थिर रहता है, तो दूसरी तरफ आलोचकों का मानना है कि इससे रूस पर पश्चिमी दबाव कमजोर पड़ता है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि मध्य पूर्व में किसी भी तनाव या वैश्विक आपूर्ति बाधा का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। आने वाले हफ्तों में ओपेक+ की बैठक और रूस-यूक्रेन वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि तेल बाजार किस ओर जाता है।