रूसी तेल पर 100% टैरिफ बिल: भारत के निर्यात-आयात पर मंडराता संकट, विशेषज्ञ महेश सचदेव की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सीनेट ने लींडसे ग्राहम बिल को मंजूरी दे दी है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पाँच देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है। यह बिल अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में विचाराधीन है और वहाँ से पारित होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्वीकृति से यह कानून का रूप ले लेगा। विदेशी मामलों के विशेषज्ञ महेश सचदेव के अनुसार, इस बिल का सीधा असर भारत के व्यापारिक हितों पर पड़ सकता है।
बिल का स्वरूप और संसदीय यात्रा
विशेषज्ञ महेश सचदेव ने बताया कि अमेरिकी सीनेट ने लींडसे ग्राहम बिल को मंजूरी दी है, जिसमें रूसी तेल के पाँच बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति को संस्तुति के लिए भेजा गया है, वो चाहें तो ऐसा कर सकते हैं। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पारित हो जाएगा, फिर ट्रंप की सहमति के बाद कानून बन जाएगा। मुझे लगता है कि इसमें बाधा नहीं होगी।"
सचदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी जनमानस में यह धारणा गहरी हो चुकी है कि रूस यूक्रेन संघर्ष के लिए और ईरान अमेरिका के साथ तनाव के लिए जिम्मेदार है — यही भावना इस बिल की राजनीतिक ज़मीन तैयार करती है।
पिछली मिसाल और इस बार का फर्क
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारत को रूसी तेल आयात के कारण अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ा हो। सचदेव के अनुसार, पिछले वर्ष रूस से तेल-गैस आयात के चलते भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाई गई थी, हालाँकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में उस प्रावधान को चुनौती दी गई थी और वह केस हार गया था। इस बार, उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट की चुनौती के बाद बिल को कांग्रेस में पारित किया जा रहा है, तो अब इसके कानून बनने में कोई बाधा नहीं है।" यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौता अंतिम चरण में है।
भारत के निर्यात-आयात पर असर
सचदेव के अनुसार, इस बिल का जो भी अंतिम स्वरूप हो, वह भारत के लिए चुनौती अवश्य पेश करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को भारत के निर्यात की मुहिम को धक्का लगेगा और निर्यातकों तथा आयातकों — दोनों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले 25 प्रतिशत टैरिफ के बावजूद भारत के निर्यात में वृद्धि तो हुई थी, लेकिन वह अपेक्षाकृत कम रही। अब और ऊँचे टैरिफ की स्थिति में यह असर और गहरा हो सकता है।
तेल बाज़ार की संभावनाएँ और भारत की रणनीति
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और किसी भी दिशा में मुड़ने पर उसे बाज़ार की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। सचदेव ने कहा, "इस समय तेल के बाज़ार में गिरावट आई है। संभावना है कि होर्मुज खुलेगा तो तेल का प्रवाह बढ़ेगा और दाम नीचे गिर जाएंगे, तो ऐसी हालत में भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना पड़ेगा।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चीन पर इस बिल में कोई शुल्क नहीं लगाया गया, क्योंकि अमेरिका को आशंका है कि बीजिंग रेयर अर्थ मटीरियल्स की आपूर्ति बंद कर सकता है — जो अमेरिकी तकनीक और रक्षा उद्योग के लिए अपरिहार्य हैं।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को रूसी तेल आयात की अपनी नीति पर गंभीरता से पुनर्विचार करना होगा। यदि बिल कानून बनता है, तो नई दिल्ली को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और अमेरिका के साथ जारी व्यापार वार्ता में इस मुद्दे को संतुलित करने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।