ट्रंप ने 'ग्राहम एक्ट' के तहत 100% टैरिफ लागू कर तुरंत माफ किया, भारत-चीन को रूसी तेल खरीद पर फिलहाल राहत
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 अक्टूबर 2026 को एक असाधारण कदम उठाते हुए 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शन्स रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' के तहत 100 प्रतिशत दंडात्मक आयात शुल्क लागू किया और उसी राष्ट्रपति आदेश में तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित भी कर दिया। इस फैसले से भारत और चीन समेत रूसी तेल के प्रमुख खरीदार देशों को भारी शुल्क से अस्थायी राहत मिल गई है। यह आदेश ऐसे समय आया जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के दौरे पर भारत रवाना हो रहे हैं।
ग्राहम एक्ट: पृष्ठभूमि और समयसीमा
ट्रंप ने इस कानून पर 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे। कानून के अनुसार, रूस से तेल और गैस खरीदने वाले सबसे बड़े देशों पर 30 दिनों के भीतर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाना था और यह समयसीमा 18 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रही थी।
कानून के प्रावधानों के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 के बाद रूस से नया कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पाँच सबसे बड़े आयातकों के सामान पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान था। इसके अतिरिक्त, रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों की अनदेखी में मदद करने वाले शीर्ष पाँच देशों के सामान पर भी 100 प्रतिशत और रूस से आयातित वस्तुओं पर 500 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ाने का प्रावधान था।
आदेश में छूट का प्रावधान
व्हाइट हाउस की ओर से शुक्रवार देर रात जारी इस आदेश की धारा 4 में इन सभी उपायों को तत्काल निलंबित कर दिया गया। ट्रंप ने लिखा, 'मैं इसके द्वारा ग्राहम एक्ट की धारा 112 और 113, या इस आदेश के तहत लगाए गए किसी भी शुल्क को माफ करता हूँ।' इसके साथ ही कानून के तहत विदेशी व्यक्तियों और संस्थाओं पर लगने वाले अधिकांश प्रतिबंधों को भी छूट दे दी गई है।
आदेश में कहा गया है कि यह छूट तब तक जारी रहेगी जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से परामर्श के बाद आगे कार्रवाई की आवश्यकता न समझी जाए। उल्लेखनीय है कि आदेश में किसी भी देश का नाम नहीं लिया गया और दी गई छूट की कोई निश्चित समयसीमा भी तय नहीं की गई है।
निगरानी तंत्र बरकरार, दबाव पूरी तरह खत्म नहीं
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को विदेश, वित्त और ऊर्जा विभागों के साथ मिलकर यह निगरानी करने का निर्देश दिया गया है कि कौन-से देश रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं, और भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रपति को सूचित किया जाएगा। साथ ही व्यापार प्रतिनिधि को रूसी तेल प्रतिबंधों की अनदेखी में सहायता करने वाले शीर्ष पाँच देशों की पहचान भी करनी होगी।
गौरतलब है कि यह आदेश रूस पर पहले से लागू अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं बदलता। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रूस से जुड़े मौजूदा प्रतिबंध और अन्य दंडात्मक उपाय पहले की तरह लागू रहेंगे।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंध और रुबियो का दौरा
भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। फरवरी 2026 में अमेरिका ने भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क हटा दिया था जो रूस से तेल खरीदने के कारण जुड़ा था। उसी समझौते के तहत भारतीय सामान पर अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ भी 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था। दोनों देश फिलहाल व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के करीब हैं।
इस पृष्ठभूमि में विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच समरकंद, मुंबई और जामनगर का दौरा करेंगे। 20 अक्टूबर को मुंबई में उनकी विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक होने वाली है। इसके अलावा वह जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स — जो दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी परिसरों में से एक है — का भी दौरा करेंगे।
अमेरिकी कांग्रेस की माँग और राजनीतिक दबाव
गुरुवार को अमेरिकी सांसद माइकल मैककॉल (रिपब्लिकन) और जिम कोस्टा (डेमोक्रेट) ने ट्रंप को एक संयुक्त पत्र लिखकर कानून को पूरी तरह लागू करने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि अगर छूट दी जाए तो वह सीमित समय के लिए हो और रूस को मिल रहे समर्थन में वास्तविक कमी से जुड़ी हो। शुक्रवार के आदेश में दी गई छूट की कोई तय समयसीमा नहीं होने से यह माँग व्यावहारिक रूप से अनसुनी रह गई।
यह ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर अमेरिकी नीति में ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं। आने वाले हफ्तों में व्यापार प्रतिनिधि की निगरानी रिपोर्ट और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण की घोषणा इस कूटनीतिक समीकरण को नई दिशा दे सकती है।