15 अक्टूबर 2026
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राजा कृष्णमूर्ति का ट्रंप पर हमला: रूसी डीजल समझौता 'गैरकानूनी', ग्राहम एक्ट की 18 अक्टूबर डेडलाइन नज़दीक

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राजा कृष्णमूर्ति का ट्रंप पर हमला: रूसी डीजल समझौता 'गैरकानूनी', ग्राहम एक्ट की 18 अक्टूबर डेडलाइन नज़दीक

सारांश

भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने ट्रंप के रूसी डीजल समझौते को 'गैरकानूनी और असरदार नहीं' बताया। 18 अक्टूबर की ग्राहम एक्ट डेडलाइन नज़दीक है जो भारत और चीन पर 100% शुल्क का रास्ता खोल सकती है — यह सिर्फ अमेरिकी घरेलू विवाद नहीं, एक वैश्विक ऊर्जा और कूटनीतिक संकट है।

मुख्य बातें

राजा कृष्णमूर्ति ने 15 अक्टूबर 2026 को एक्स पर ट्रंप के रूसी डीजल समझौते को 'गैरकानूनी' और 'असरदार नहीं' बताया।
रूसी दूत किरिल दिमित्रिएव ने दावा किया कि समझौते से डीजल कीमतों में 5% की गिरावट आई — हालाँकि आँकड़े का स्रोत अस्पष्ट रहा।
सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल सहित 12 से अधिक अमेरिकी सांसद समझौता वापस लेने की माँग कर रहे हैं।
OFAC ने जनरल लाइसेंस 135 जारी किया, जो अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल लेन-देन की अनुमति देता है।
ग्राहम एक्ट की धारा 113 की समयसीमा 18 अक्टूबर 2026 को समाप्त; रूसी तेल के बड़े खरीदारों — जिनमें भारत और चीन शामिल हैं — पर 100% तक शुल्क का जोखिम।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार समझौते से करीब 4 अरब डॉलर रूसी अर्थव्यवस्था में जा सकते हैं।

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने 15 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूस से डीजल खरीदने की योजना को 'गैरकानूनी' और 'असरदार नहीं' करार दिया। यह विवाद ऐसे नाज़ुक मोड़ पर उभरा है जब 18 अक्टूबर 2026 को 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' की समयसीमा समाप्त हो रही है — एक कानून जो भारत और चीन जैसे रूसी तेल के बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का रास्ता खोलता है।

कृष्णमूर्ति के आरोप: पुतिन को अरबों, यूक्रेन को नुकसान

कृष्णमूर्ति ने एक्स पर लिखा, 'ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक गैरकानूनी युद्ध शुरू किया, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ गईं। अब वह रूस के साथ डीजल समझौता करके पुतिन को फायदा पहुंचा रहे हैं और साथ ही यूक्रेन पर रूसी तेल सुविधाओं पर हमले रोकने का दबाव डाल रहे हैं।' उनके अनुसार इस समझौते का तिहरा नुकसान है — पुतिन को अरबों डॉलर मिलेंगे, यूक्रेन पर हमले बढ़ेंगे और इसका आर्थिक बोझ अंततः अमेरिकी जनता पर पड़ेगा।

एक बाद की पोस्ट में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता 'पुतिन की युद्ध मशीन को आर्थिक मदद देगा, लेकिन अमेरिकी उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिलेगी।'

रूसी दूत दिमित्रिएव का पलटवार

रूस के निवेश और आर्थिक सहयोग मामलों के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने एक्स पर जवाब देते हुए कहा कि 'दुनिया के सभी व्यावहारिक नेता, जो अपनी जनता की भलाई चाहते हैं, वे रूस सहित किसी भी स्रोत से सस्ता डीजल, गैस और तेल चाहते हैं।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि इस समझौते के बाद डीजल की कीमतों में पाँच प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे अमेरिकी किसानों, उपभोक्ताओं और ऊर्जा बाजारों को फायदा हुआ है।

हालाँकि, दिमित्रिएव ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह आँकड़ा किस कालखंड पर आधारित है और इसकी गणना किस पद्धति से की गई।

अमेरिकी संसद में बढ़ता विरोध

कृष्णमूर्ति अकेले नहीं हैं। कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने कहा कि वह अपने 12 साथियों के साथ मिलकर ट्रंप से इस 'विनाशकारी रूसी डीजल समझौते' को वापस लेने की माँग कर रहे हैं। उनके अनुसार यह 'अमेरिका की सुरक्षा के हितों और यूक्रेन दोनों के साथ विश्वासघात है।'

दक्षिण कैरोलिना के प्रतिनिधि जेम्स क्लाइबर्न ने इस फैसले को 'गलती' बताया और कहा कि इससे रूस के युद्ध को आर्थिक मदद मिलेगी, जबकि ईंधन कीमतों पर असर बहुत कम होगा। एरिजोना के प्रतिनिधि ग्रेग स्टैंटन ने कहा कि यह योजना 'संभवतः गैरकानूनी' है। कैलिफोर्निया के प्रतिनिधि माइक लेविन ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इस समझौते के ज़रिए करीब चार अरब डॉलर अमेरिकी धन रूस की अर्थव्यवस्था में जा सकता है।

OFAC लाइसेंस और कानूनी ढाँचा

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने जनरल लाइसेंस 135 जारी किया है, जिसके तहत अप्रैल 2027 तक रूसी मूल के डीजल से जुड़े कुछ लेन-देन की अनुमति दी गई है। यह इसलिए अहम है क्योंकि ग्राहम एक्ट की धारा 113 राष्ट्रपति को उन देशों से आयात पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देती है जो रूस के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पाँच सबसे बड़े खरीदारों में हैं और समयसीमा के बाद भी नई खरीद जारी रखते हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति चाहें तो राष्ट्रीय हित का हवाला देकर इन शुल्कों से छूट भी दे सकते हैं — एक प्रावधान जो भारत और चीन जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक दाँव बन सकता है।

भारत और चीन पर असर

यह विवाद भारत के लिए भी प्रासंगिक है। यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार बन चुका है। ग्राहम एक्ट की समयसीमा के बाद यदि अमेरिका भारत पर शुल्क लगाता है, तो इससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप प्रशासन राष्ट्रीय हित की छूट का उपयोग करता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ग्राहम एक्ट की 18 अक्टूबर की डेडलाइन भारत को एक असहज विकल्प के सामने खड़ा कर सकती है। ट्रंप का OFAC लाइसेंस एक तरफ रूस को आर्थिक राहत देता है और दूसरी तरफ उन्हीं देशों पर शुल्क की तलवार लटकाता है जो उसी रूसी तेल के बड़े खरीदार हैं — यह विरोधाभास बताता है कि अमेरिकी नीति में रणनीतिक सुसंगति का अभाव है। दिमित्रिएव का '5% गिरावट' का दावा बिना पद्धति के है, जबकि '4 अरब डॉलर रूस को' का आँकड़ा न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे स्रोत से आता है — जनता को यह तय करना होगा कि वे किस पर भरोसा करें।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा कृष्णमूर्ति ने ट्रंप के रूसी डीजल समझौते की आलोचना क्यों की?
कृष्णमूर्ति का कहना है कि यह समझौता पुतिन की युद्ध मशीन को आर्थिक मदद देता है जबकि अमेरिकी उपभोक्ताओं को ईंधन कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिलती। उन्होंने इसे 'गैरकानूनी' और यूक्रेन के खिलाफ हथियार बताया।
ग्राहम एक्ट 2026 क्या है और इसकी 18 अक्टूबर डेडलाइन का क्या मतलब है?
'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' का वह प्रावधान है जिसके तहत राष्ट्रपति रूस के कच्चे तेल के पाँच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक शुल्क लगा सकते हैं। 18 अक्टूबर 2026 को यह समयसीमा समाप्त होती है, जिसके बाद भारत और चीन जैसे देश सीधे इस शुल्क के दायरे में आ सकते हैं।
OFAC का जनरल लाइसेंस 135 क्या है?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के OFAC ने जनरल लाइसेंस 135 जारी किया है जो अप्रैल 2027 तक रूसी मूल के डीजल से जुड़े कुछ विशेष लेन-देन को मंजूरी देता है। यह लाइसेंस ही इस पूरे विवाद की केंद्रीय कानूनी कड़ी है।
इस समझौते का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत यूक्रेन युद्ध के बाद से रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है, इसलिए ग्राहम एक्ट की डेडलाइन के बाद यदि अमेरिका शुल्क लगाता है तो भारत-अमेरिका व्यापार पर गहरा असर पड़ सकता है। हालाँकि राष्ट्रपति राष्ट्रीय हित का हवाला देकर छूट भी दे सकते हैं।
रूसी दूत किरिल दिमित्रिएव ने समझौते का बचाव कैसे किया?
दिमित्रिएव ने दावा किया कि समझौते के बाद डीजल कीमतों में 5% की गिरावट आई जिससे अमेरिकी किसानों और उपभोक्ताओं को फायदा हुआ। हालाँकि उन्होंने इस आँकड़े का स्रोत या कालखंड स्पष्ट नहीं किया।
राष्ट्र प्रेस
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