स्कॉट बेसेंट का दावा: ग्राहम कानून रूसी डीजल खरीद पर नहीं लगाता रोक, 18 अक्टूबर की समयसीमा अहम
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 11 अक्टूबर 2026 को उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध अधिनियम 2026 के तहत वाशिंगटन को रूसी डीजल खरीदने से रोका जाता है। यह बयान उस कानून की निर्णायक समयसीमा से ठीक एक सप्ताह पहले आया है, जो 18 अक्टूबर 2026 को समाप्त होती है और जिसके तहत भारत सहित रूसी कच्चे तेल के अन्य बड़े खरीदारों पर भारी टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
बेसेंट का बयान और कानूनी तर्क
फॉक्स न्यूज़ के 'फॉक्स एंड फ्रेंड्स वीकेंड' कार्यक्रम में कांग्रेस की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए बेसेंट ने कहा, 'सबसे पहले, हम इसे अपने पास मौजूद सभी कानूनी अधिकारों के साथ करेंगे।' उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि 'कांग्रेस में कोई भी जो कहता है कि चाहे वह पुराना बिल हो या मौजूदा लिंडसे ग्राहम बिल — हमें ऐसा करने से रोकता है, वह गलत है। यह अमेरिकी लोगों के लिए अच्छा है।' उन्होंने डीजल की कीमतें नीचे लाने के लक्ष्य को इस निर्णय की मूल प्रेरणा बताया।
हालाँकि, बेसेंट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रशासन किन ठोस कानूनी अधिकारों का हवाला दे रहा है, और 18 अक्टूबर को सक्रिय होने वाले टैरिफ प्रावधानों को किस तरह संभाला जाएगा।
ग्राहम कानून के प्रमुख प्रावधान
लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध अधिनियम 2026 को 18 सितंबर 2026 को कानून के रूप में हस्ताक्षरित किया गया था। अधिनियम की धारा 112 के तहत राष्ट्रपति को 30 दिनों के भीतर रूस से आयात होने वाले सभी सामानों पर — जिनमें पेट्रोलियम उत्पाद भी शामिल हैं — शुल्क 500 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा।
धारा 113 के तहत उन देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान है जो अधिनियम बनने से पहले के 12 महीनों में रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पाँच सबसे बड़े आयातकों में शामिल थे और जो 30 दिनों की अवधि के बाद जानबूझकर नई खरीदारी करते हैं। दोनों समयसीमाएं 18 अक्टूबर 2026 को समाप्त होती हैं।
यूरोप पर पाखंड का आरोप
बेसेंट ने यूरोपीय देशों पर पाखंड का तीखा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश न केवल खुद रूसी ऊर्जा से अलग होने में विफल रहे हैं, बल्कि उन्होंने यूक्रेन को दी गई मदद से कहीं अधिक रकम व्लादिमीर पुतिन के खजाने में पहुँचाई है। बेसेंट ने जनवरी में एक बयान में यह भी कहा था कि 'रूसी तेल भारत में जाता है, परिष्कृत उत्पाद बाहर आते हैं, और यूरोपीय उन परिष्कृत उत्पादों को खरीदते हैं — वे खुद के खिलाफ युद्ध का वित्तपोषण कर रहे हैं।'
भारत पर सीधा असर
भारत का इस पूरे घटनाक्रम में सीधा हित जुड़ा हुआ है। 2022 से भारत रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक बना हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2025 में इन खरीदों को लेकर भारतीय सामानों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। भारत के विदेश मंत्रालय ने 4 अगस्त 2025 को पलटवार करते हुए कहा था कि संयुक्त राज्य अमेरिका स्वयं अपने परमाणु उद्योग के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिए पैलेडियम तथा उर्वरक और रसायनों का आयात करता रहा है।
गौरतलब है कि ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि रूस शुरुआत में 3 लाख टन से अधिक डीजल अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में आपूर्ति करेगा। वित्त विभाग ने बेसेंट का पूरा साक्षात्कार एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-रूस-भारत का ऊर्जा त्रिकोण तेजी से जटिल हो रहा है। 18 अक्टूबर की समयसीमा यह तय करेगी कि प्रशासन कानूनी प्रावधानों को दरकिनार करने की स्थिति में है या नहीं। भारत, जो रूसी तेल पर अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा निर्भर करता है, इस घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है और आने वाले दिनों में कूटनीतिक सक्रियता बढ़ने की संभावना है।