20 सितंबर 2026
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पुरमंडल और उत्तरवेहिनी में ₹14 करोड़ की विरासत परियोजनाएँ, उपराज्यपाल सिन्हा ने रखी आधारशिला

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पुरमंडल और उत्तरवेहिनी में ₹14 करोड़ की विरासत परियोजनाएँ, उपराज्यपाल सिन्हा ने रखी आधारशिला

सारांश

जम्मू के पुरमंडल और उत्तरवेहिनी में ₹14 करोड़ की विरासत परियोजनाओं की आधारशिला रखते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संस्कृति और विकास को अविभाज्य बताया — यह पहल धरोहर संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देने का प्रयास है।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 20 सितंबर 2026 को पुरमंडल में ₹7.15 करोड़ और उत्तरवेहिनी में ₹6.85 करोड़ की विरासत परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
दोनों स्थलों पर कुल ₹14 करोड़ की धरोहर संरक्षण और विकास पहल शुरू हुई।
प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर , शिव मंदिर , राम मंदिर (पुरमंडल) और उत्तरवेहिनी के ऐतिहासिक मंदिर परिसरों का आधुनिक व पारंपरिक तकनीकों से जीर्णोद्धार होगा।
परियोजना से माता वैष्णो देवी , शिव खोरी और बाबा अमरनाथ के तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर संपर्क व्यवस्था बनेगी।
स्थानीय हस्तशिल्प, होमस्टे, परिवहन और खानपान क्षेत्र को नया आर्थिक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 20 सितंबर 2026 को जम्मू के पुरमंडल में प्राचीन धरोहरों के जीर्णोद्धार, पुनर्स्थापन और पुनरुद्धार के लिए ₹7.15 करोड़ की परियोजनाओं और पवित्र उत्तरवेहिनी स्थल पर संबंधित विकास कार्यों के लिए ₹6.85 करोड़ की परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस प्रकार दोनों स्थलों पर कुल ₹14 करोड़ की धरोहर संरक्षण पहल का शुभारंभ किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम में सभा को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि यह पहल केवल ईंटों और पत्थरों की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि 'राष्ट्र के गौरवशाली अतीत को उज्ज्वल भविष्य से जोड़ने का प्रयास' है। उन्होंने कहा कि इतिहास, पवित्र ज्ञान और धर्म में निहित मूल्यों का संरक्षण ही राष्ट्र की जीवनरेखा है।

उपराज्यपाल ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि 'जो राष्ट्र अपनी विरासत को भूल जाता है, वह अपनी नींव खो देता है', लेकिन जो राष्ट्र अपनी जड़ों का सम्मान कर उन्हें पुनर्जीवित करता है, वह आने वाली पीढ़ियों को आत्मविश्वास और मजबूत पहचान के साथ खड़ा करता है।

किन स्थलों का होगा जीर्णोद्धार

पुरमंडल में प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर और प्राचीन राम मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना है। इसके साथ ही उत्तरवेहिनी के ऐतिहासिक मंदिर परिसरों को भी पुनर्स्थापित किया जाएगा। पवित्र देविका नदी के तट पर स्थित पुरमंडल सदियों से संतों, ऋषियों और आध्यात्मिक साधकों का केंद्र रहा है। उपराज्यपाल ने बताया कि इन स्थलों पर आधुनिक संरक्षण तकनीकों और पारंपरिक स्थापत्य कला के मिश्रण से जीर्णोद्धार किया जाएगा।

गौरतलब है कि इन प्राचीन मंदिरों की पत्थर की नक्काशी, पवित्र तालाब और ऐतिहासिक संरचनाएँ उत्कृष्ट स्थापत्य और कलात्मक उपलब्धि की प्रतीक हैं, जिनमें से अधिकांश समय और उपेक्षा के कारण क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

पर्यटन और आर्थिक प्रभाव

उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि इस जीर्णोद्धार कार्य से जम्मू-कश्मीर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। बेहतर बुनियादी ढाँचे, संपर्क मार्गों और प्रकाश व्यवस्था से माता वैष्णो देवी, शिव खोरी, रघुनाथ मंदिर और बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों को 'छोटी काशी' तक पहुँचना आसान होगा।

उन्होंने कहा कि यह पहल स्थानीय हस्तशिल्प, आतिथ्य, होमस्टे, परिवहन और खानपान उद्योग के लिए एक शक्तिशाली प्रोत्साहन साबित होगी, जिससे युवाओं के लिए आजीविका के अवसर और कारीगरों व छोटे उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार होंगे।

आम जनता पर असर

उपराज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि इन पवित्र स्थलों की पहुँच में सुधार और इनकी भव्यता बढ़ाने से देश-दुनिया के आध्यात्मिक साधकों के लिए पुरमंडल और उत्तरवेहिनी के द्वार खुलेंगे। उनके अनुसार 'हर पुनर्स्थापित ईंट, हर निर्मित मार्ग और यहाँ आने वाला हर पर्यटक इस क्षेत्र के लोगों की आर्थिक समृद्धि में प्रत्यक्ष योगदान देगा।'

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। इस परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गुणवत्ता और स्थानीय समुदाय की भागीदारी होगी। जम्मू-कश्मीर में धार्मिक पर्यटन के नाम पर पहले भी आधारशिलाएँ रखी गई हैं, पर जमीनी लाभ हमेशा घोषणाओं के अनुरूप नहीं रहा। आधुनिक और पारंपरिक स्थापत्य के मिश्रण का दावा आकर्षक है, किंतु स्थानीय कारीगरों को प्राथमिकता देने और पारंपरिक शिल्प को जीवित रखने के ठोस प्रावधान सार्वजनिक नहीं किए गए। पर्यटन से आर्थिक समृद्धि का वादा तभी पूरा होगा जब लाभ बिचौलियों तक सीमित न रहे और सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुँचे।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरमंडल विरासत परियोजना क्या है और इसमें कितना खर्च होगा?
यह जम्मू के पुरमंडल में प्राचीन मंदिरों और धरोहर स्थलों के जीर्णोद्धार, पुनर्स्थापन और पुनरुद्धार की परियोजना है, जिसकी लागत ₹7.15 करोड़ है। 20 सितंबर 2026 को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इसकी आधारशिला रखी।
उत्तरवेहिनी परियोजना में क्या विकास कार्य होंगे?
उत्तरवेहिनी के ऐतिहासिक मंदिर परिसरों के जीर्णोद्धार, पुनर्स्थापन और संबंधित विकास कार्यों के लिए ₹6.85 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसमें बुनियादी ढाँचे, मार्गों और प्रकाश व्यवस्था में सुधार शामिल है।
इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?
उपराज्यपाल के अनुसार इन परियोजनाओं से स्थानीय हस्तशिल्प, होमस्टे, परिवहन और खानपान उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर और कारीगरों व छोटे उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार होंगे।
पुरमंडल में कौन-से मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा?
पुरमंडल में प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर और प्राचीन राम मंदिर का आधुनिक संरक्षण तकनीकों और पारंपरिक स्थापत्य कला के मिश्रण से जीर्णोद्धार किया जाएगा।
इन परियोजनाओं का तीर्थयात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
बेहतर बुनियादी ढाँचे और संपर्क मार्गों से माता वैष्णो देवी, शिव खोरी, रघुनाथ मंदिर और बाबा अमरनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए पुरमंडल और उत्तरवेहिनी तक पहुँचना आसान होगा, जिससे 'छोटी काशी' के आध्यात्मिक अनुभव का दायरा विस्तृत होगा।
राष्ट्र प्रेस
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