विकसित भारत 2047: राज्यों की आर्थिक क्षमता मजबूत करना जरूरी — वित्त राज्यमंत्री आशीष जायसवाल
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के वित्त राज्यमंत्री अधिवक्ता आशीष जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित राज्यों के वित्त मंत्रियों और वित्त सचिवों के दो दिवसीय सम्मेलन में स्पष्ट रूप से कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को तभी हासिल किया जा सकता है जब राज्यों की उत्पादन, पर्यटन, व्यापार और कृषि क्षमताओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाज़ारों से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए। यह सम्मेलन 18 और 19 सितंबर 2026 को भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्रालय की पहल पर 'फाइनेंसिंग इंडियाज जर्नी टुवर्ड्स विकसित भारत' विषय पर आयोजित किया गया था। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दोनों दिन सम्मेलन में उपस्थित रहीं।
सम्मेलन में महाराष्ट्र की भागीदारी
महाराष्ट्र सरकार की ओर से वित्त राज्यमंत्री आशीष जायसवाल के साथ अपर मुख्य सचिव (वित्त) विकास चंद्र रस्तोगी और सचिव (वित्तीय सुधार) विजय वाघमारे ने भाग लिया। जायसवाल ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य स्तर पर व्यापार एवं वाणिज्य क्षेत्र के लिए अधिक प्रभावी और सक्षम संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
उन्होंने कहा कि देश के निर्यात में राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्पादन, उद्योग, प्रसंस्करण, बुनियादी ढाँचे, लॉजिस्टिक्स और विभिन्न अनुमतियों के लिए उद्योगों तथा निर्यातकों को बड़े पैमाने पर राज्य सरकारों के साथ समन्वय करना पड़ता है। जायसवाल के अनुसार, 'राज्यों की आर्थिक प्रगति के बिना देश की आर्थिक प्रगति को अपेक्षित गति नहीं मिल सकती।'
'एसेट क्रॉप-लायबिलिटी क्रॉप' अवधारणा
कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर विस्तार से बोलते हुए जायसवाल ने महाराष्ट्र में विकसित 'एसेट क्रॉप-लायबिलिटी क्रॉप' अवधारणा को सम्मेलन में प्रस्तुत किया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी फ़सल का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है लेकिन उसके अनुरूप बाज़ार उपलब्ध नहीं होता, तो किसानों को अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता और सरकार को खरीद, भंडारण व प्रबंधन पर भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है।
उनके प्रस्ताव के अनुसार, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में माँग तथा निर्यात क्षमता रखने वाली फ़सलों को 'एसेट क्रॉप' के रूप में बढ़ावा दिया जाए, जबकि लगातार अधिक उत्पादन, कम बाज़ार मूल्य और सरकारी खरीद व भंडारण पर अतिरिक्त बोझ पैदा करने वाली फ़सलों को 'लायबिलिटी क्रॉप' माना जाए और उनमें विविधीकरण की रणनीति अपनाई जाए। जायसवाल ने सुझाया कि प्रत्येक जिले की जलवायु, मिट्टी, पानी की उपलब्धता और बाज़ार माँग को ध्यान में रखकर जिलावार निर्यात क्षमता वाली फ़सलों की पहचान की जाए।
कृषि निर्यात के लिए डिजिटल पोर्टल का सुझाव
जायसवाल ने निर्यात योग्य कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने के लिए एक अलग डिजिटल पोर्टल तथा फ़सलवार एसओपी/एक्सपोर्ट पाथवे विकसित करने का सुझाव दिया। इस व्यवस्था के ज़रिए किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, प्रसंस्करण उद्योगों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय माँग, गुणवत्ता मानक, प्रमाणन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात प्रक्रिया संबंधी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस की तर्ज़ पर कृषि निर्यात के लिए सरल व्यवस्था विकसित होने से किसानों के उत्पादों को व्यापक बाज़ार मिलेगा और अधिशेष कृषि उपज की सरकारी खरीद तथा भंडारण पर केंद्र व राज्य सरकारों का वित्तीय बोझ कम होगा।
वित्त मंत्री सीतारमण से द्विपक्षीय चर्चा
सम्मेलन के दौरान जायसवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अलग मुलाकात कर महाराष्ट्र के वित्त, नियोजन और कृषि क्षेत्रों में लागू की जा रही अभिनव पहलों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र ने 'विकसित महाराष्ट्र 2047' का रोडमैप तैयार कर उसके क्रियान्वयन की शुरुआत कर दी है और बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं के बावजूद राजकोषीय अनुशासन बनाए रखा है।
जायसवाल ने केंद्र सरकार की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजना के अंतर्गत अभिनव और दीर्घकालीन प्रभाव वाली परियोजनाओं के लिए विशेष निधि आरक्षित करने तथा आवंटित राशि के उपयोग के लिए अधिक समय देने का सुझाव भी दिया। साथ ही एग्रीस्टैक के क्रियान्वयन में महाराष्ट्र की प्रगति से अवगत कराया।
क्या होगा आगे
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जायसवाल की ओर से प्रस्तुत अवधारणाओं और सुझावों की सराहना करते हुए केंद्रीय स्तर पर इन सुझावों पर नीतिगत दृष्टि से विचार किए जाने का आश्वासन दिया। दो दिवसीय सम्मेलन में व्यापक आर्थिक स्थिति, सार्वजनिक वित्त, कृषि परिवर्तन, ऊर्जा परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और कार्बन क्रेडिट जैसे विषयों पर विभिन्न राज्यों ने अपने अनुभव और पहल साझा किए। यह सम्मेलन केंद्र-राज्य वित्तीय समन्वय को नई दिशा देने का प्रयास है, और महाराष्ट्र के प्रस्ताव अब केंद्र सरकार की नीति निर्माण प्रक्रिया में विचाराधीन हैं।