19 सितंबर 2026
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विकसित भारत 2047 वित्तीय सम्मेलन संपन्न: बचत दर 38-40% तक बढ़ाने और निजी पूंजी पर जोर

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विकसित भारत 2047 वित्तीय सम्मेलन संपन्न: बचत दर 38-40% तक बढ़ाने और निजी पूंजी पर जोर

सारांश

नई दिल्ली में संपन्न इस दो दिवसीय सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का सपना केवल सरकारी बजट से पूरा नहीं होगा — इसके लिए बचत दर को 38-40% तक ले जाना और निजी पूंजी को केंद्र में रखना होगा। JCR की रेटिंग अपग्रेड से लेकर AI-आधारित कर अनुपालन तक, सम्मेलन ने 2047 की वित्तीय दिशा तय करने की कोशिश की।

मुख्य बातें

नई दिल्ली में 19 सितंबर 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'फाइनेंसिंग इंडिया'स जर्नी टुवर्ड्स विकसित भारत' संपन्न हुआ।
जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- की; पिछले 16-17 महीनों में चार अंतरराष्ट्रीय रेटिंग सुधार।
15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन.के.
सिंह ने सकल घरेलू बचत दर 34% से बढ़ाकर 38-40% तक ले जाने की सिफारिश की।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% दर्ज।
उदय कोटक समेत जेपी मॉर्गन, सिटीबैंक और शिक्षाजगत के विशेषज्ञों ने निजी पूंजी और वित्तीय क्षेत्र की भूमिका पर विचार रखे।
राज्यों की भागीदारी से कार्य समूह गठित होंगे जो क्षेत्रवार वित्तीय आवश्यकताओं पर ठोस सुझाव देंगे।

नई दिल्ली में 19 सितंबर 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'फाइनेंसिंग इंडिया'स जर्नी टुवर्ड्स विकसित भारत' का समापन हुआ, जिसमें केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत और बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वित्तीय रोडमैप तय किया। यह सम्मेलन सार्वजनिक और निजी वित्त के दीर्घकालिक मुद्दों पर राज्यों और विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाने का अपनी तरह का पहला प्रयास बताया गया।

सम्मेलन में किन राज्यों की रही भागीदारी

इस सम्मेलन में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री के साथ असम, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, केरल, मणिपुर, मेघालय और नागालैंड के मुख्यमंत्री शामिल हुए। अरुणाचल प्रदेश, बिहार और ओडिशा के उपमुख्यमंत्री तथा आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

इस व्यापक भागीदारी को सरकार की उस मंशा के रूप में देखा जा रहा है जिसमें विकास का बोझ केवल केंद्र पर न डालकर राज्यों को भी समान भागीदार बनाया जाए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्यों की ऑफ-बजट उधारी और राजकोषीय घाटे पर चिंताएँ लगातार उठाई जाती रही हैं।

आर्थिक मामलों की सचिव का संबोधन

उद्घाटन सत्र में आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत साझेदारी पर आधारित होगी। उन्होंने बताया कि पिछले 16-17 महीनों में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भारत की संप्रभु रेटिंग में चार बार सुधार किया है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हाल ही में जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- कर दी है — जो देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता और वित्तीय अनुशासन की वैश्विक स्वीकृति है। ठाकुर ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकारी बजट के माध्यम से नहीं, बल्कि निजी पूंजी, नवोन्मेषी वित्तीय तंत्र और केंद्र-राज्य सहयोग से हासिल किया जाएगा।

एन.के. सिंह की अहम सिफारिशें

सम्मेलन के मुख्य वक्ता और 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन.के. सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है, जो देश की मजबूत आर्थिक नींव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए 7-8 प्रतिशत की सतत विकास दर बनाए रखने के लिए सकल घरेलू बचत दर को मौजूदा लगभग 34 प्रतिशत से बढ़ाकर 38-40 प्रतिशत तक ले जाना अनिवार्य होगा।

सिंह ने राज्यों के लिए ऋण स्थिरता का अलग-अलग आकलन, ऑफ-बजट उधारी और गारंटी में अधिक पारदर्शिता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग के ज़रिए कर अनुपालन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उनका मत था कि सरकार की भूमिका एक उत्प्रेरक की होनी चाहिए और निजी पूंजी को विकास का प्रमुख आधार बनाना होगा।

विशेषज्ञों और उद्योग जगत की भागीदारी

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. सज्जिद चिनॉय, सिटीबैंक के डॉ. समीरन चक्रवर्ती, प्रोफेसर अशिमा गोयल और प्रोफेसर एन.आर. भानुमूर्ति ने व्यापक आर्थिक परिदृश्य, बचत-निवेश दर, राजकोषीय मजबूती और संसाधन जुटाने जैसे विषयों पर विचार साझा किए।

एक विशेष सत्र में कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और गैर-कार्यकारी निदेशक उदय कोटक ने विकसित भारत के वित्तपोषण में निजी निवेश और वित्तीय क्षेत्र की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए। राज्यों के लिए वित्तीय 'गोल्डन रूल' की अवधारणा पर भी गहन चर्चा हुई।

आगे का रास्ता

सम्मेलन में तय किया गया कि राज्यों की भागीदारी के साथ विभिन्न कार्य समूह गठित किए जाएंगे, जो क्षेत्रवार वित्तीय आवश्यकताओं और ठोस सुझावों पर काम करेंगे। यह सम्मेलन महज एक नीतिगत बातचीत नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच था जिसने केंद्र-राज्य समन्वय को 2047 की दीर्घकालिक दृष्टि से जोड़ने की कोशिश की। अब इन कार्य समूहों की सिफारिशें ही तय करेंगी कि विकसित भारत का वित्तीय खाका कितनी तेज़ी से ज़मीन पर उतरता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनमें से कई ऑफ-बजट उधारी और गारंटी के बोझ तले दबे हैं। एन.के. सिंह की बचत दर 38-40% की सिफारिश महत्वाकांक्षी है, पर भारत में घरेलू बचत पिछले एक दशक में गिरी है — इस पलटाव के लिए ठोस नीतिगत हस्तक्षेप चाहिए, सिर्फ संकल्प नहीं। कार्य समूहों का गठन तब तक कागजी रहेगा जब तक उनकी सिफारिशों को बजट चक्र से नहीं जोड़ा जाता।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'फाइनेंसिंग इंडिया'स जर्नी टुवर्ड्स विकसित भारत' सम्मेलन क्या था?
यह नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन था जो 19 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ। इसमें केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों, उद्योग जगत और बैंकिंग विशेषज्ञों ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए वित्तीय रोडमैप तैयार करने पर विचार-मंथन किया।
सम्मेलन में एन.के. सिंह ने क्या सिफारिशें कीं?
15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन.के. सिंह ने कहा कि सकल घरेलू बचत दर को मौजूदा लगभग 34% से बढ़ाकर 38-40% तक ले जाना होगा। उन्होंने राज्यों की ऑफ-बजट उधारी में पारदर्शिता, AI और मशीन लर्निंग से कर अनुपालन सुधार और निजी पूंजी को विकास का मुख्य आधार बनाने पर भी जोर दिया।
भारत की रेटिंग अपग्रेड का क्या महत्व है?
जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने हाल ही में भारत की संप्रभु रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- कर दी है। डीईए सचिव अनुराधा ठाकुर के अनुसार, पिछले 16-17 महीनों में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने चार बार रेटिंग सुधार किया है, जो देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता की वैश्विक मान्यता है।
सम्मेलन के बाद आगे क्या होगा?
घोषणा की गई है कि राज्यों की भागीदारी से विभिन्न कार्य समूह गठित किए जाएंगे, जो क्षेत्रवार वित्तीय आवश्यकताओं और ठोस सुझावों पर काम करेंगे। इन समूहों की सिफारिशें विकसित भारत 2047 के वित्तीय खाके को आकार देंगी।
सम्मेलन में किन प्रमुख उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया?
सम्मेलन में जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. सज्जिद चिनॉय, सिटीबैंक के डॉ. समीरन चक्रवर्ती, प्रोफेसर अशिमा गोयल, प्रोफेसर एन.आर. भानुमूर्ति और कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने अपने विचार रखे।
राष्ट्र प्रेस
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