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नीति आयोग की 11वीं बैठक: PM मोदी ने विकसित भारत 2047 के लिए राज्यों को दिया साझा विकास का रोडमैप

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नीति आयोग की 11वीं बैठक: PM मोदी ने विकसित भारत 2047 के लिए राज्यों को दिया साझा विकास का रोडमैप

सारांश

पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ नीति आयोग की बैठक में जुटे — और PM मोदी ने विकसित भारत 2047 के लिए साझा रोडमैप पेश किया। 70 करोड़ युवाओं के जनसांख्यिकीय लाभांश से लेकर लखपति दीदियों की संख्या दोगुनी करने तक, यह बैठक केंद्र-राज्य सहकारी संघवाद की नई परिभाषा गढ़ती दिखी।

मुख्य बातें

नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक 11 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई; पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ शामिल हुए।
बैठक का विषय '2047 तक विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास' था।
PM मोदी ने लखपति दीदियों की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने का लक्ष्य रखा।
देश के लगभग 70 करोड़ युवाओं को जनसांख्यिकीय लाभांश बताते हुए शिक्षा और कौशल विकास पर बल दिया गया।
खरीफ मौसम में किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद को टिकाऊ कृषि का संकेत बताया गया।
विकसित भारत 2047 के लिए 100 दिन और 5 वर्ष के लक्ष्य निर्धारित करने और निगरानी ढाँचा बनाने का आह्वान किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष की बैठक का केंद्रीय विषय '2047 तक विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास' था। उल्लेखनीय है कि यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में एक साथ भाग लिया।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

बैठक में 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और प्रशासक उपस्थित रहे। मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में केंद्र सरकार के साथ एकजुटता व्यक्त की।

युवा शक्ति और जनसांख्यिकीय लाभांश

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के लगभग 70 करोड़ युवा — जो 25 वर्ष से कम आयु के हैं — भारत की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि इस जनसांख्यिकीय लाभांश को शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के ज़रिये वास्तविक विकास लाभांश में बदला जाए।

यह ऐसे समय में आया है जब कई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ अनिश्चितता और आर्थिक मंदी के दौर से गुज़र रही हैं। मोदी ने कहा कि इन परिस्थितियों में भारत की विकास गाथा विश्व को प्रेरित करती रहती है।

महिला नेतृत्व और ODOP पर ज़ोर

महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने राज्यों से लखपति दीदियों की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने का आह्वान किया। उन्होंने एक जिला एक उत्पाद (ODOP) पहल के इर्द-गिर्द निर्यात-उन्मुख रणनीतियाँ विकसित करने पर भी बल दिया।

रक्षा विनिर्माण को एक उभरते क्षेत्र के रूप में रेखांकित करते हुए मोदी ने राज्यों को इससे उत्पन्न होने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए अनुकूल नीतियाँ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

कृषि, पर्यावरण और सामाजिक चुनौतियाँ

प्रधानमंत्री ने अल-नीनो की स्थिति से उत्पन्न जल संकट की ओर ध्यान दिलाया और राज्यों से जल संरक्षण तथा प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने बताया कि चालू खरीफ मौसम में किसानों ने 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद की है, जो टिकाऊ कृषि में बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।

मादक पदार्थों के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए उन्होंने निवारक उपायों, जागरूकता अभियानों और समन्वित शासन की आवश्यकता पर बल दिया।

100 दिन और पाँच वर्ष के लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए 100 दिन और पाँच वर्ष के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और एक मज़बूत निगरानी ढाँचे की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिणामों के लिए 100 ज़िलों की पहचान करने का सुझाव भी दिया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा सेंटर को अवसर के रूप में देखने की अपील करते हुए मोदी ने राज्यों से सुशासन, पारदर्शिता और बुनियादी ढाँचे पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। गौरतलब है कि हाल के व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए उन्होंने राज्यों से युवाओं और एमएसएमई के लिए इन समझौतों से उत्पन्न अवसरों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह सहमति नीतिगत एकरूपता में बदलेगी। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हर बड़े मंच पर दोहराया जाता है, परंतु जिला-स्तरीय निगरानी ढाँचे और 100 ज़िलों की कृषि पहचान जैसे सुझाव तभी सार्थक होंगे जब उनके लिए बाध्यकारी समयसीमा और स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्र हो। लखपति दीदी की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, किंतु आलोचकों का कहना है कि मौजूदा सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। AI और डेटा सेंटर पर जोर सही दिशा में है, लेकिन ग्रामीण डिजिटल अवसंरचना की खाई पाटे बिना यह लाभ शहरी केंद्रों तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक क्या थी और इसमें क्या हुआ?
यह बैठक 11 जून 2026 को नई दिल्ली में हुई, जिसकी अध्यक्षता PM मोदी ने की और विषय 'विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास' था। पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ उपस्थित रहे और केंद्र-राज्य साझा विकास रोडमैप पर चर्चा हुई।
विकसित भारत 2047 के लिए PM मोदी ने राज्यों को क्या निर्देश दिए?
मोदी ने राज्यों से 100 दिन और पाँच वर्ष के लक्ष्य निर्धारित करने, निगरानी ढाँचा बनाने, ODOP के ज़रिये निर्यात बढ़ाने और AI तथा डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्रों में अवसर तलाशने का आग्रह किया। उन्होंने सहकारी संघवाद को विकास की बुनियाद बताया।
लखपति दीदी लक्ष्य को 3 करोड़ से 6 करोड़ क्यों किया गया?
PM मोदी ने महिला नेतृत्व वाले विकास को विकसित भारत 2047 की रीढ़ बताते हुए राज्यों से लखपति दीदियों की संख्या दोगुनी करने का आह्वान किया। यह स्वयं सहायता समूहों के ज़रिये ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
बैठक में कृषि और पर्यावरण पर क्या चर्चा हुई?
PM मोदी ने अल-नीनो से उत्पन्न जल संकट की चेतावनी देते हुए जल संरक्षण और जैविक खेती पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि खरीफ मौसम में किसानों ने 11 लाख टन जैविक खाद खरीदी है और कृषि सुधार के लिए 100 ज़िलों की पहचान का सुझाव दिया।
नीति आयोग की इस बैठक में क्या ऐतिहासिक पहलू था?
यह पहला मौका था जब नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ शामिल हुए। इसके अलावा 5 केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और प्रशासक भी उपस्थित रहे, जो सहकारी संघवाद की दृष्टि से एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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