नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक: PM मोदी करेंगे अध्यक्षता, 'विकसित भारत 2047' पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार, 10 जून को राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर, नई दिल्ली में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक की केंद्रीय थीम '2047 तक विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास' है, जो प्रधानमंत्री के 'टीम इंडिया' विजन के अनुरूप तय की गई है।
बैठक की थीम और उद्देश्य
नीति आयोग के अनुसार, इस वर्ष की थीम उम्र, क्षेत्र, लिंग या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से परे हर भारतीय की भलाई और विकास पर केंद्रित है। बैठक में इस विजन को ठोस और मापने योग्य नतीजों में बदलने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को राज्यों की सक्रिय भागीदारी से हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।
समावेशी मानव विकास फ्रेमवर्क के चार स्तंभ
बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री तथा उप-राज्यपाल 'समावेशी मानव विकास फ्रेमवर्क' पर एक साथ चर्चा करेंगे। यह फ्रेमवर्क चार मुख्य स्तंभों पर टिका है:
पहला — बुनियादी मानव पूंजी और भविष्य के लिए ज़रूरी कौशल। दूसरा — उत्पादक रोज़गार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास। तीसरा — स्वास्थ्य, पोषण और समग्र भलाई। चौथा — सभी नागरिकों के लिए समानता और सम्मान।
मुख्य सचिवों की कॉन्फ्रेंस की सिफारिशें भी एजेंडे में
इस बैठक में 26 से 28 दिसंबर 2025 के बीच आयोजित मुख्य सचिवों की 5वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में दी गई सिफारिशों पर भी विचार होगा। उस कॉन्फ्रेंस में पाँच प्रमुख विषयों पर सिफारिशें की गई थीं — शुरुआती बचपन की शिक्षा, स्कूली शिक्षा में बुनियादी सुधार, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल हेतु स्किलिंग, उच्च शिक्षा और नॉलेज इकॉनमी, तथा खेल एवं पाठ्येतर गतिविधियाँ।
बैठक में कौन-कौन होगा शामिल
नीति आयोग ने बताया कि 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल एवं प्रशासक, केंद्रीय मंत्री, तथा नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) उपस्थित रहेंगे। यह बैठक केंद्र-राज्य समन्वय के लिहाज़ से एक अहम मंच साबित होगी।
आगे क्या
बैठक में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को सुदृढ़ करने और टिकाऊ रोज़गार के अवसर पैदा करने के ठोस उपायों पर भी चर्चा अपेक्षित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के निष्कर्ष आगामी नीतिगत दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।