नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक: धर्मेंद्र प्रधान ने मानव पूंजी और विकसित भारत 2047 पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार, 11 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में मानव पूंजी (ह्यूमन कैपिटल) को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्यों और केंद्र के बीच समन्वित रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में क्या हुई चर्चा
प्रधान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि बैठक में मानव पूंजी को मजबूत करने और भारत की विकास यात्रा को तेज करने पर 'सार्थक चर्चा' हुई। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में शामिल हुआ। ह्यूमन कैपिटल को मजबूत करने और भारत की विकास यात्रा को तेज करने पर सार्थक चर्चा हुई, जिससे विकसित भारत 2047 के विजन को हासिल करने के हमारे साझे संकल्प को बल मिला।' गौरतलब है कि नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं, जो इसे नीति-निर्माण का एक महत्त्वपूर्ण मंच बनाती है।
किसान कल्याण पर सरकार का रुख
मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रधान ने कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'हमारे अन्नदाता, किसान भाई-बहनों की कड़ी मेहनत और समर्पण से ही देश की समृद्धि का रास्ता बनता है। पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में किसानों के कल्याण को नई गति मिली है।' उन्होंने पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और आधुनिक कृषि सुविधाओं जैसी पहलों को किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक बताया।
तीन विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस की मंजूरी
इसी सप्ताह शिक्षा मंत्रालय ने तीन विश्व-प्रसिद्ध विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों को भारत में कैंपस स्थापित करने के लिए मंजूरी पत्र जारी किए। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल और यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क मुंबई में, जबकि यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) बेंगलुरु में अपना परिसर स्थापित करेगी। प्रधान ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतरराष्ट्रीयकरण के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम बताया।
आम जनता पर असर
इन विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में आने से छात्रों को विदेश जाए बिना वैश्विक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे उच्च शिक्षा पर होने वाले विदेशी मुद्रा व्यय में कमी आ सकती है। मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में इन परिसरों की स्थापना से अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी को भी बल मिलने की उम्मीद है।
आगे की राह
नीति आयोग की इस बैठक में हुई चर्चाएँ आने वाले महीनों में नीतिगत दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस की स्थापना की समयसीमा और विस्तृत दिशानिर्देश अभी सामने आने बाकी हैं, जिन पर शिक्षा जगत की नजर बनी हुई है।