विकसित भारत लक्ष्य: PM मोदी ने 22 जुलाई को बुलाई उच्चस्तरीय बैठक, नागरिक कल्याण और 'समग्र सरकार' दृष्टिकोण पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जुलाई 2026 को अपने आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली पर सचिवों की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसका केंद्र 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति का आकलन करना था। बैठक में ग्रामीण विकास, कृषि, सामाजिक कल्याण और संबद्ध क्षेत्रों में कार्यरत प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य एजेंडा
बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने विभागों की उपलब्धियों, सामने आ रही चुनौतियों और आगामी रणनीतियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रधानमंत्री ने उनके सुझाव सुने और प्रभावी क्रियान्वयन तथा बेहतर समन्वय के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में कैबिनेट सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
नागरिक कल्याण और आधुनिक शासन पर जोर
मोदी ने बैठक में स्पष्ट किया कि सभी सरकारी सुधारों का केंद्रबिंदु नागरिकों का कल्याण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रत्येक योजना और नीति का उद्देश्य लोगों के जीवन में ठोस और सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सुधार केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को दुरुस्त करने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लक्ष्य भारत को एक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाने की गति को तेज़ करना भी होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने बदलती परिस्थितियों के अनुरूप शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने मंत्रालयों और विभागों को उभरती ज़रूरतों की समय रहते पहचान कर उनके अनुरूप योजनाएँ तैयार करने की सलाह दी।
'समग्र सरकार' दृष्टिकोण और अंतर-मंत्रालयी समन्वय
बैठक में मोदी ने 'समग्र सरकार' (Whole of Government) दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग से ही विकास के लक्ष्यों को तेज़ी से हासिल किया जा सकता है। उन्होंने विभागीय सीमाओं को दरकिनार कर साझा प्रयासों के माध्यम से काम करने का आह्वान किया। गौरतलब है कि यह दृष्टिकोण केंद्र सरकार की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है जिसमें 'सिलो मानसिकता' को समाप्त कर नीति-निर्माण को एकीकृत किया जा सके।
युवा, खेल और नशामुक्ति पर विशेष चर्चा
प्रधानमंत्री ने युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच संस्थागत समन्वय विकसित करना ज़रूरी है, ताकि युवाओं को सही दिशा और बेहतर अवसर मिल सकें।
खेल क्षेत्र पर चर्चा करते हुए मोदी ने भारत को वैश्विक खेल केंद्र बनाने की दिशा में एकीकृत रणनीति अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल पर्यटन तेज़ी से उभरता हुआ क्षेत्र है और भारत को बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेज़बानी के लिए तैयारी करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने खेल क्षेत्र में तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की बात भी कही।
कृषि और कौशल विकास पर दिशा-निर्देश
कृषि क्षेत्र पर चर्चा में प्रधानमंत्री ने पीएम-कुसुम योजना जैसी पहलों को किसानों के जीवन में बड़े बदलाव का माध्यम बताया और अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ने पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास योजनाओं को अद्यतन करने और अंतरराष्ट्रीय रोज़गार अवसरों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को ज़मीन पर उतारने के लिए नीतिगत समन्वय को प्राथमिकता दे रही है। आगामी महीनों में इन दिशा-निर्देशों के आधार पर मंत्रालय अपनी कार्ययोजनाएँ अद्यतन करेंगे।