30 जून 2026
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पीएम मोदी ने 'सेवा तीर्थ' में सभी केंद्रीय सचिवों संग उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई, 'विकसित भारत' एजेंडे पर मंथन

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पीएम मोदी ने 'सेवा तीर्थ' में सभी केंद्रीय सचिवों संग उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई, 'विकसित भारत' एजेंडे पर मंथन

सारांश

वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से पहले पीएम मोदी ने 'सेवा तीर्थ' में सभी केंद्रीय सचिवों को एक मेज़ पर बुलाया — 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस', डिजिटल गवर्नेंस और '52 सप्ताह में 52 सुधार' जैसी पहलों की प्रगति परखने के लिए। यह बैठक 'विकसित भारत' विज़न को नौकरशाही की जवाबदेही से जोड़ने की कोशिश है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जून 2026 को 'सेवा तीर्थ', नई दिल्ली में सभी केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के सचिवों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की।
बैठक में कैबिनेट सचिव , प्रधान सचिव पी.के.
मिश्रा और शक्तिकांत दास सहित सभी प्रमुख विभागों के सचिव शामिल रहे।
एजेंडे में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' , डिजिटल गवर्नेंस , नियमों में ढील और 'लास्ट-माइल डिलीवरी' प्रमुख रहे।
सरकार की '52 सप्ताह में 52 सुधार' पहल की प्रगति समीक्षा भी बैठक का हिस्सा रही।
यह मौजूदा वित्त वर्ष में शीर्ष सिविल सेवकों के साथ पीएम की दूसरी व्यापक बैठक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 30 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित 'सेवा तीर्थ' में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। मौजूदा वित्त वर्ष में शीर्ष सिविल सेवकों के साथ यह पीएम की दूसरी व्यापक बातचीत है और इसे 2026 की दूसरी छमाही के लिए नौकरशाही को सरकार की मुख्य नीतिगत प्राथमिकताओं के साथ एकरेखित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में कौन-कौन शामिल

बैठक में कैबिनेट सचिव के अतिरिक्त प्रधानमंत्री के दोनों प्रधान सचिव — पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास — तथा सभी प्रमुख विभागों के सचिव उपस्थित रहे। यह संरचना स्पष्ट करती है कि बैठक का उद्देश्य केवल सूचना-साझाकरण नहीं, बल्कि नीति-क्रियान्वयन की जवाबदेही तय करना भी है।

मुख्य एजेंडा बिंदु

चर्चा का केंद्र 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस', डिजिटल गवर्नेंस, नियमों में ढील और 'लास्ट-माइल डिलीवरी' — यानी सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना — रहा। वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे संरचनात्मक सुधारों पर अद्यतन जानकारी दें, क्रियान्वयन की प्रगति का आकलन करें और उन क्षेत्रों की पहचान करें जहाँ अतिरिक्त ध्यान देने की ज़रूरत है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में रेलवे सहित कई मंत्रालयों में '52 सप्ताह में 52 सुधार' जैसी महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है, जिनमें स्पष्ट समय-सीमाएँ तय की गई हैं। यह बैठक उन्हीं पहलों की प्रगति की समीक्षा का अवसर भी है।

'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर भारत' की धुरी

बैठक सरकार के 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक विज़न को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही — जिसमें नियमों का बोझ घटाना, 'आत्मनिर्भर भारत' को प्रोत्साहन देना और मंत्रालयों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार तय समय-सीमा के भीतर परिणाम हासिल करने पर जोर दिया है, जिससे इस तरह की समय-समय पर समीक्षा सरकार के कामकाज का अनिवार्य हिस्सा बन गई है।

बैठक का महत्व और अपेक्षित परिणाम

यह बैठक मंत्रालयों को आपसी तालमेल मज़बूत करने, क्रियान्वयन की बाधाओं को दूर करने और सुधारों में गति लाने का मंच प्रदान करती है। इन सुधारों का व्यापक लक्ष्य सार्वजनिक सेवा वितरण को बेहतर बनाना, उद्योगों के लिए कारोबारी माहौल सरल करना और नागरिकों के दैनिक जीवन को सुगम बनाना है।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में प्रमुख नीतिगत पहलों को समय पर पूरा करने के लिए प्रशासनिक तंत्र को चुस्त रखना चाहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि '52 सप्ताह में 52 सुधार' जैसी पहलें कागज़ों से ज़मीन तक कितनी उतरती हैं। अतीत में भी इसी तरह की उच्च-स्तरीय समीक्षाएँ हुई हैं, पर 'लास्ट-माइल डिलीवरी' की खाई अक्सर बनी रही है। बैठक की बारंबारता और संरचना सकारात्मक संकेत है, लेकिन बिना सार्वजनिक प्रगति-रिपोर्टिंग के यह आकलन करना कठिन है कि नौकरशाही वास्तव में एकरेखित हो रही है या केवल अनुपालन का प्रदर्शन हो रहा है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी की 'सेवा तीर्थ' बैठक में क्या चर्चा हुई?
बैठक में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस', डिजिटल गवर्नेंस, नियमों में ढील और 'लास्ट-माइल डिलीवरी' जैसे सुधार एजेंडे पर व्यापक मंथन हुआ। '52 सप्ताह में 52 सुधार' पहल की प्रगति की समीक्षा भी इसका हिस्सा रही।
इस बैठक में कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे?
बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास के साथ-साथ सभी प्रमुख मंत्रालयों व विभागों के सचिव शामिल हुए।
'52 सप्ताह में 52 सुधार' पहल क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसके तहत रेलवे सहित कई मंत्रालयों में 52 हफ्तों में 52 प्रमुख सुधार लागू करने की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। इसका उद्देश्य नीतिगत क्रियान्वयन में गति और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
यह बैठक 'विकसित भारत' विज़न से कैसे जुड़ी है?
बैठक का मुख्य उद्देश्य नौकरशाही को 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक लक्ष्यों — नियमों का बोझ घटाना, 'आत्मनिर्भर भारत' को प्रोत्साहन और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना — के साथ एकरेखित करना है। यह 2026 की दूसरी छमाही के लिए प्राथमिकताएँ तय करने का भी अवसर है।
क्या यह पहली बार है जब पीएम मोदी ने इस वित्त वर्ष में सचिवों के साथ ऐसी बैठक की?
नहीं, यह मौजूदा वित्त वर्ष में शीर्ष सिविल सेवकों के साथ प्रधानमंत्री की दूसरी व्यापक बैठक है। इस तरह की नियमित समीक्षाएँ सरकार के कामकाज का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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