प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक का महत्व बताया
सारांश
Key Takeaways
- सेवा तीर्थ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई।
- बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
- प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रसेवा की भावना को उजागर किया।
- नई कार्य-संस्कृति देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।
- बैठक में स्वदेशी सोच और सामर्थ्य पर जोर दिया गया।
नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नए बने प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली ऐतिहासिक बैठक सम्पन्न हुई। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया कि युगाब्द ५१२७, विक्रम संवत २०८२, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन आयोजित इस बैठक में देश के हित में कई अद्वितीय निर्णय लिए गए।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ''आज युगाब्द ५१२७, विक्रम संवत २०८२, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन नए सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक का आयोजन हुआ। इसमें देश के लिए कई अद्वितीय निर्णय लिए गए। इस दौरान, कैबिनेट ने यह संकल्प भी लिया कि स्वदेशी सोच और १४० करोड़ देशवासियों की अनंत सामर्थ्य के आधार पर बना सेवा तीर्थ राष्ट्रसेवा के कर्तव्य-यज्ञ को लगातार आगे बढ़ाएगा। इस राष्ट्रयज्ञ का मंत्र है - यद् भद्रं तन्न आ सुव॥ अर्थात्, जो शुभ और कल्याणकारी है, जो भी नए विचार हैं, वे हमें निरंतर प्राप्त होते रहें।''
बैठक के दौरान मंत्रिमंडल ने संकल्प लिया कि स्वदेशी सोच, आधुनिक स्वरूप और १४० करोड़ देशवासियों की शक्ति पर आधारित ‘सेवा तीर्थ’ राष्ट्रसेवा के कर्तव्य-यज्ञ को निरंतर आगे बढ़ाएगा। इस अवसर पर वैदिक मंत्र ‘यद् भद्रं तन्न आ सुवः’ का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जो भी शुभ और कल्याणकारी विचार हों, वे निरंतर प्राप्त होते रहें।
‘सेवा तीर्थ’ को नए भारत के नवनिर्माण की स्पष्ट अभिव्यक्ति माना गया। आजादी के बाद दशकों तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा। नया परिसर उन अस्थायी बैरकों की जगह बना है, जो ब्रिटिश काल में निर्मित थीं। इसे गुलामी के प्रतीकों से आगे बढ़ते हुए आत्मविश्वास और आधुनिकता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल ने दोहराया कि इस परिसर में लिए गए प्रत्येक निर्णय ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित होंगे। शासन की कार्य-संस्कृति संविधान के मूल्यों - गरिमा, समानता और न्याय के अनुरूप संचालित की जाएगी। पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बीते वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए यह बताया गया कि २५ करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। आयुष्मान भारत के तहत करोड़ों नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिली, जबकि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से लगभग ८० करोड़ लोगों तक खाद्य सुरक्षा पहुंचाई गई। स्वच्छ भारत मिशन के तहत १२ करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ और ४ करोड़ से अधिक पक्के घर बनाए गए। जल जीवन मिशन के माध्यम से १२ करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंचाया गया।
मंत्रिमंडल ने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के मंत्र के साथ जीएसटी, डीबीटी और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों को पारदर्शी और प्रभावी शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। लक्ष्य रखा गया कि ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की गति से भारत को निकट भविष्य में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाया जाए।
बैठक में ‘विकसित भारत २०४७’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा गया कि ‘सेवा तीर्थ’ से संचालित नई कार्य-संस्कृति देश को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।