15 अगस्त 2026
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स्वतंत्रता दिवस 2026: 10 देशभक्ति गीत जो हर भारतीय के दिल में जगाते हैं राष्ट्रप्रेम की लौ

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स्वतंत्रता दिवस 2026: 10 देशभक्ति गीत जो हर भारतीय के दिल में जगाते हैं राष्ट्रप्रेम की लौ

सारांश

15 अगस्त पर सिर्फ झंडा नहीं फहराया जाता — एक पूरी पीढ़ी की कुर्बानी को याद किया जाता है। 'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' से लेकर 'एकला चलो रे' तक, ये 10 देशभक्ति गीत स्वतंत्रता संग्राम की जीवंत धरोहर हैं, जो आज भी हर भारतीय के भीतर राष्ट्रप्रेम की लौ जलाते हैं।

मुख्य बातें

'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' पहली बार 13 अप्रैल 1924 को कानपुर के फूलबाग में गाया गया था, जहाँ पंडित नेहरू भी उपस्थित थे।
'ऐ मेरे वतन के लोगों' को लता मंगेशकर ने 27 जनवरी 1963 को नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में पहली बार प्रस्तुत किया था।
'सारे जहाँ से अच्छा' अल्लामा मुहम्मद इक़बाल द्वारा 1904 में लिखी गई ऐतिहासिक देशभक्ति कविता है।
'मेरा रंग दे बसंती चोला' की मूल पंक्तियाँ 1927 में रामप्रसाद बिस्मिल ने गोरखपुर जेल में रची थीं।
'एकला चलो रे' गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 में लिखा था, जो स्वाधीनता आंदोलन में प्रेरणास्रोत बना।
'पगड़ी संभाल जट्टा' 1907 में पंजाब के ऐतिहासिक किसान आंदोलन का प्रेरणादायक लोकगीत था।

स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति गीत केवल संगीत नहीं होते — वे उन लाखों वीरों की स्मृति हैं जिन्होंने इस देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। 15 अगस्त के अवसर पर ये गीत हर भारतीय के भीतर राष्ट्रीय गौरव, एकता और कर्तव्यबोध की भावना को नई ऊर्जा देते हैं। यहाँ प्रस्तुत हैं 10 ऐसे अमर देशभक्ति गीत, जो भारत के स्वाधीनता संग्राम की विरासत को आज भी जीवंत रखते हैं।

स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जन्मे गीत

'हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के' — फिल्म जागृति का यह अमर गीत गीतकार प्रदीप की कलम और संगीतकार हेमंत कुमार के सुरों से सजा है, जिसे मोहम्मद रफी की जादुई आवाज़ ने अमर बना दिया। यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद दिलाते हुए देश के युवाओं से राष्ट्र की एकता और आज़ादी की रक्षा का आह्वान करता है।

'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' — महान स्वतंत्रता सेनानी और कवि श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' द्वारा रचित यह गीत पहली बार 13 अप्रैल 1924 को कानपुर के फूलबाग में जलियांवाला बाग स्मृति दिवस पर सार्वजनिक रूप से गाया गया था, जहाँ पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत बना और इसे गाकर युवा देश के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तत्पर हो जाते थे।

'ऐ मेरे वतन के लोगों' — कवि प्रदीप की लेखनी, संगीतकार सी. रामचंद्र की धुन और स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज़ से बना यह गीत 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों को समर्पित है। इसे पहली बार 27 जनवरी 1963 को नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह में प्रस्तुत किया गया था, जहाँ देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन मंच पर उपस्थित थे। गौरतलब है कि लता मंगेशकर के इस गायन को सुनकर पंडित नेहरू की आँखें नम हो गई थीं।

राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक गीत

'सारे जहाँ से अच्छा' — औपचारिक रूप से 'तराना-ए-हिन्दी' के नाम से जाना जाने वाला यह गीत महान शायर अल्लामा मुहम्मद इक़बाल ने 1904 में लिखा था। बताया जाता है कि उन्होंने इसे पहली बार लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज में सुनाया था। यह गीत भारतीय सशस्त्र बलों के बैंड द्वारा 'क्विक मार्च' के रूप में बजाया जाता है। इसकी प्रसिद्ध पंक्ति "मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना" भारत की विविधता में एकता का सशक्त संदेश देती है।

'पगड़ी संभाल जट्टा' — यह गीत मूल रूप से 1907 में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध पंजाब के किसानों द्वारा शुरू किए गए ऐतिहासिक किसान आंदोलन का प्रेरणादायक लोकगीत और नारा था। यह गीत किसानों के आत्म-सम्मान और अंग्रेजी दमन के खिलाफ उठी क्रांति की आवाज़ बना।

क्रांतिकारी शहीदों को समर्पित गीत

'मंगल मंगल मंगल हो' — भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद मंगल पांडे के शौर्य और देशप्रेम को समर्पित इस गीत को कैलाश खेर ने अपनी बुलंद आवाज़ में गाया है। संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया है और गीत के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं।

'देश मेरे देश मेरे मेरी जान है तू' — फिल्म 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' का यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के अटूट साहस और देश के लिए जान न्योछावर करने की भावना को परदे पर जीवंत करता है। ए.आर. रहमान के संगीत और सुखविंदर सिंह की जोशीली आवाज़ ने इस गीत को देशभक्ति का अविस्मरणीय दस्तावेज़ बना दिया है।

'मेरा रंग दे बसंती चोला' — इस अमर गीत की मूल पंक्तियाँ 1927 में महान क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल और उनके साथियों ने गोरखपुर जेल में काकोरी षड्यंत्र मामले के दौरान रची थीं। 'बसंती चोला' केसरिया वस्त्रों का प्रतीक है, जो बलिदान, शौर्य और देशभक्ति का संदेश देता है। ऐसा माना जाता है कि भगत सिंह और उनके साथियों ने इसे अपने जीवन के अंतिम क्षणों में गाया था।

सिनेमा और साहित्य से उभरे देशभक्ति के स्वर

'विजयी भव' — फिल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' का यह ओजस्वी युद्ध गान शंकर-एहसान-लॉय के संगीत, प्रसून जोशी के बोलों और शंकर महादेवन की दमदार आवाज़ से सजा है। इस गीत में कंगना रनौत (रानी लक्ष्मीबाई) को तलवारबाजी का प्रशिक्षण लेते और सेना का नेतृत्व करते दिखाया गया है।

'एकला चलो रे' — गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा 1905 में रचित यह प्रेरणादायक बंगाली देशभक्ति गीत आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इसका केंद्रीय संदेश है कि यदि कोई साथ न दे, तब भी सत्य और कर्तव्य के पथ पर अकेले आगे बढ़ते रहना चाहिए — एक ऐसा दर्शन जिसने स्वाधीनता आंदोलन के अनेक सेनानियों को दिशा दी।

ये दस गीत केवल संगीत की धरोहर नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक स्मृति और राष्ट्रीय चेतना के जीवंत दस्तावेज़ हैं। इस स्वतंत्रता दिवस पर इन्हें सुनना, गुनगुनाना और अगली पीढ़ी तक पहुँचाना — यही सच्ची देशभक्ति है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संगीत, कविता और लोकगीतों से भी आकार लेती रही है। गौरतलब है कि इनमें से कई गीत किसी सरकारी आदेश से नहीं, बल्कि जेल की कोठरियों, खुले मैदानों और युद्ध के मोर्चों से जन्मे थे। आज जब देशभक्ति को अक्सर सोशल मीडिया पर 'ट्रेंडिंग' की कसौटी पर परखा जाता है, तब इन गीतों की ऐतिहासिक जड़ों को याद करना ज़रूरी है। असली प्रश्न यह है कि क्या नई पीढ़ी इन गीतों के पीछे की कहानियों को भी उतनी ही गहराई से जानती है, जितनी उनकी धुनों को।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऐ मेरे वतन के लोगों' गीत पहली बार कब और कहाँ गाया गया था?
यह गीत पहली बार 27 जनवरी 1963 को नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह में लता मंगेशकर ने प्रस्तुत किया था। उस अवसर पर मंच पर प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन उपस्थित थे, और इसे सुनकर नेहरू की आँखें नम हो गई थीं।
'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' गीत किसने लिखा और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है?
इस गीत की रचना स्वतंत्रता सेनानी और कवि श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' ने की थी। इसे पहली बार 13 अप्रैल 1924 को कानपुर के फूलबाग में जलियांवाला बाग स्मृति दिवस पर गाया गया था। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत रहा।
'मेरा रंग दे बसंती चोला' गीत का भगत सिंह से क्या संबंध है?
इस गीत की मूल पंक्तियाँ 1927 में क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल और उनके साथियों ने गोरखपुर जेल में काकोरी षड्यंत्र मामले के दौरान रची थीं। ऐसा माना जाता है कि भगत सिंह और उनके साथियों ने इसे अपने जीवन के अंतिम क्षणों में गाया था। 'बसंती चोला' केसरिया वस्त्रों का प्रतीक है, जो बलिदान और शौर्य को दर्शाता है।
'सारे जहाँ से अच्छा' गीत किसने और कब लिखा?
यह गीत, जिसे औपचारिक रूप से 'तराना-ए-हिन्दी' कहा जाता है, महान शायर अल्लामा मुहम्मद इक़बाल ने 1904 में लिखा था। बताया जाता है कि उन्होंने इसे पहली बार लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज में सुनाया था। यह गीत भारतीय सशस्त्र बलों के बैंड द्वारा 'क्विक मार्च' के रूप में बजाया जाता है।
'एकला चलो रे' गीत का स्वतंत्रता आंदोलन में क्या महत्व था?
गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा 1905 में रचित इस बंगाली गीत का संदेश है कि सत्य और कर्तव्य के पथ पर अकेले भी आगे बढ़ते रहना चाहिए। यह दर्शन स्वाधीनता आंदोलन के अनेक सेनानियों के लिए प्रेरणास्रोत बना।
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