12 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

स्वतंत्रता दिवस 2026: लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा 'वंदे मातरम', नेताओं ने बताया ऐतिहासिक क्षण

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
स्वतंत्रता दिवस 2026: लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा 'वंदे मातरम', नेताओं ने बताया ऐतिहासिक क्षण

सारांश

इस बार 15 अगस्त सिर्फ तिरंगे का नहीं, 'वंदे मातरम' का भी दिन होगा। लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्रगीत की धुन गूंजेगी — एक निर्णय जिसे नेताओं ने दशकों की प्रतीक्षा का अंत बताया और जो स्वतंत्रता दिवस समारोह के इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा।

मुख्य बातें

15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से पहली बार 'वंदे मातरम' आधिकारिक रूप से बजाया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसे स्वतंत्रता सेनानियों की आत्माओं को शांति देने वाला क्षण बताया।
BJP सांसद मनोज तिवारी और राधा मोहन सिंह ने कहा कि यह गीत बहुत पहले लाल किले से गूंजना चाहिए था।
'वंदे मातरम' की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी और यह स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख प्रेरणा-गीत रहा है।
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने इसे 'हर घर तिरंगा' संकल्प के साथ जोड़ते हुए बड़ा राष्ट्रीय संदेश बताया।

इस वर्ष 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की धुन गूंजेगी — एक ऐसा निर्णय जिसे सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति दीर्घ-प्रतीक्षित सम्मान बताया है। नई दिल्ली में 12 अगस्त 2026 को इस घोषणा के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

मुख्य घोषणा और उसका महत्व

स्वतंत्रता दिवस समारोह के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब लाल किले से आधिकारिक रूप से 'वंदे मातरम' बजाया जाएगा। गौरतलब है कि यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा था। इसे भारत का राष्ट्रगीत घोषित किया गया है, जबकि 'जन गण मन' राष्ट्रगान है।

नेताओं की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, 'देश को उस अमर गीत को सुनने के लिए इतने साल इंतजार करना पड़ा, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों लोगों को बलिदान और देश के लिए समर्पण की प्रेरणा दी। मेरा मानना है कि उन सभी लोगों की आत्माएं और दिल निश्चित रूप से शांति और खुशी महसूस करेंगे जब राष्ट्र का वह अमर गीत लाल किले की प्राचीर से गूंजेगा।'

केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने इस अवसर को प्रधानमंत्री के जन-संकल्प से जोड़ते हुए कहा, 'वंदे मातरम। प्रधानमंत्री ने देश की जनता से संकल्प लिया था कि हम सब मिलकर हर घर में तिरंगा फहराएंगे। यह एक बहुत बड़ा संदेश है।'

भाजपा सांसदों का नज़रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद मनोज तिवारी ने कहा, 'वंदे मातरम बहुत पहले से गूंजना चाहिए था। बंकिम चंद्र चटर्जी ने इसे एक विशेष भावना के साथ लिखा था, और स्वतंत्र भारत ने उसे उसी भावना से स्वीकार किया। कुछ लोगों ने वंदे मातरम् को बांटने की कोशिश की, लेकिन जब देश की जनता ने पीएम मोदी को नेतृत्व सौंपा, तो वह बांटने वाली भावना खत्म हो गई। वंदे मातरम को एक बार फिर पूरे रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा है, और इस साल इसे लाल किले पर भी बजाया जाएगा।'

BJP सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा, 'भारत के स्वतंत्रता संग्राम में 'वंदे मातरम' के नारे ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई। कई सालों तक इसकी उपेक्षा होना दुर्भाग्यपूर्ण था। आज हम सौभाग्यशाली हैं कि पीएम मोदी के नेतृत्व में 'वंदे मातरम' की गूंज एक बार फिर लाल किले से सुनाई देगी और पूरी दुनिया में सुनी जाएगी।'

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े प्रतीकों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में कई कदम उठा रही है। 'वंदे मातरम' का उद्गम बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास 'आनंदमठ' (1882) से है और यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आंदोलन का प्रतीक रहा है। स्वतंत्रता के बाद इसे राष्ट्रगीत का दर्जा मिला, परंतु आधिकारिक समारोहों में इसकी उपस्थिति सीमित रही।

आगे का परिदृश्य

नेताओं का मानना है कि 15 अगस्त को लाल किले से 'वंदे मातरम' का गूंजना देशभर में देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देगा। यह निर्णय स्वतंत्रता दिवस समारोह के स्वरूप में एक उल्लेखनीय बदलाव के रूप में दर्ज होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि सात दशकों से अधिक समय तक यह कदम क्यों नहीं उठाया गया — और इसका उत्तर केवल 'उपेक्षा' कहकर देना इतिहास को सरल बना देता है। राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बीच की बहस संविधान सभा के समय से चली आ रही है, जिसमें विविधता और एकता के बीच संतुलन का विचार केंद्र में था। इस निर्णय को सांस्कृतिक पुनर्स्थापना के रूप में देखा जा सकता है, परंतु मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि क्या इस प्रतीकात्मक कदम के साथ कोई नीतिगत या संस्थागत परिवर्तन भी जुड़ा है। प्रतीक महत्वपूर्ण होते हैं, किंतु उनकी असली परीक्षा तब होती है जब वे नागरिक जीवन में ठोस बदलाव लाते हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाल किले से 'वंदे मातरम' पहली बार कब बजेगा?
15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले की प्राचीर से पहली बार 'वंदे मातरम' आधिकारिक रूप से बजाया जाएगा। यह स्वतंत्रता दिवस समारोह के इतिहास में एक नई परंपरा की शुरुआत मानी जा रही है।
'वंदे मातरम' क्या है और इसका महत्व क्यों है?
'वंदे मातरम' भारत का राष्ट्रगीत है, जिसकी रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1882 में अपने उपन्यास 'आनंदमठ' में की थी। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम में यह गीत लाखों देशवासियों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत रहा और आज भी राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न हिस्सा है।
इस फैसले पर नेताओं ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि देश को इस अमर गीत के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ा और अब लाल किले से इसकी गूंज स्वतंत्रता सेनानियों की आत्माओं को शांति देगी। BJP सांसद मनोज तिवारी और राधा मोहन सिंह ने भी इसे दीर्घ-प्रतीक्षित और ऐतिहासिक निर्णय बताया।
अब तक लाल किले से 'वंदे मातरम' क्यों नहीं बजाया जाता था?
स्वतंत्रता के बाद से आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में 'वंदे मातरम' की उपस्थिति सीमित रही। BJP सांसदों के अनुसार, कुछ राजनीतिक दलों ने इस गीत को लेकर विभाजनकारी रवैया अपनाया, जिससे इसे उचित स्थान नहीं मिल सका। हालांकि इस पर अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण रहे हैं।
इस निर्णय का देश पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
नेताओं का मानना है कि लाल किले से 'वंदे मातरम' का गूंजना देशभर में देशभक्ति की भावना को प्रगाढ़ करेगा और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देगा। यह निर्णय स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि के रूप में भी देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 घंटे पहले
  2. 13 घंटे पहले
  3. कल
  4. 1 महीना पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले