15 अगस्त 2026
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स्वतंत्रता दिवस 2026: लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा 'वंदे मातरम' का पूर्ण स्वरूप, सभी छह छंद

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स्वतंत्रता दिवस 2026: लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा 'वंदे मातरम' का पूर्ण स्वरूप, सभी छह छंद

सारांश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से पहली बार 'वंदे मातरम' के सभी छह छंद गूंजेंगे — रचना के 150 साल पूरे होने का यह जश्न महज परंपरा नहीं, एक ऐतिहासिक बदलाव है। साथ में नया कानूनी संरक्षण और DMK का विरोध — राष्ट्रीय प्रतीकों पर बहस एक बार फिर केंद्र में।

मुख्य बातें

15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से पहली बार 'वंदे मातरम' के सभी छह छंद प्रस्तुत किए जाएंगे।
यह आयोजन राष्ट्रगीत की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।
भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा और 'वंदे मातरम' अंकित विशेष ध्वज के साथ उड़ान भरी जाएगी।
संसद ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक पारित किया, जो 'वंदे मातरम' को 'जन गण मन' के समकक्ष कानूनी दर्जा देता है।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने विधेयक का विरोध किया; BJP ने इसे नागरिक अधिकार का संरक्षण बताया।
'वंदे मातरम' की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी; यह 1882 में उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था।

नई दिल्ली में 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से इतिहास में पहली बार राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का पूर्ण स्वरूप — सभी छह छंदों सहित — प्रस्तुत किया जाएगा। यह आयोजन गीत की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, और इसे भारतीय स्वाधीनता उत्सव के इतिहास में एक अभूतपूर्व क्षण माना जा रहा है।

क्या है इस बार खास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह में 'वंदे मातरम' का गायन राष्ट्रगान 'जन गण मन' से पहले होगा। अब तक स्वतंत्रता दिवस समारोहों में राष्ट्रगीत के केवल प्रारंभिक दो पद ही प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत राष्ट्रीय समारोहों में राष्ट्रगान से पूर्व राष्ट्रगीत के संपूर्ण स्वरूप की प्रस्तुति को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस भव्य कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा की जाएगी और 'वंदे मातरम' अंकित विशेष ध्वज के साथ उड़ान भरी जाएगी। आयोजन को 'युवा शक्ति' की ऊर्जा और 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण की यात्रा से भी जोड़ा जा रहा है।

वंदे मातरम की ऐतिहासिक विरासत

राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी। यह गीत संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में लिखा गया था और सर्वप्रथम 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ, जहाँ इसे एक संन्यासी द्वारा गाए जाने के रूप में चित्रित किया गया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में यह गीत क्रांतिकारियों और आंदोलनकारियों के लिए प्रेरणा का महान स्रोत बना।

कानूनी संरक्षण और राजनीतिक विवाद

संसद ने हाल ही में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक पारित किया, जो 'वंदे मातरम' को अपमान के कृत्यों से कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष कानूनी दर्जा देता है।

लोकसभा में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने इस विधेयक का विरोध किया और सरकार पर राष्ट्रगीत के माध्यम से 'देश को विभाजित' करने का आरोप लगाया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संशोधन का बचाव करते हुए कहा कि इससे नागरिकों को बिना किसी बाधा के 'वंदे मातरम' के प्रति सम्मान प्रकट करने का अधिकार सुनिश्चित होगा। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर केंद्र और विपक्षी दलों के बीच मतभेद गहरे हो रहे हैं।

समारोह का विस्तृत कार्यक्रम

लाल किले पर प्रधानमंत्री के पहुँचने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), दिल्ली एरिया, लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी प्रधानमंत्री को 'सैल्यूटिंग बेस' तक ले जाएंगे।

इंटर-सर्विसेज और दिल्ली पुलिस के संयुक्त गार्ड द्वारा 'जनरल सैल्यूट' दिया जाएगा। 'गार्ड ऑफ ऑनर' दल में सेना, नौसेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस से एक-एक अधिकारी और 24-24 जवान शामिल होंगे। दिल्ली पुलिस दल की कमान एडिशनल डीसीपी विनीत कुमार संभालेंगे।

ध्वजारोहण के पश्चात तिरंगे को 'राष्ट्रीय सलामी' दी जाएगी। एक जेसीओ और 25 अन्य रैंक के जवानों वाला आर्मी बैंड 'वंदे मातरम' की धुन बजाएगा, जिसके साथ उपस्थित सभी लोग राष्ट्रगीत गाएंगे। तत्पश्चात राष्ट्रगान का गायन होगा और प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह पहली बार है जब स्वतंत्रता दिवस के मंच पर 'वंदे मातरम' के सभी छह छंद प्रस्तुत किए जाएंगे। नए दिशा-निर्देशों के लागू होने के बाद आने वाले राष्ट्रीय समारोहों में भी इसी परंपरा का पालन अपेक्षित है। राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े कानूनी संशोधनों और इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के दीर्घकालिक सांस्कृतिक प्रभाव पर बहस जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ आया कानूनी संशोधन — जो राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समकक्ष दर्जा देता है — एक बड़े राजनीतिक प्रश्न को जन्म देता है। DMK का विरोध यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का केंद्रीकरण सांस्कृतिक एकता की जगह क्षेत्रीय विभाजन को गहरा कर सकता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि 'वंदे मातरम' के संस्कृत-बंगाली मिश्रण को लेकर दक्षिण भारत में ऐतिहासिक असहजता रही है, और बिना व्यापक सहमति के किया गया यह बदलाव उत्सव से अधिक टकराव का रूप ले सकता है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाल किले पर 'वंदे मातरम' के पूर्ण स्वरूप की प्रस्तुति पहली बार क्यों हो रही है?
80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह विशेष आयोजन किया जा रहा है। अब तक समारोहों में केवल प्रारंभिक दो पद ही प्रस्तुत किए जाते थे, लेकिन इस बार नए दिशा-निर्देशों के तहत सभी छह छंद गाए जाएंगे।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक क्या है?
यह संसद द्वारा हाल ही में पारित विधेयक है जो 'वंदे मातरम' को अपमान के कृत्यों से कानूनी सुरक्षा देता है और इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष कानूनी दर्जा प्रदान करता है। इस संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत का अपमान करना कानूनन दंडनीय होगा।
DMK ने 'वंदे मातरम' विधेयक का विरोध क्यों किया?
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रगीत के माध्यम से 'देश को विभाजित' करने की कोशिश कर रही है। DMK ने लोकसभा में इस विधेयक का विरोध किया, जिसने बाद में राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया।
'वंदे मातरम' की रचना कब और किसने की थी?
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी। यह संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में लिखा गया था और 1882 में उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ।
15 अगस्त 2026 के समारोह में 'वंदे मातरम' कब और कैसे प्रस्तुत किया जाएगा?
ध्वजारोहण के बाद आर्मी बैंड 'वंदे मातरम' की धुन बजाएगा और लाल किले में उपस्थित सभी लोग राष्ट्रगीत के सभी छह छंद गाएंगे। इसके बाद राष्ट्रगान 'जन गण मन' का गायन होगा और तत्पश्चात प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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