स्वतंत्रता दिवस 2026: लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा 'वंदे मातरम' का पूर्ण स्वरूप, सभी छह छंद
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से इतिहास में पहली बार राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का पूर्ण स्वरूप — सभी छह छंदों सहित — प्रस्तुत किया जाएगा। यह आयोजन गीत की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, और इसे भारतीय स्वाधीनता उत्सव के इतिहास में एक अभूतपूर्व क्षण माना जा रहा है।
क्या है इस बार खास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह में 'वंदे मातरम' का गायन राष्ट्रगान 'जन गण मन' से पहले होगा। अब तक स्वतंत्रता दिवस समारोहों में राष्ट्रगीत के केवल प्रारंभिक दो पद ही प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत राष्ट्रीय समारोहों में राष्ट्रगान से पूर्व राष्ट्रगीत के संपूर्ण स्वरूप की प्रस्तुति को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस भव्य कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा की जाएगी और 'वंदे मातरम' अंकित विशेष ध्वज के साथ उड़ान भरी जाएगी। आयोजन को 'युवा शक्ति' की ऊर्जा और 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण की यात्रा से भी जोड़ा जा रहा है।
वंदे मातरम की ऐतिहासिक विरासत
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी। यह गीत संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में लिखा गया था और सर्वप्रथम 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ, जहाँ इसे एक संन्यासी द्वारा गाए जाने के रूप में चित्रित किया गया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में यह गीत क्रांतिकारियों और आंदोलनकारियों के लिए प्रेरणा का महान स्रोत बना।
कानूनी संरक्षण और राजनीतिक विवाद
संसद ने हाल ही में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक पारित किया, जो 'वंदे मातरम' को अपमान के कृत्यों से कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष कानूनी दर्जा देता है।
लोकसभा में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने इस विधेयक का विरोध किया और सरकार पर राष्ट्रगीत के माध्यम से 'देश को विभाजित' करने का आरोप लगाया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संशोधन का बचाव करते हुए कहा कि इससे नागरिकों को बिना किसी बाधा के 'वंदे मातरम' के प्रति सम्मान प्रकट करने का अधिकार सुनिश्चित होगा। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर केंद्र और विपक्षी दलों के बीच मतभेद गहरे हो रहे हैं।
समारोह का विस्तृत कार्यक्रम
लाल किले पर प्रधानमंत्री के पहुँचने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), दिल्ली एरिया, लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी प्रधानमंत्री को 'सैल्यूटिंग बेस' तक ले जाएंगे।
इंटर-सर्विसेज और दिल्ली पुलिस के संयुक्त गार्ड द्वारा 'जनरल सैल्यूट' दिया जाएगा। 'गार्ड ऑफ ऑनर' दल में सेना, नौसेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस से एक-एक अधिकारी और 24-24 जवान शामिल होंगे। दिल्ली पुलिस दल की कमान एडिशनल डीसीपी विनीत कुमार संभालेंगे।
ध्वजारोहण के पश्चात तिरंगे को 'राष्ट्रीय सलामी' दी जाएगी। एक जेसीओ और 25 अन्य रैंक के जवानों वाला आर्मी बैंड 'वंदे मातरम' की धुन बजाएगा, जिसके साथ उपस्थित सभी लोग राष्ट्रगीत गाएंगे। तत्पश्चात राष्ट्रगान का गायन होगा और प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह पहली बार है जब स्वतंत्रता दिवस के मंच पर 'वंदे मातरम' के सभी छह छंद प्रस्तुत किए जाएंगे। नए दिशा-निर्देशों के लागू होने के बाद आने वाले राष्ट्रीय समारोहों में भी इसी परंपरा का पालन अपेक्षित है। राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े कानूनी संशोधनों और इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के दीर्घकालिक सांस्कृतिक प्रभाव पर बहस जारी रहने की संभावना है।