कर्नाटक में ₹38,000 करोड़ बकाया: ठेकेदार संघ ने CM शिवकुमार को पत्र लिखा, इमरजेंसी मीटिंग की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने 29 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर लगभग ₹38,000 करोड़ के बकाया बिलों के तत्काल भुगतान की माँग की और पिछले तीन वर्षों से लंबित इस मुद्दे पर गहरा असंतोष जताया। संघ ने मुख्यमंत्री को उनके 30 जून 2026 के उस वादे की याद दिलाई जिसमें उन्होंने दो महीने के भीतर बकाया राशि जारी करने का आश्वासन दिया था।
मुख्य माँगें और शिकायतें
संघ के अध्यक्ष आर. मंजूनाथ ने पत्र में मुख्यमंत्री से अपील की कि वे अपने दो महीने के वादे को पूरा करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या लगभग तीन वर्षों से अनसुलझी है और ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रतिकूल असर डाल रही है।
संघ ने अलग-अलग सरकारी विभागों द्वारा फंड जारी करने में अधिक पारदर्शिता की माँग की और स्पेशल लेटर ऑफ क्रेडिट (एलओसी) जारी करने की प्रथा को समाप्त करने की अपील की। इसके अतिरिक्त, ठेकेदारों ने जीएसटी से उत्पन्न 8 प्रतिशत के अंतर की राशि शीघ्र जारी करने की भी माँग रखी।
स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता की अपील
संघ ने सरकार से अनुरोध किया कि कर्नाटक में सरकारी कार्य आवंटित करते समय स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाए और अन्य राज्यों के ठेकेदारों को अनावश्यक बढ़ावा न दिया जाए। यह माँग राज्य के ठेकेदारों की लंबे समय से चली आ रही चिंता को दर्शाती है।
PWD और ED छापेमारी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि संघ ने लोक निर्माण विभाग (PWD) — जो मंत्री सतीश जारकीहोली के नेतृत्व में है — में भुगतान में पारदर्शिता होने की बात भी कही। यह टिप्पणी तब आई जब जारकीहोली और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया छापेमारी सुर्खियों में है।
ईडी के बयान के अनुसार, सितंबर 2026 में बेंगलुरु, बेलगावी, गोकक और कोलकाता समेत 21 ठिकानों पर फेमा (FEMA) जाँच के सिलसिले में छापे मारे गए। ये छापे कथित तौर पर बिना घोषित विदेशी निवेश, सीमा-पार व्यापारिक संबंधों और संदिग्ध वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के तहत किए गए। छापेमारी में ₹3.3 करोड़ नकद, ₹15 लाख की विदेशी मुद्रा और अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जब्त किए गए।
इमरजेंसी मीटिंग की माँग
संघ ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से तत्काल एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की अपील की है ताकि ठेकेदारों की समस्याओं पर सीधी बातचीत हो सके। संघ का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो राज्य में सरकारी निर्माण कार्य और बाधित हो सकते हैं।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में उठा है जब कर्नाटक सरकार वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई मोर्चों पर दबाव में है। ₹38,000 करोड़ की यह बकाया राशि राज्य के सार्वजनिक निर्माण क्षेत्र की दीर्घकालिक वित्तीय जटिलताओं को उजागर करती है। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री शिवकुमार इस माँग पर कब और किस रूप में प्रतिक्रिया देते हैं।