चिक्कोडी में चार साल के बकाया बिल पर ठेकेदारों का हंगामा, जल विभाग कार्यालय का घेराव
सारांश
मुख्य बातें
बेलगावी जिले के चिक्कोडी में ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग के ठेकेदारों ने 30 सितंबर 2026 को कार्यकारी अभियंता के कार्यालय का घेराव किया और पिछले चार वर्षों से लंबित बिलों का तत्काल भुगतान करने की माँग रखी। प्रदर्शन में चिक्कोडी, निप्पानी, रायबाग, हुक्केरी और गोकाक के बड़ी संख्या में ठेकेदार शामिल हुए।
मुख्य घटनाक्रम
ठेकेदारों ने आरडब्ल्यूएस डिवीजन कार्यालय की घेराबंदी कर अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। प्रदर्शन के दौरान ठेकेदारों ने चिक्कोडी जल आपूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता पांडुरंगा राव और एईई बी.आर. जंबागी को सीधे घेरकर सवाल किए। ठेकेदारों का आरोप है कि विभिन्न निर्माण कार्यों के बिल पिछले चार साल से अटके पड़े हैं और बार-बार माँग करने के बावजूद भुगतान नहीं हो रहा।
ठेकेदारों की माँगें
प्रदर्शनकारी ठेकेदारों ने स्पष्ट किया कि जब तक पुराने बकाए का निपटान नहीं होता, तब तक नए व जारी निर्माण कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाना उनके लिए संभव नहीं होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और सभी लंबित राशि जारी करने की माँग की।
गडग जिले का संदर्भ
यह विरोध ऐसे समय में और उग्र हुआ जब गडग जिले में एक एईई को लंबित फंड जारी कराने के मामले में कथित तौर पर परेशान किए जाने और उसके बाद उनके लापता होने की घटना सामने आई। इस घटनाक्रम ने पूरे राज्य में जल आपूर्ति विभाग के ठेकेदारों की समस्याओं को और अधिक उजागर कर दिया है। गौरतलब है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है — राज्य के कई जिलों में सरकारी विभागों द्वारा ठेकेदारों के बिल लंबे समय तक रोके जाने की शिकायतें आती रही हैं।
आम जनता और निर्माण कार्यों पर असर
ठेकेदारों के अनुसार, भुगतान में देरी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति से जुड़े निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं। बकाया न मिलने से ठेकेदार सामग्री और मज़दूरी का खर्च वहन करने में असमर्थ होते हैं, जिसका सीधा असर परियोजनाओं की गति पर पड़ता है।
क्या होगा आगे
ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो विरोध प्रदर्शन और तेज़ किया जाएगा। अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माँगें पूरी न होने की स्थिति में आगामी दिनों में विभाग के उच्च अधिकारियों तक मामला पहुँचने की संभावना है।