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केन-बेतवा लिंक परियोजना में गड़बड़ी के आरोप: उमंग सिंघार ने ₹44 हजार करोड़ की योजना पर उठाए सवाल

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केन-बेतवा लिंक परियोजना में गड़बड़ी के आरोप: उमंग सिंघार ने ₹44 हजार करोड़ की योजना पर उठाए सवाल

सारांश

₹44 हजार करोड़ की केन-बेतवा लिंक परियोजना पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गंभीर सवाल उठाए हैं — फर्जी ग्राम सभा बैठकें, अपात्रों को मुआवज़ा और रजिस्टरों में शब्द-दर-शब्द एक जैसी भाषा। बुंदेलखंड के प्रभावित गाँवों में आंदोलन जारी है।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ₹44 हजार करोड़ की केन-बेतवा लिंक परियोजना में व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगाया।
17 एवं 18 फरवरी 2022 को अलग-अलग पंचायतों में एक ही समय — प्रातः साढ़े 11 बजे — ग्राम सभा बैठकें दर्ज; रजिस्टरों में शब्द-दर-शब्द एक जैसी भाषा।
खरिहानी ग्राम पंचायत के रजिस्टर में उस व्यक्ति के हस्ताक्षर जो उस समय सरपंच नहीं था — तत्कालीन सरपंच उमा मिश्रा थीं।
खरिहानी गांव के लिए स्वीकृत ₹11 करोड़ में से लगभग ₹8 करोड़ कथित तौर पर अपात्र या दशकों पहले गांव छोड़ चुके लोगों को दिए गए।
सिंघार ने मुख्यमंत्री से आंदोलन स्थल पर कैबिनेट बैठक आयोजित करने की माँग की।

मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 17 जुलाई को भोपाल में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बुंदेलखंड की जल संकट से निपटने के लिए बनाई जा रही केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना में पहले चरण से ही व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनके अनुसार ₹44 हजार करोड़ की इस परियोजना में ग्राम सभा प्रक्रिया, मुआवज़ा वितरण, भूमि अभिलेख, पुनर्वास, पुलिस कार्रवाई और ठेका आवंटन — सभी स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े हैं।

मुख्य आरोप और क्षेत्र दौरा

सिंघार ने बताया कि उन्होंने 14 जुलाई को छतरपुर जिले के ग्राम कूपी का दौरा कर आंदोलनरत प्रभावित ग्रामीणों से सीधी बातचीत की। प्रभावितों के अनुसार पिछले लगभग चार वर्षों से विधिसम्मत ग्राम सभा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि प्रभावित परिवारों को सामाजिक प्रभाव आकलन की जानकारी न दी गई और न ही उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।

ग्राम सभा रजिस्टरों में संदिग्ध समानता

रतिया, करी, खटवानी, पालकोहा, नय्यापुर, खजुरी और सुकवाहा ग्राम पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टरों में शब्द-दर-शब्द एक जैसी भाषा दर्ज मिली। सिंघार के अनुसार अधिकांश ग्राम सभाओं की बैठकें 17 एवं 18 फरवरी 2022 को प्रातः साढ़े 11 बजे दर्ज हैं — अलग-अलग पंचायतों में एक ही समय पर बैठकें होना गंभीर प्रशासनिक संदेह उत्पन्न करता है। उनका आरोप है कि आदिवासियों की ग्राम सभा को केवल कागज़ी औपचारिकता बनाकर रख दिया गया।

फर्जी हस्ताक्षर का आरोप

सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि खरिहानी ग्राम पंचायत के 17 फरवरी 2022 के कार्यवाही रजिस्टर में रतीराम मेहरबार के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जबकि उस समय निर्वाचित सरपंच उमा मिश्रा थीं। उनके अनुसार रतीराम मेहरबार ने लगभग छह माह बाद पदभार ग्रहण किया था। यह ऐसे समय में आया है जब परियोजना प्रभावित क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन तेज़ हो रहे हैं।

मुआवज़े में अनियमितता का दावा

नेता प्रतिपक्ष ने प्रभावितों के हवाले से बताया कि खरिहानी गांव के मकानों के लिए लगभग ₹11 करोड़ का मुआवज़ा स्वीकृत हुआ। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार इसमें से लगभग ₹8 करोड़ ऐसे लोगों को दिए गए जिनका गांव से कोई संबंध नहीं था या जो वर्ष 1980–1990 में ही गांव छोड़ चुके थे। वास्तविक प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा मिला ही नहीं — यह सिंघार का सीधा आरोप है।

मुख्यमंत्री से आंदोलन स्थल पर कैबिनेट बैठक की माँग

सिंघार ने मुख्यमंत्री द्वारा राजधानी के बाहर जिलों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करने का उल्लेख करते हुए माँग की कि एक कैबिनेट बैठक केन-बेतवा परियोजना के आंदोलन स्थल पर भी की जाए, ताकि प्रभावितों की पीड़ा सरकार तक सीधे पहुँच सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सभी अनियमितताओं पर सरकार को जवाब देना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सिंघार के आरोप — यदि दस्तावेज़ों से सिद्ध होते हैं — तो यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संरचनागत विफलता होगी। एक ही समय पर अलग-अलग पंचायतों में बैठकें और शब्द-दर-शब्द एक जैसे रजिस्टर यह संकेत देते हैं कि ग्राम सभा प्रक्रिया को सहमति-निर्माण के बजाय औपचारिकता तक सीमित कर दिया गया। आदिवासी और वनाधिकार कानूनों के तहत ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है — इसकी अनदेखी परियोजना की कानूनी वैधता को भी चुनौती दे सकती है। सरकार को इन आरोपों पर पारदर्शी जाँच कराकर जवाब देना होगा, अन्यथा यह मामला न्यायालय तक पहुँच सकता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केन-बेतवा लिंक परियोजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना ₹44 हजार करोड़ की एक राष्ट्रीय जल अवसंरचना योजना है, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट को दूर करना है। इसमें केन नदी के अतिरिक्त जल को बेतवा नदी से जोड़ा जाना है।
उमंग सिंघार ने परियोजना में क्या-क्या अनियमितताएँ बताई हैं?
सिंघार ने ग्राम सभा प्रक्रिया की अनदेखी, मुआवज़ा अपात्र लोगों को देने, भूमि अभिलेखों में गड़बड़ी, रजिस्टरों में फर्जी हस्ताक्षर और ठेका आवंटन में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार 17 फरवरी 2022 को एक ही समय पर अलग-अलग पंचायतों में बैठकें दर्ज हैं।
खरिहानी ग्राम पंचायत के हस्ताक्षर विवाद में क्या आरोप है?
सिंघार के अनुसार खरिहानी ग्राम पंचायत के 17 फरवरी 2022 के रजिस्टर में रतीराम मेहरबार के हस्ताक्षर हैं, जबकि उस समय सरपंच उमा मिश्रा थीं। रतीराम मेहरबार ने लगभग छह माह बाद पदभार ग्रहण किया था।
प्रभावित ग्रामीणों को मुआवज़ा क्यों नहीं मिला?
आरोपों के अनुसार खरिहानी गांव के लिए स्वीकृत लगभग ₹11 करोड़ में से करीब ₹8 करोड़ ऐसे लोगों को दिए गए जो या तो गांव से संबंधित नहीं थे या 1980–1990 में ही गांव छोड़ चुके थे। वास्तविक प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा नहीं मिला।
सिंघार ने मुख्यमंत्री से क्या माँग की है?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने माँग की है कि मुख्यमंत्री एक कैबिनेट बैठक केन-बेतवा परियोजना के आंदोलन स्थल पर आयोजित करें, ताकि प्रभावितों की समस्याएँ सीधे सरकार के संज्ञान में आ सकें।
राष्ट्र प्रेस
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