केन-बेतवा लिंक परियोजना में गड़बड़ी के आरोप: उमंग सिंघार ने ₹44 हजार करोड़ की योजना पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 17 जुलाई को भोपाल में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बुंदेलखंड की जल संकट से निपटने के लिए बनाई जा रही केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना में पहले चरण से ही व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनके अनुसार ₹44 हजार करोड़ की इस परियोजना में ग्राम सभा प्रक्रिया, मुआवज़ा वितरण, भूमि अभिलेख, पुनर्वास, पुलिस कार्रवाई और ठेका आवंटन — सभी स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े हैं।
मुख्य आरोप और क्षेत्र दौरा
सिंघार ने बताया कि उन्होंने 14 जुलाई को छतरपुर जिले के ग्राम कूपी का दौरा कर आंदोलनरत प्रभावित ग्रामीणों से सीधी बातचीत की। प्रभावितों के अनुसार पिछले लगभग चार वर्षों से विधिसम्मत ग्राम सभा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि प्रभावित परिवारों को सामाजिक प्रभाव आकलन की जानकारी न दी गई और न ही उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।
ग्राम सभा रजिस्टरों में संदिग्ध समानता
रतिया, करी, खटवानी, पालकोहा, नय्यापुर, खजुरी और सुकवाहा ग्राम पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टरों में शब्द-दर-शब्द एक जैसी भाषा दर्ज मिली। सिंघार के अनुसार अधिकांश ग्राम सभाओं की बैठकें 17 एवं 18 फरवरी 2022 को प्रातः साढ़े 11 बजे दर्ज हैं — अलग-अलग पंचायतों में एक ही समय पर बैठकें होना गंभीर प्रशासनिक संदेह उत्पन्न करता है। उनका आरोप है कि आदिवासियों की ग्राम सभा को केवल कागज़ी औपचारिकता बनाकर रख दिया गया।
फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि खरिहानी ग्राम पंचायत के 17 फरवरी 2022 के कार्यवाही रजिस्टर में रतीराम मेहरबार के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जबकि उस समय निर्वाचित सरपंच उमा मिश्रा थीं। उनके अनुसार रतीराम मेहरबार ने लगभग छह माह बाद पदभार ग्रहण किया था। यह ऐसे समय में आया है जब परियोजना प्रभावित क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन तेज़ हो रहे हैं।
मुआवज़े में अनियमितता का दावा
नेता प्रतिपक्ष ने प्रभावितों के हवाले से बताया कि खरिहानी गांव के मकानों के लिए लगभग ₹11 करोड़ का मुआवज़ा स्वीकृत हुआ। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार इसमें से लगभग ₹8 करोड़ ऐसे लोगों को दिए गए जिनका गांव से कोई संबंध नहीं था या जो वर्ष 1980–1990 में ही गांव छोड़ चुके थे। वास्तविक प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा मिला ही नहीं — यह सिंघार का सीधा आरोप है।
मुख्यमंत्री से आंदोलन स्थल पर कैबिनेट बैठक की माँग
सिंघार ने मुख्यमंत्री द्वारा राजधानी के बाहर जिलों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करने का उल्लेख करते हुए माँग की कि एक कैबिनेट बैठक केन-बेतवा परियोजना के आंदोलन स्थल पर भी की जाए, ताकि प्रभावितों की पीड़ा सरकार तक सीधे पहुँच सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सभी अनियमितताओं पर सरकार को जवाब देना होगा।