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MP के 343 जनजातीय छात्रावासों में 3 महीने से राशन नहीं, 22 हजार छात्र प्रभावित: उमंग सिंघार

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MP के 343 जनजातीय छात्रावासों में 3 महीने से राशन नहीं, 22 हजार छात्र प्रभावित: उमंग सिंघार

सारांश

मध्य प्रदेश के 343 जनजातीय छात्रावासों में 22 हजार से अधिक आदिवासी छात्र तीन महीने से राशन के इंतजार में हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने BJP सरकार पर आदिवासी बच्चों के साथ अन्याय का आरोप लगाया है — और यह विवाद उस वर्ग को लेकर है जो राज्य की सत्ता की चाबी माना जाता है।

मुख्य बातें

343 जनजातीय छात्रावासों में 22 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को मार्च, अप्रैल और मई में सस्ता राशन नहीं मिला।
154 एसटी हॉस्टल में 10 हजार और 189 एससी हॉस्टल में 12 हजार छात्र प्रभावित हैं।
भोपाल के 21 हॉस्टलों सहित पूरे प्रदेश में छात्रावास उधारी पर भोजन व्यवस्था कर रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे 'आदिवासी समाज के भविष्य के साथ अन्याय' बताया।
मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग की आबादी करीब 21 प्रतिशत है — जो चुनावी रूप से निर्णायक है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 26 मई 2026 को आरोप लगाया कि राज्य के 343 जनजातीय छात्रावासों में पढ़ने वाले 22 हजार से अधिक आदिवासी छात्र-छात्राओं को पिछले तीन महीनों से सस्ते राशन की आपूर्ति नहीं हो रही। मार्च, अप्रैल और मई — तीनों महीनों में गेहूं-चावल का आवंटन न होने से ये छात्रावास उधारी पर चल रहे हैं।

मुख्य आरोप और आँकड़े

सिंघार के अनुसार, प्रभावित छात्रावासों में 154 एसटी हॉस्टल हैं जिनमें करीब 10 हजार छात्र हैं, और 189 एससी हॉस्टल हैं जिनमें 12 हजार छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत हैं। भोपाल के 21 हॉस्टलों सहित पूरे प्रदेश में आदिवासी बच्चों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है।

सिंघार ने कहा, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार विज्ञापनों में आदिवासी हितैषी बनने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में इन बच्चों को एक वक्त का भोजन भी नहीं दे पा रही। उन्होंने इसे 'सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के भविष्य के साथ किया जा रहा अन्याय' बताया।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग की आबादी करीब 21 प्रतिशत है, जो चुनावी दृष्टि से निर्णायक भूमिका निभाती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह वर्ग जिस भी दल के साथ जाता है, सत्ता उसी के पास आती है। यही कारण है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और BJP — दोनों प्रमुख दल इस वर्ग को अपने पाले में रखने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार जनजातीय वर्ग के विकास के लिए अनेक योजनाएँ चलाने का दावा कर रही है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेर रही है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आम जनता और छात्रों पर असर

तीन महीनों से राशन आपूर्ति बाधित रहने के कारण छात्रावास प्रशासन को उधार पर भोजन व्यवस्था करनी पड़ रही है। इससे न केवल छात्रों के पोषण पर असर पड़ रहा है, बल्कि उनकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

क्या होगा आगे

सिंघार ने राज्य सरकार से तत्काल राशन आपूर्ति सुनिश्चित करने और जवाबदेही तय करने की माँग की है। यह मामला विधानसभा में भी उठाए जाने की संभावना है। आलोचकों का कहना है कि बिना समयबद्ध कार्रवाई के यह मुद्दा आगामी चुनावों में दोनों दलों के लिए एक बड़ा राजनीतिक मोड़ बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

निगरानी तंत्र की विफलता है। विडंबना यह है कि जिस वर्ग को दोनों दल चुनाव में सबसे ज्यादा रिझाते हैं, सत्ता मिलने के बाद उसी वर्ग के बच्चों को उधारी पर खाना खाना पड़ रहा है। जब तक राशन आपूर्ति की जवाबदेही को किसी स्वतंत्र निगरानी ढाँचे से नहीं जोड़ा जाता, ऐसे आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला हर विधानसभा सत्र में दोहराया जाता रहेगा।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में राशन संकट क्या है?
मध्य प्रदेश के 343 जनजातीय छात्रावासों में मार्च, अप्रैल और मई — तीन महीनों से गेहूं-चावल का आवंटन नहीं हुआ है, जिससे 22 हजार से अधिक आदिवासी छात्र-छात्राएँ प्रभावित हैं। छात्रावास प्रशासन उधारी पर भोजन व्यवस्था कर रहा है।
उमंग सिंघार ने किस पर आरोप लगाया है?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने BJP सरकार पर आरोप लगाया है कि वह विज्ञापनों में आदिवासी हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन व्यवहार में इन बच्चों को एक वक्त का भोजन भी नहीं दे पा रही। उन्होंने इसे आदिवासी समाज के भविष्य के साथ अन्याय बताया।
कितने छात्रावास और कितने छात्र प्रभावित हैं?
कुल 343 छात्रावास प्रभावित हैं — जिनमें 154 एसटी हॉस्टल (10 हजार छात्र) और 189 एससी हॉस्टल (12 हजार छात्र) शामिल हैं। भोपाल के 21 हॉस्टल भी इनमें शामिल हैं।
मध्यप्रदेश में जनजातीय वर्ग की राजनीतिक अहमियत क्यों है?
मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग की आबादी करीब 21 प्रतिशत है। यह वर्ग चुनावी दृष्टि से निर्णायक माना जाता है और इसी कारण BJP और कांग्रेस दोनों इस वर्ग को अपने पक्ष में रखने के लिए प्रयासरत रहते हैं।
इस मामले में सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?
अभी तक राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार जनजातीय वर्ग के विकास के लिए अनेक योजनाएँ चलाने का दावा करती रही है।
राष्ट्र प्रेस
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