MP के 343 जनजातीय छात्रावासों में 3 महीने से राशन नहीं, 22 हजार छात्र प्रभावित: उमंग सिंघार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 26 मई 2026 को आरोप लगाया कि राज्य के 343 जनजातीय छात्रावासों में पढ़ने वाले 22 हजार से अधिक आदिवासी छात्र-छात्राओं को पिछले तीन महीनों से सस्ते राशन की आपूर्ति नहीं हो रही। मार्च, अप्रैल और मई — तीनों महीनों में गेहूं-चावल का आवंटन न होने से ये छात्रावास उधारी पर चल रहे हैं।
मुख्य आरोप और आँकड़े
सिंघार के अनुसार, प्रभावित छात्रावासों में 154 एसटी हॉस्टल हैं जिनमें करीब 10 हजार छात्र हैं, और 189 एससी हॉस्टल हैं जिनमें 12 हजार छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत हैं। भोपाल के 21 हॉस्टलों सहित पूरे प्रदेश में आदिवासी बच्चों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है।
सिंघार ने कहा, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार विज्ञापनों में आदिवासी हितैषी बनने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में इन बच्चों को एक वक्त का भोजन भी नहीं दे पा रही। उन्होंने इसे 'सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के भविष्य के साथ किया जा रहा अन्याय' बताया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग की आबादी करीब 21 प्रतिशत है, जो चुनावी दृष्टि से निर्णायक भूमिका निभाती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह वर्ग जिस भी दल के साथ जाता है, सत्ता उसी के पास आती है। यही कारण है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और BJP — दोनों प्रमुख दल इस वर्ग को अपने पाले में रखने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार जनजातीय वर्ग के विकास के लिए अनेक योजनाएँ चलाने का दावा कर रही है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेर रही है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आम जनता और छात्रों पर असर
तीन महीनों से राशन आपूर्ति बाधित रहने के कारण छात्रावास प्रशासन को उधार पर भोजन व्यवस्था करनी पड़ रही है। इससे न केवल छात्रों के पोषण पर असर पड़ रहा है, बल्कि उनकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
क्या होगा आगे
सिंघार ने राज्य सरकार से तत्काल राशन आपूर्ति सुनिश्चित करने और जवाबदेही तय करने की माँग की है। यह मामला विधानसभा में भी उठाए जाने की संभावना है। आलोचकों का कहना है कि बिना समयबद्ध कार्रवाई के यह मुद्दा आगामी चुनावों में दोनों दलों के लिए एक बड़ा राजनीतिक मोड़ बन सकता है।