केन-बेतवा परियोजना: आदिवासी परिवार चौथे दिन भी चिता आंदोलन पर, उमंग सिंघार ने मोहन यादव सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से विस्थापित आदिवासी परिवार भारी बारिश के बीच चौथे दिन भी चिता आंदोलन करने पर मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि सरकार द्वारा दिया जा रहा ₹12.50 लाख का पुनर्वास पैकेज अपर्याप्त है और उचित मुआवजा अब तक नहीं मिला है। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर आदिवासियों के साथ अन्याय का गंभीर आरोप लगाया है।
चिता आंदोलन: क्या है मामला
बुंदेलखंड क्षेत्र दशकों से गंभीर जल संकट से जूझ रहा है, जिसके चलते यहाँ के लोग रोज़गार की तलाश में पलायन को मजबूर होते हैं। इस संकट के स्थायी समाधान के रूप में केन-बेतवा लिंक परियोजना तैयार की गई, जिसके तहत भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। परंतु जिन आदिवासी परिवारों की जल, जंगल और जमीन इस परियोजना में जा रही है, वे मुआवजे की राशि को न्यायसंगत नहीं मानते और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
उमंग सिंघार के आरोप
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने आदिवासियों को न्याय नहीं, केवल संघर्ष दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि 'डबल इंजन सरकार' का आदिवासी सम्मान आखिर क्या है, जब प्रभावित परिवार भारी बारिश में भी आंदोलन करने पर विवश हैं। सिंघार ने माँग की कि मोहन यादव सरकार स्पष्ट करे कि आदिवासियों को न्याय कब मिलेगा।
सरकार और विकास का पक्ष
केन-बेतवा परियोजना को बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने वाली परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई सुविधाएँ बढ़ेंगी और पानी का संकट दूर होगा। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि विकास के नाम पर विस्थापन और उसके बाद अधिकारों की अनदेखी एक गंभीर चिंता का विषय है।
कांग्रेस का रुख
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) ने स्पष्ट किया है कि वह आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी। सिंघार ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर विस्थापन और फिर अधिकारों की अनदेखी भाजपा का स्थापित मॉडल बन चुका है।
आगे क्या होगा
प्रभावित परिवारों का आंदोलन जारी है और राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। यह देखना होगा कि मोहन यादव सरकार मुआवजे की राशि पर पुनर्विचार करती है या नहीं। गौरतलब है कि बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में विस्थापित समुदायों के पुनर्वास का मुद्दा देशभर में एक संवेदनशील विषय रहा है, और यह मामला उसी व्यापक बहस का हिस्सा है।