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सरदार सरोवर बांध समझौते पर श्वेत पत्र की मांग, जीतू पटवारी ने MP के हितों की अनदेखी का लगाया आरोप

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सरदार सरोवर बांध समझौते पर श्वेत पत्र की मांग, जीतू पटवारी ने MP के हितों की अनदेखी का लगाया आरोप

सारांश

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने सरदार सरोवर बांध विवाद में ₹7,500 करोड़ का दावा छोड़कर उलटे गुजरात को ₹550 करोड़ देने पर सहमति जताई — जबकि 178 प्रभावित गाँव और 23,600 विस्थापित परिवार मध्य प्रदेश के हैं। कांग्रेस ने श्वेत पत्र और विधानसभा में चर्चा की माँग की है।

मुख्य बातें

जीतू पटवारी ने 9 जुलाई को भोपाल में सरदार सरोवर बांध समझौते पर श्वेत पत्र की माँग की।
आरोप: MP सरकार ने ₹7,500 करोड़ का दावा छोड़ा और गुजरात को ₹550 करोड़ देने पर सहमति जताई।
बांध से प्रभावित 230 गाँवों में से 178 मध्य प्रदेश में; 23,600 परिवार MP से विस्थापित।
नर्मदा की 1,312 किमी लंबाई में से 1,000 किमी से अधिक प्रवाह मध्य प्रदेश में।
सरकार का दावा: ₹1,500 करोड़ देनदारी को ₹231 करोड़ में निपटाकर ₹1,268 करोड़ बचाए।
कांग्रेस ने विधानसभा में विस्तृत चर्चा और समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 9 जुलाई 2026 को भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में सरदार सरोवर बांध को लेकर मध्य प्रदेश और गुजरात सरकार के बीच हुए समझौते पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते में प्रदेश के किसानों, आम नागरिकों और वैधानिक अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की गई है और राज्य सरकार को तत्काल श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।

विवाद की जड़: नर्मदा पर मध्य प्रदेश का दावा

पटवारी ने बताया कि नर्मदा नदी की कुल लंबाई 1,312 किलोमीटर है, जिसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक प्रवाह मध्य प्रदेश में है। उनके अनुसार, इस भौगोलिक वास्तविकता के आधार पर नर्मदा जल पर पहला अधिकार मध्य प्रदेश की जनता का बनता है। बावजूद इसके, सरदार सरोवर परियोजना का सर्वाधिक बोझ मध्य प्रदेश ने ही उठाया है।

विस्थापन और नुकसान के आँकड़े

पटवारी ने आँकड़े पेश करते हुए कहा कि बांध से प्रभावित 230 गांवों में से 178 गाँव मध्य प्रदेश में हैं, जबकि गुजरात में केवल 19 गाँव प्रभावित हुए। बांध निर्माण के कारण मध्य प्रदेश के लगभग 23,600 परिवार विस्थापित हुए, जबकि गुजरात में यह संख्या करीब 4,000 परिवार रही। मध्य प्रदेश ने सर्वाधिक कृषि भूमि, वन भूमि, आदिवासी परिवारों के विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरणीय क्षति का बोझ उठाया है।

₹7,500 करोड़ का दावा छोड़ा, गुजरात को ₹550 करोड़ देने की सहमति का आरोप

पटवारी के अनुसार, इन नुकसानों के आधार पर पूर्व में हुए समझौते के तहत तत्कालीन राज्य सरकार ने ₹7,669 करोड़ का दावा प्रस्तुत किया था। आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में इस दावे को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया और उलटे गुजरात को लगभग ₹550 करोड़ देने पर सहमति जता दी गई। राज्य सरकार का दावा है कि उसने ₹1,500 करोड़ की देनदारी को घटाकर ₹231 करोड़ में निपटाया और ₹1,268 करोड़ की बचत की — लेकिन कांग्रेस इस तर्क को सिरे से खारिज करती है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही राज्य सरकार पर सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर सवाल उठा रहा है।

2019 की घटना का संदर्भ

पटवारी ने वर्ष 2019 की उस घटना का भी उल्लेख किया, जब आरोपों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सरदार सरोवर बांध को उसकी पूरी क्षमता तक भर दिया गया था। कथित तौर पर इससे मध्य प्रदेश के सैकड़ों गाँव जलमग्न हो गए और प्रदेश को भारी मानवीय एवं आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।

कांग्रेस की मांग: श्वेत पत्र और विधानसभा में चर्चा

पटवारी ने राज्य सरकार से माँग की है कि वह स्पष्ट करे कि ₹7,500 करोड़ के दावे को छोड़कर ₹1,250 से ₹1,500 करोड़ के बीच समझौता किन परिस्थितियों में और किन अधिकारियों की भागीदारी से किया गया। कांग्रेस ने माँग की है कि इस विषय पर श्वेत पत्र जारी किया जाए और मध्य प्रदेश विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराई जाए, ताकि प्रदेश की जनता को पूरी सच्चाई पता चल सके। गौरतलब है कि इतने बड़े वित्तीय समझौते में विधानसभा, विपक्ष या जनता को विश्वास में नहीं लिया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

600 विस्थापित परिवारों के बदले यदि ₹7,500 करोड़ का दावा बिना विधानसभा की जानकारी के छोड़ा गया, तो यह जवाबदेही की गंभीर विफलता है। राज्य सरकार की 'बचत' वाली दलील तब तक अधूरी है जब तक मूल दावे की गणना, वार्ता की प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका सार्वजनिक न हो। श्वेत पत्र की माँग राजनीतिक नहीं, संवैधानिक जवाबदेही की माँग है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरदार सरोवर बांध समझौते पर विवाद क्या है?
कांग्रेस का आरोप है कि मध्य प्रदेश सरकार ने सरदार सरोवर बांध से जुड़े विवाद में ₹7,500 करोड़ का दावा छोड़कर उलटे गुजरात को लगभग ₹550 करोड़ देने पर सहमति जताई। यह समझौता विधानसभा या विपक्ष को विश्वास में लिए बिना किया गया, जिसे कांग्रेस प्रदेश के हितों के विरुद्ध बताती है।
मध्य प्रदेश को सरदार सरोवर परियोजना से कितना नुकसान हुआ?
कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के अनुसार, बांध से प्रभावित 230 गाँवों में से 178 गाँव मध्य प्रदेश में हैं और लगभग 23,600 परिवार विस्थापित हुए। इसके अलावा, राज्य ने सर्वाधिक कृषि भूमि, वन भूमि और आदिवासी परिवारों के विस्थापन का बोझ उठाया है।
MP सरकार सरदार सरोवर समझौते पर क्या कह रही है?
राज्य सरकार का दावा है कि उसने ₹1,500 करोड़ की देनदारी को घटाकर ₹231 करोड़ में निपटाया और इस प्रकार ₹1,268 करोड़ की बचत की। हालाँकि, कांग्रेस इस तर्क को अस्वीकार करती है और मूल ₹7,500 करोड़ के दावे को छोड़ने की परिस्थितियों पर सवाल उठाती है।
जीतू पटवारी ने 2019 की किस घटना का उल्लेख किया?
पटवारी ने आरोप लगाया कि 2019 में कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सरदार सरोवर बांध को पूरी क्षमता तक भर दिया गया, जिससे मध्य प्रदेश के सैकड़ों गाँव जलमग्न हो गए और प्रदेश को भारी मानवीय व आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
कांग्रेस इस मामले में क्या माँग कर रही है?
कांग्रेस ने राज्य सरकार से श्वेत पत्र जारी करने और मध्य प्रदेश विधानसभा में इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराने की माँग की है। पार्टी चाहती है कि समझौते की परिस्थितियाँ, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और वित्तीय गणना पूरी तरह सार्वजनिक हों।
राष्ट्र प्रेस
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