सरदार सरोवर बांध समझौते पर श्वेत पत्र की मांग, जीतू पटवारी ने MP के हितों की अनदेखी का लगाया आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 9 जुलाई 2026 को भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में सरदार सरोवर बांध को लेकर मध्य प्रदेश और गुजरात सरकार के बीच हुए समझौते पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते में प्रदेश के किसानों, आम नागरिकों और वैधानिक अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की गई है और राज्य सरकार को तत्काल श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।
विवाद की जड़: नर्मदा पर मध्य प्रदेश का दावा
पटवारी ने बताया कि नर्मदा नदी की कुल लंबाई 1,312 किलोमीटर है, जिसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक प्रवाह मध्य प्रदेश में है। उनके अनुसार, इस भौगोलिक वास्तविकता के आधार पर नर्मदा जल पर पहला अधिकार मध्य प्रदेश की जनता का बनता है। बावजूद इसके, सरदार सरोवर परियोजना का सर्वाधिक बोझ मध्य प्रदेश ने ही उठाया है।
विस्थापन और नुकसान के आँकड़े
पटवारी ने आँकड़े पेश करते हुए कहा कि बांध से प्रभावित 230 गांवों में से 178 गाँव मध्य प्रदेश में हैं, जबकि गुजरात में केवल 19 गाँव प्रभावित हुए। बांध निर्माण के कारण मध्य प्रदेश के लगभग 23,600 परिवार विस्थापित हुए, जबकि गुजरात में यह संख्या करीब 4,000 परिवार रही। मध्य प्रदेश ने सर्वाधिक कृषि भूमि, वन भूमि, आदिवासी परिवारों के विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरणीय क्षति का बोझ उठाया है।
₹7,500 करोड़ का दावा छोड़ा, गुजरात को ₹550 करोड़ देने की सहमति का आरोप
पटवारी के अनुसार, इन नुकसानों के आधार पर पूर्व में हुए समझौते के तहत तत्कालीन राज्य सरकार ने ₹7,669 करोड़ का दावा प्रस्तुत किया था। आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में इस दावे को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया और उलटे गुजरात को लगभग ₹550 करोड़ देने पर सहमति जता दी गई। राज्य सरकार का दावा है कि उसने ₹1,500 करोड़ की देनदारी को घटाकर ₹231 करोड़ में निपटाया और ₹1,268 करोड़ की बचत की — लेकिन कांग्रेस इस तर्क को सिरे से खारिज करती है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही राज्य सरकार पर सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर सवाल उठा रहा है।
2019 की घटना का संदर्भ
पटवारी ने वर्ष 2019 की उस घटना का भी उल्लेख किया, जब आरोपों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सरदार सरोवर बांध को उसकी पूरी क्षमता तक भर दिया गया था। कथित तौर पर इससे मध्य प्रदेश के सैकड़ों गाँव जलमग्न हो गए और प्रदेश को भारी मानवीय एवं आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।
कांग्रेस की मांग: श्वेत पत्र और विधानसभा में चर्चा
पटवारी ने राज्य सरकार से माँग की है कि वह स्पष्ट करे कि ₹7,500 करोड़ के दावे को छोड़कर ₹1,250 से ₹1,500 करोड़ के बीच समझौता किन परिस्थितियों में और किन अधिकारियों की भागीदारी से किया गया। कांग्रेस ने माँग की है कि इस विषय पर श्वेत पत्र जारी किया जाए और मध्य प्रदेश विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराई जाए, ताकि प्रदेश की जनता को पूरी सच्चाई पता चल सके। गौरतलब है कि इतने बड़े वित्तीय समझौते में विधानसभा, विपक्ष या जनता को विश्वास में नहीं लिया गया।