3 अगस्त 2026
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जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति मुर्मु को लिखा पत्र, MP के 1.53 करोड़ आदिवासियों की दुर्दशा उजागर की

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जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति मुर्मु को लिखा पत्र, MP के 1.53 करोड़ आदिवासियों की दुर्दशा उजागर की

सारांश

राष्ट्रपति मुर्मु के पाँच दिवसीय MP दौरे से पहले कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पत्र लिखकर 1.53 करोड़ आदिवासियों की दुर्दशा उजागर की — शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और वनाधिकार पर सवाल उठाए और राज्य सरकार को निर्देश देने की माँग की।

मुख्य बातें

कांग्रेस के MP अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 18 जून 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखा।
मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 1.53 करोड़ , यानी प्रदेश की कुल जनसंख्या का 21 प्रतिशत ।
झाबुआ, अलीराजपुर, धार, मंडला सहित 14 आदिवासी ज़िलों में विकास की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया गया।
आदिवासी क्षेत्रों में साक्षरता दर राज्य औसत से कम; प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी।
पटवारी ने राष्ट्रपति से आदिवासी प्रतिनिधियों से संवाद और राज्य सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया।

कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 18 जून 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर राज्य के 1.53 करोड़ आदिवासियों की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। राष्ट्रपति मुर्मु पाँच दिवसीय मध्य प्रदेश प्रवास पर हैं और पटवारी ने उनसे आग्रह किया है कि वे इस दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करें तथा राज्य सरकार को प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दें।

पत्र में क्या कहा पटवारी ने

पटवारी ने अपने पत्र में लिखा कि देश की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मु का जीवन करोड़ों आदिवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा आदिवासी आबादी वाला राज्य है, जहाँ अनुसूचित जनजाति की आबादी प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 21 प्रतिशत है। संविधान निर्माताओं ने इस समुदाय को विशेष संरक्षण देने की परिकल्पना की थी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।

किन ज़िलों की स्थिति सबसे चिंताजनक

पत्र में झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, मंडला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और शिवपुरी — इन चौदह आदिवासी अंचलों का विशेष उल्लेख करते हुए पटवारी ने कहा कि इन क्षेत्रों में विकास की तस्वीर बेहद चिंताजनक बनी हुई है। गौरतलब है कि ये वही ज़िले हैं जो दशकों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव की शिकायत करते आए हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार की त्रासदी

कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में कहा कि आदिवासी समुदाय की साक्षरता दर राज्य की औसत साक्षरता दर से काफी कम है। आदिवासी अंचलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी है। रोज़गार के अवसरों के अभाव में आदिवासी युवा पलायन को मजबूर हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार अनुसूचित जनजाति समुदाय स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के अधिकांश मानकों पर देश के सबसे अधिक वंचित सामाजिक समूहों में शुमार है।

अपराध और वनाधिकार के मुद्दे

पटवारी ने यह भी रेखांकित किया कि आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं के विरुद्ध अपराध, मानव तस्करी, भूमि विवाद, वनाधिकार से जुड़े संघर्ष और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी जैसी समस्याएँ लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि अनेक मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय पाने के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है।

राष्ट्रपति से क्या माँग की गई

पटवारी ने राष्ट्रपति मुर्मु से अनुरोध किया है कि वे अपने मध्य प्रदेश प्रवास के दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद करें। साथ ही राज्य सरकार को इन समस्याओं पर प्रभावी और त्वरित कार्यवाही के लिए निर्देशित करें। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति का यह दौरा आदिवासी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए उन्हें संबोधित करना कांग्रेस को नैतिक ऊँचाई देता है। लेकिन असली सवाल यह है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अपने शासनकाल में इन्हीं 14 ज़िलों की स्थिति कितनी बदली थी — यह पत्र उस जवाबदेही से बचता है। आदिवासी विकास की विफलता केवल वर्तमान BJP सरकार की नहीं, बल्कि दशकों की नीतिगत उपेक्षा की कहानी है। राष्ट्रपति के पास संवैधानिक रूप से सीमित कार्यकारी शक्ति है, इसलिए यह पत्र व्यावहारिक दबाव से अधिक प्रतीकात्मक राजनीति है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र क्यों लिखा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पाँच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे से पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उन्हें पत्र लिखकर राज्य के 1.53 करोड़ आदिवासियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार संकट की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने राष्ट्रपति से आदिवासी प्रतिनिधियों से मिलने और राज्य सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया।
मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी कितनी है?
पटवारी के पत्र के अनुसार मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 1.53 करोड़ है, जो प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 21 प्रतिशत है। देश की कुल आदिवासी आबादी का भी एक बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश में निवास करता है।
किन आदिवासी ज़िलों की स्थिति सबसे खराब बताई गई है?
पत्र में झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, मंडला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और शिवपुरी — इन 14 आदिवासी अंचलों में विकास की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया गया है।
आदिवासी क्षेत्रों में कौन-सी प्रमुख समस्याएँ हैं?
पत्र के अनुसार आदिवासी क्षेत्रों में साक्षरता दर राज्य औसत से कम है, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी है, युवा रोज़गार के अभाव में पलायन कर रहे हैं, और महिलाओं के विरुद्ध अपराध, मानव तस्करी, भूमि विवाद तथा वनाधिकार संघर्ष जैसी समस्याएँ भी बनी हुई हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु से क्या माँग की गई है?
जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे अपने मध्य प्रदेश प्रवास के दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद करें। साथ ही राज्य सरकार को इन समस्याओं पर प्रभावी कार्यवाही के लिए निर्देशित करें।
राष्ट्र प्रेस
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