जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति मुर्मु को लिखा पत्र, MP के 1.53 करोड़ आदिवासियों की दुर्दशा उजागर की
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 18 जून 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर राज्य के 1.53 करोड़ आदिवासियों की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। राष्ट्रपति मुर्मु पाँच दिवसीय मध्य प्रदेश प्रवास पर हैं और पटवारी ने उनसे आग्रह किया है कि वे इस दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करें तथा राज्य सरकार को प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दें।
पत्र में क्या कहा पटवारी ने
पटवारी ने अपने पत्र में लिखा कि देश की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मु का जीवन करोड़ों आदिवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा आदिवासी आबादी वाला राज्य है, जहाँ अनुसूचित जनजाति की आबादी प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 21 प्रतिशत है। संविधान निर्माताओं ने इस समुदाय को विशेष संरक्षण देने की परिकल्पना की थी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
किन ज़िलों की स्थिति सबसे चिंताजनक
पत्र में झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, मंडला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और शिवपुरी — इन चौदह आदिवासी अंचलों का विशेष उल्लेख करते हुए पटवारी ने कहा कि इन क्षेत्रों में विकास की तस्वीर बेहद चिंताजनक बनी हुई है। गौरतलब है कि ये वही ज़िले हैं जो दशकों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव की शिकायत करते आए हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार की त्रासदी
कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में कहा कि आदिवासी समुदाय की साक्षरता दर राज्य की औसत साक्षरता दर से काफी कम है। आदिवासी अंचलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी है। रोज़गार के अवसरों के अभाव में आदिवासी युवा पलायन को मजबूर हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार अनुसूचित जनजाति समुदाय स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के अधिकांश मानकों पर देश के सबसे अधिक वंचित सामाजिक समूहों में शुमार है।
अपराध और वनाधिकार के मुद्दे
पटवारी ने यह भी रेखांकित किया कि आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं के विरुद्ध अपराध, मानव तस्करी, भूमि विवाद, वनाधिकार से जुड़े संघर्ष और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी जैसी समस्याएँ लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि अनेक मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय पाने के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है।
राष्ट्रपति से क्या माँग की गई
पटवारी ने राष्ट्रपति मुर्मु से अनुरोध किया है कि वे अपने मध्य प्रदेश प्रवास के दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से सीधा संवाद करें। साथ ही राज्य सरकार को इन समस्याओं पर प्रभावी और त्वरित कार्यवाही के लिए निर्देशित करें। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति का यह दौरा आदिवासी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।