आदिवासी भूमि, अधिकार और सुरक्षा पर जीतू पटवारी का BJP सरकार पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल में 19 जून को कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों को व्यवस्थित रूप से कुचलने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने भूमि हस्तांतरण, शिक्षा, रोजगार, महिला सुरक्षा और वन अधिकारों से जुड़े आँकड़े पेश करते हुए सरकार की नीतियों पर सीधा सवाल उठाया।
आदिवासी भूमि हस्तांतरण का मामला
पटवारी ने कहा कि कानून स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करता है कि गैर-आदिवासी व्यक्ति बिना सक्षम सरकारी अनुमति के आदिवासी भूमि नहीं खरीद सकते। इसके बावजूद, उन्होंने विधानसभा में प्रस्तुत आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 1 लाख 26 हजार हेक्टेयर से अधिक आदिवासी भूमि का हस्तांतरण हो चुका है। उनके अनुसार, जल, जंगल और जमीन के वास्तविक संरक्षक आदिवासी हैं, लेकिन सरकार विकास के नाम पर वनों का विनाश कर रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा लागू किए गए वन अधिकार अधिनियम का मध्य प्रदेश में खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और आदिवासियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
शिक्षा और रोजगार में भ्रष्टाचार के आरोप
पटवारी ने कहा कि आदिवासी छात्रों के लिए संचालित शिक्षा योजनाओं में भारी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने माँग की कि आदिवासी बच्चों को प्राथमिक से लेकर मेडिकल, इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा तक पूरी तरह निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।
रोजगार के मोर्चे पर पटवारी ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित लगभग 1 लाख 53 हजार बैकलॉग पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। उनके अनुसार सरकार जानबूझकर इन पदों को नहीं भर रही, जिससे हजारों योग्य युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता
पटवारी ने विधानसभा में प्रस्तुत आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले वर्षों में प्रदेश से लगभग पौने दो लाख आदिवासी महिलाएँ और युवतियाँ लापता हुई हैं या मानव तस्करी का शिकार बनी हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार 'लाड़ली बहना' योजना का प्रचार करती है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के अनुसार आदिवासियों पर अत्याचार के मामलों में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 53 लाख आदिवासी निवास करते हैं, जो राज्य की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं।
तबादला घोटाले का आरोप
पटवारी ने सरकार पर प्रदेश में बड़े पैमाने पर तबादला उद्योग चलाने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, जिस घोटाले को पहले ₹200 करोड़ का माना जा रहा था, वह अब ₹500 करोड़ के कारोबार में बदल चुका है।
कांग्रेस का वादा और आगे की राह
पटवारी ने ऐलान किया कि कांग्रेस सरकार बनने पर आदिवासी भूमि सौदों, विस्थापन, वन अधिकारों के उल्लंघन, बैकलॉग भर्ती, महिलाओं की सुरक्षा और तबादला घोटालों की निष्पक्ष जाँच कराई जाएगी तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है।