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मोहन यादव पर भूमि खरीद विवाद: कांग्रेस की माँग — निष्पक्ष जाँच के लिए सीएम दें इस्तीफा

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मोहन यादव पर भूमि खरीद विवाद: कांग्रेस की माँग — निष्पक्ष जाँच के लिए सीएम दें इस्तीफा

सारांश

मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव पर कांग्रेस ने भूमि खरीद को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं — दावा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार ने कथित तौर पर 335 एकड़ जमीन अर्जित की, जिसमें से 111 एकड़ सरकारी परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों में है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट जज से न्यायिक जाँच और यादव के इस्तीफे की माँग की है।

मुख्य बातें

कांग्रेस के दावे के अनुसार, मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार और संबंधित कंपनियों ने कथित तौर पर 137 प्लॉट खरीदकर 168 एकड़ जमीन अर्जित की।
कुल भूमि स्वामित्व रिपोर्ट के अनुसार परिवार के पास कथित तौर पर 245 प्लॉट (335 एकड़) जमीन है।
कथित तौर पर 111 एकड़ जमीन सरकारी परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों में खरीदी गई।
कांग्रेस नेता मुकेश नायक का दावा — यादव के पास शिक्षा मंत्री रहते 10 एकड़ थी, अब खबरों के अनुसार 250 एकड़ है।
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफे और सर्वोच्च न्यायालय के सिटिंग जज से न्यायिक जाँच की माँग की।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इन दिनों कथित भूमि खरीद विवाद को लेकर गंभीर राजनीतिक दबाव में हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने 23 जून को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कथित तौर पर 137 प्लॉट खरीदकर 168 एकड़ जमीन अर्जित की। कांग्रेस ने माँग की है कि निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री तत्काल अपना इस्तीफा सौंपें।

मुख्य आरोप और आँकड़े

पटवारी ने कहा कि हाल ही में सामने आया स्टिंग ऑपरेशन 'अद्भुत और अकल्पनीय' था, जिसमें मंत्रियों के कार्यालयों के लेन-देन का विवरण उजागर हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित तौर पर खरीदी गई 111 एकड़ जमीन उन इलाकों में है जो सरकारी परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्र हैं — और पूछा कि क्या यह महज संयोग है। कुल भूमि स्वामित्व रिपोर्ट के हवाले से कांग्रेस का दावा है कि यादव के परिवार और रिश्तेदारों के पास 245 प्लॉट यानी 335 एकड़ जमीन है।

पटवारी ने यह भी माँग की कि सरकार उन सभी परियोजनाओं की भूमि उपयोग परिवर्तन सूची सार्वजनिक करे जहाँ मुख्यमंत्री के परिवार ने जमीन खरीदी, और सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जाँच की घोषणा करे। उन्होंने कहा कि सीएम ने 'धर्मनगरी उज्जैन को जमीन के गोरखधंधे का हिस्सा बना दिया है।'

विपक्ष के नेता और सांसद का पक्ष

राज्य में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि 'ये आरोप नहीं हैं, ये सबूत हैं।' उन्होंने बताया कि यह मामला विधानसभा में भी कई बार उठाया जा चुका है और सरकार हर बार जाँच का आश्वासन देती है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने दावा किया कि जब यादव शिक्षा मंत्री बने थे, तब उनके पास 10 एकड़ जमीन थी, जो अब खबरों के अनुसार 250 एकड़ तक पहुँच गई है। नायक ने यह भी कहा कि यादव के एक विधायक प्रतिनिधि ने हाल ही में बेहद कम समय में 65 एकड़ जमीन खरीदी। उन्होंने कहा कि पिछले 20-25 वर्षों में मध्यप्रदेश में राजनेताओं द्वारा की गई भूमि खरीद पर चल रहे सर्वे के नतीजे 'हैरान करने वाले' हैं।

इस्तीफे की माँग

कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगातार बढ़ रहे हैं और उन्हें दबाया जाता है। उन्होंने कहा कि 'अगर सबूत मिले हैं, तो कार्रवाई भी होनी चाहिए।' पुनिया के अनुसार, मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए निष्पक्ष जाँच संभव नहीं है, इसलिए यादव को कम-से-कम नैतिक आधार पर इस्तीफा सौंप देना चाहिए ताकि जाँच में कोई दखलंदाजी न हो।

आगे क्या होगा

फिलहाल मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से न्यायिक जाँच और भूमि उपयोग परिवर्तन की सूची सार्वजनिक करने की माँग दोहराई है। यह विवाद आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश की राजनीति में केंद्रीय मुद्दा बनने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीति-निर्माण और निजी लाभ के संभावित टकराव का सवाल है। विधानसभा में बार-बार उठाए जाने के बावजूद जाँच न होना यह दर्शाता है कि सत्ता में रहते हुए जवाबदेही की माँग करना कितना कठिन है। कांग्रेस की सुप्रीम कोर्ट जज से जाँच की माँग राजनीतिक रूप से तीखी है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या कोई स्वतंत्र एजेंसी इन दस्तावेज़ी दावों की पड़ताल करती है — या यह विवाद भी विपक्षी बयानबाज़ी की लंबी सूची में दब जाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन यादव पर भूमि खरीद के क्या आरोप हैं?
कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार और संबंधित कंपनियों ने कथित तौर पर 137 प्लॉट खरीदकर 168 एकड़ जमीन अर्जित की। कुल भूमि स्वामित्व रिपोर्ट के अनुसार परिवार के पास 245 प्लॉट यानी 335 एकड़ जमीन होने का दावा किया गया है।
कांग्रेस ने मोहन यादव से इस्तीफे की माँग क्यों की?
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया का तर्क है कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए निष्पक्ष जाँच संभव नहीं है। उनके अनुसार, नैतिक आधार पर यादव को इस्तीफा सौंपना चाहिए ताकि जाँच में कोई दखलंदाजी न हो।
क्या इन आरोपों की कोई जाँच हो रही है?
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार के अनुसार, यह मामला विधानसभा में कई बार उठाया जा चुका है और सरकार हर बार जाँच का आश्वासन देती है, लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई। कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय के सिटिंग जज से न्यायिक जाँच की माँग की है।
कथित तौर पर खरीदी गई जमीन का कितना हिस्सा परियोजना-प्रभावित क्षेत्रों में है?
कांग्रेस के दावे के अनुसार, कुल 168 एकड़ में से कथित तौर पर 111 एकड़ जमीन उन इलाकों में खरीदी गई जो सरकारी परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्र हैं। कांग्रेस ने सरकार से इन परियोजनाओं की भूमि उपयोग परिवर्तन सूची सार्वजनिक करने की माँग की है।
स्टिंग ऑपरेशन में क्या सामने आया?
जीतू पटवारी के अनुसार, हाल ही में हुए स्टिंग ऑपरेशन में मंत्रियों के कार्यालयों के लेन-देन का विवरण उजागर हुआ। उन्होंने इसे 'अद्भुत और अकल्पनीय' बताया और कहा कि इससे मुख्यमंत्री पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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