एमपी सीएम मोहन यादव पर जमीन सौदे के आरोप: भाजपा का बचाव, कांग्रेस की न्यायिक जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के सदस्यों पर लगे जमीन खरीद के आरोपों को लेकर राजनीतिक घमासान बुधवार, 24 जून 2026 को और तेज हो गया। जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री का पुरजोर बचाव किया, वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने इस मामले में न्यायिक जांच की माँग दोहराई।
मंत्री राकेश सिंह का संतुलित बयान
मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा नेता राकेश सिंह ने जबलपुर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यदि किसी संपत्ति या जमीन लेनदेन में गड़बड़ी के सबूत हैं, तो जांच पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि गलत तरीके से संपत्ति अर्जित की गई है, तो वह सामने आनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे का इस्तेमाल केवल बदनामी या गलत प्रचार के लिए नहीं होना चाहिए — तथ्यों को जनता के सामने रखा जाना चाहिए।
आरोपों का स्वरूप
कथित तौर पर आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिजनों ने उन स्थानों पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी है, जहाँ बाद में विभिन्न सरकारी योजनाओं को मंजूरी दी गई। यह विवाद पिछले दो दिनों में तेजी से उभरा है — कांग्रेस ने पहले भोपाल और फिर नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में यह मुद्दा उठाया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चूँकि मामला एक सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों से जुड़ा है, इसलिए निष्पक्ष न्यायिक जांच अनिवार्य है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे विपक्ष का राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियान बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंगलवार रात एक वीडियो संदेश जारी कर आरोपों को भ्रामक करार दिया और मुख्यमंत्री का बचाव किया। बुधवार को कई वरिष्ठ मंत्री और भाजपा नेता भी मुख्यमंत्री के समर्थन में सामने आए।
सीएम मोहन यादव की चुप्पी
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अब तक इस पूरे विवाद पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपना रही है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल के भीतर से भी एक मंत्री का यह कहना कि 'जांच पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए', राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस के इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के बाद यह देखना होगा कि क्या कोई जांच एजेंसी स्वतः संज्ञान लेती है या न्यायालय में कोई याचिका दायर होती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में आने वाले हफ्तों में और गर्म हो सकता है।