उज्जैन जमीन खरीदी विवाद: मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस का हंगामा, CM मोहन यादव से जवाब की माँग
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार, 20 जुलाई को उज्जैन जमीन खरीदी मामले पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के विधायकों ने जमकर हंगामा किया और स्थगन प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे पर चर्चा कराने की माँग की। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद कांग्रेस विधायक सदन से बाहर निकल गए और नारेबाजी की।
मुख्य घटनाक्रम
मानसून सत्र की शुरुआत से ही कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाया। दल की ओर से उज्जैन जमीन खरीदी मामले पर स्थगन प्रस्ताव लाया गया, जिसमें सदन की कार्यवाही रोककर इस विषय पर विस्तृत चर्चा की माँग की गई। इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने प्रक्रियागत व्यवस्था का हवाला देते हुए स्थगन को अस्वीकार किया, जिसके बाद कांग्रेस और BJP विधायकों के बीच सदन के भीतर तीखी बहस छिड़ गई।
कांग्रेस की सदन से वापसी
स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा न होने से नाराज कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए। विधानसभा परिसर के बाहर उन्होंने सरकार पर पारदर्शिता से बचने का आरोप लगाया और कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने व्यवस्था की आड़ में जवाबदेही से मुँह मोड़ा है।
नेता प्रतिपक्ष का बयान
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव पर उज्जैन में जमीन खरीदी को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं और उन्हें इन आरोपों का सार्वजनिक जवाब देना चाहिए। सिंघार ने यह भी कहा कि उज्जैन में आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर यदि वहाँ घोटाले के आरोप उठ रहे हैं, तो मुख्यमंत्री की चुप्पी राज्य की छवि को नुकसान पहुँचा रही है।
सरकार की स्थिति
संसदीय कार्य मंत्री ने स्थगन प्रस्ताव को प्रक्रियागत आधार पर अस्वीकार किया। सत्तारूढ़ BJP की ओर से अभी तक उज्जैन जमीन खरीदी के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियाँ जोरों पर हैं और भूमि अधिग्रहण से जुड़े किसी भी विवाद का राजनीतिक असर व्यापक हो सकता है। कांग्रेस के मानसून सत्र में आक्रामक रुख को देखते हुए यह मामला आने वाले दिनों में सदन में और गर्माने की संभावना है।