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उज्जैन जमीन घोटाला: सिंघार का आरोप — CM मोहन यादव परिवार ने दबाई 253 एकड़ ज़मीन

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उज्जैन जमीन घोटाला: सिंघार का आरोप — CM मोहन यादव परिवार ने दबाई 253 एकड़ ज़मीन

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उज्जैन में प्रदेश के इतिहास के सबसे बड़े जमीन घोटाले का आरोप लगाया है — दावा है कि CM मोहन यादव के परिवार ने सरकारी विकास योजनाओं की अंदरूनी जानकारी के आधार पर 253 एकड़ ज़मीन दबाई और फिर सड़कों का नक्शा उन्हीं प्लॉटों के पास से निकाल दिया।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 23 जून 2025 को आरोप लगाया कि उज्जैन में मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है।
आरोप के अनुसार, CM मोहन यादव के परिवार ने कुल 253 एकड़ से अधिक ज़मीन अपने नाम कराई — जिसमें 85 एकड़ मंत्री रहते और 168 एकड़ CM बनने के बाद।
सिंघार का दावा है कि मई 2023 के मास्टर प्लान और दिसंबर 2023 के बाद सड़कों का नक्शा उन्हीं भूखंडों के पास से निकाला गया जो परिवार ने पहले खरीद रखे थे।
2024-25 में कथित तौर पर 137 से अधिक प्लॉट और 168 एकड़ अतिरिक्त ज़मीन खरीदी गई।
सिंघार ने CM मोहन यादव से तत्काल इस्तीफे की माँग की है; BJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 23 जून 2025 को आरोप लगाया कि धार्मिक नगरी उज्जैन में प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने सरकारी विकास योजनाओं की अंदरूनी जानकारी का लाभ उठाकर 253 एकड़ से अधिक ज़मीन पहले ही अपने नाम कर ली। ये आरोप कथित तौर पर मीडिया रिपोर्टों के हवाले से सोशल मीडिया पर साझा किए गए हैं।

आरोपों का मूल — क्या है पूरा मामला

सिंघार के अनुसार, मोहन यादव जब 2021 से 2023 के बीच शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री थे, तब उन्हें उज्जैन में प्रस्तावित सड़कों और बुनियादी ढाँचे की योजनाओं की पूर्व जानकारी थी। इससे पहले वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रह चुके थे। सिंघार का आरोप है कि इसी अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाते हुए मंत्री रहते हुए उन्होंने 44 प्लॉट और 85 एकड़ ज़मीन अपने नाम कराई, जबकि परिवार के नाम पर पहले से 82 एकड़ ज़मीन दर्ज थी।

नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, मई 2023 में उज्जैन का मास्टर प्लान लाया गया और दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री पद संभालते ही सड़कों और हाईवे का नक्शा उन्हीं भूखंडों के पास से निकाल दिया गया जो परिवार पहले ही खरीद चुका था।

2024-25 में और तेज़ हुई खरीदारी — आरोप

सिंघार का दावा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद 2024 और 2025 में इस कथित खरीदारी में और तेज़ी आई। इन दो वर्षों में अकेले 137 से अधिक प्लॉट और 168 एकड़ अतिरिक्त ज़मीन खरीदी गई। उन्होंने इसे 'इनसाइडर ट्रेडिंग', 'पद का दुरुपयोग' और 'भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा' करार दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में बेरोज़गारी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। सिंघार ने तीखे शब्दों में कहा कि 'पूरी सरकार एक परिवार की रियल एस्टेट एजेंसी बनकर काम कर रही है।'

सिंघार की माँग — CM दें इस्तीफा

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से तत्काल इस्तीफे की माँग की है। उन्होंने कहा, 'यह विकास नहीं, सत्ता की आड़ में किया गया खुला खेल है। मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।' उनका कहना है कि मध्य प्रदेश की जनता इस कथित लूट को बर्दाश्त नहीं करेगी।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे क्या

गौरतलब है कि ये सभी आरोप कथित तौर पर विपक्षी दल की ओर से लगाए गए हैं और अभी तक मुख्यमंत्री मोहन यादव या भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है। आलोचकों का कहना है कि इस मामले की स्वतंत्र जाँच ज़रूरी है ताकि तथ्यों की पुष्टि हो सके। यह देखना होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा में कितनी तीव्रता से उठाता है और क्या कोई न्यायिक या प्रशासनिक जाँच की माँग आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये अभी तक केवल विपक्ष के राजनीतिक बयान हैं — न कोई FIR दर्ज हुई है, न कोई न्यायिक जाँच शुरू। असली परीक्षा यह है कि क्या विपक्ष इन दावों को रजिस्ट्री दस्तावेज़ों और मास्टर प्लान संशोधनों के ठोस साक्ष्य के साथ सार्वजनिक करता है। मध्य प्रदेश में 'अंदरूनी जानकारी से ज़मीन खरीद' के आरोप नए नहीं हैं — लेकिन इस बार जो पैमाना बताया जा रहा है वह असाधारण है और स्वतंत्र जाँच की माँग को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन जमीन घोटाला क्या है?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अनुसार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार ने उज्जैन में सरकारी विकास योजनाओं की अंदरूनी जानकारी का उपयोग कर 253 एकड़ से अधिक ज़मीन पहले खरीद ली और बाद में सड़कों व हाईवे का नक्शा उन्हीं भूखंडों के पास से निकाल दिया। ये आरोप कथित तौर पर मीडिया रिपोर्टों के आधार पर लगाए गए हैं।
उमंग सिंघार ने मोहन यादव पर क्या-क्या आरोप लगाए?
सिंघार का आरोप है कि मोहन यादव ने 2021-23 में मंत्री रहते 44 प्लॉट और 85 एकड़ ज़मीन अपने नाम कराई, दिसंबर 2023 में CM बनने के बाद मास्टर प्लान में बदलाव कर सड़कें उन्हीं ज़मीनों के पास से निकाली गईं, और 2024-25 में 137 से अधिक प्लॉट व 168 एकड़ और खरीदी गई। उन्होंने इसे इनसाइडर ट्रेडिंग और पद का दुरुपयोग बताया।
क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इन आरोपों का जवाब दिया है?
अभी तक मुख्यमंत्री मोहन यादव या भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक खंडन या प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और आगे की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।
उज्जैन मास्टर प्लान और इस विवाद का क्या संबंध है?
सिंघार के अनुसार मई 2023 में उज्जैन का मास्टर प्लान लाया गया और दिसंबर 2023 में CM बनते ही सड़कों व हाईवे का नक्शा उन्हीं भूखंडों के पास से निकाल दिया गया जो यादव परिवार पहले ही खरीद चुका था। आरोप है कि यह योजना शहर के विकास के लिए नहीं, बल्कि पारिवारिक रियल एस्टेट हितों को फायदा पहुँचाने के लिए री-डिज़ाइन की गई।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की तैयारी में है। आलोचकों की माँग है कि रजिस्ट्री दस्तावेज़ों और मास्टर प्लान संशोधनों की स्वतंत्र जाँच हो। अभी तक कोई FIR या न्यायिक जाँच शुरू नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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