उज्जैन जमीन घोटाला: सिंघार का आरोप — CM मोहन यादव परिवार ने दबाई 253 एकड़ ज़मीन
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 23 जून 2025 को आरोप लगाया कि धार्मिक नगरी उज्जैन में प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने सरकारी विकास योजनाओं की अंदरूनी जानकारी का लाभ उठाकर 253 एकड़ से अधिक ज़मीन पहले ही अपने नाम कर ली। ये आरोप कथित तौर पर मीडिया रिपोर्टों के हवाले से सोशल मीडिया पर साझा किए गए हैं।
आरोपों का मूल — क्या है पूरा मामला
सिंघार के अनुसार, मोहन यादव जब 2021 से 2023 के बीच शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री थे, तब उन्हें उज्जैन में प्रस्तावित सड़कों और बुनियादी ढाँचे की योजनाओं की पूर्व जानकारी थी। इससे पहले वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रह चुके थे। सिंघार का आरोप है कि इसी अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाते हुए मंत्री रहते हुए उन्होंने 44 प्लॉट और 85 एकड़ ज़मीन अपने नाम कराई, जबकि परिवार के नाम पर पहले से 82 एकड़ ज़मीन दर्ज थी।
नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, मई 2023 में उज्जैन का मास्टर प्लान लाया गया और दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री पद संभालते ही सड़कों और हाईवे का नक्शा उन्हीं भूखंडों के पास से निकाल दिया गया जो परिवार पहले ही खरीद चुका था।
2024-25 में और तेज़ हुई खरीदारी — आरोप
सिंघार का दावा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद 2024 और 2025 में इस कथित खरीदारी में और तेज़ी आई। इन दो वर्षों में अकेले 137 से अधिक प्लॉट और 168 एकड़ अतिरिक्त ज़मीन खरीदी गई। उन्होंने इसे 'इनसाइडर ट्रेडिंग', 'पद का दुरुपयोग' और 'भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा' करार दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में बेरोज़गारी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। सिंघार ने तीखे शब्दों में कहा कि 'पूरी सरकार एक परिवार की रियल एस्टेट एजेंसी बनकर काम कर रही है।'
सिंघार की माँग — CM दें इस्तीफा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से तत्काल इस्तीफे की माँग की है। उन्होंने कहा, 'यह विकास नहीं, सत्ता की आड़ में किया गया खुला खेल है। मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।' उनका कहना है कि मध्य प्रदेश की जनता इस कथित लूट को बर्दाश्त नहीं करेगी।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे क्या
गौरतलब है कि ये सभी आरोप कथित तौर पर विपक्षी दल की ओर से लगाए गए हैं और अभी तक मुख्यमंत्री मोहन यादव या भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है। आलोचकों का कहना है कि इस मामले की स्वतंत्र जाँच ज़रूरी है ताकि तथ्यों की पुष्टि हो सके। यह देखना होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा में कितनी तीव्रता से उठाता है और क्या कोई न्यायिक या प्रशासनिक जाँच की माँग आगे बढ़ती है।