23 सितंबर 2026
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उमंग सिंघार का आरोप: उज्जैन में RDSS योजना के तहत ट्रांसफार्मर लगाने में ₹36 करोड़ का भ्रष्टाचार

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उमंग सिंघार का आरोप: उज्जैन में RDSS योजना के तहत ट्रांसफार्मर लगाने में ₹36 करोड़ का भ्रष्टाचार

सारांश

मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में RDSS योजना के तहत ट्रांसफार्मर लगाने में ₹36 करोड़ की कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया है। जहाँ ज़रूरत नहीं, वहाँ दो-दो ट्रांसफार्मर और जहाँ ज़रूरत थी, वहाँ कुछ नहीं — यह सवाल अब राजनीतिक गलियारों में गूँज रहा है।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 23 सितंबर 2026 को उज्जैन में RDSS योजना के तहत ट्रांसफार्मर लगाने में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
कथित अनियमितता में करीब ₹36 करोड़ के सरकारी धन की बर्बादी का दावा किया गया है।
आरोप है कि ज़रूरतमंद गाँवों में ट्रांसफार्मर नहीं लगाए गए, जबकि अनावश्यक स्थानों पर दो-दो ट्रांसफार्मर लगाए गए।
सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सीधे सवाल किया — यह भ्रष्टाचार किसके संरक्षण में चल रहा है?
राज्य सरकार ने हाल ही में 2,800 मेगावाट थर्मल पावर खरीदने का निर्णय लिया है, जो 2037 तक की मांग पूरी करेगा।

मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 23 सितंबर 2026 को एक बयान जारी कर मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में केंद्र सरकार की संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत बिजली ट्रांसफार्मर लगाने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनके अनुसार इस कथित अनियमितता में करीब ₹36 करोड़ का सरकारी धन दांव पर है।

क्या हैं आरोप

सिंघार ने आरोप लगाया कि उज्जैन जिले में RDSS योजना के क्रियान्वयन में बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन गाँवों में ट्रांसफार्मर की वास्तविक आवश्यकता थी, वहाँ नहीं लगाए गए, जबकि कई ऐसे स्थानों पर जहाँ ज़रूरत नहीं थी, वहाँ दो-दो ट्रांसफार्मर लगाए गए। इस पूरी प्रक्रिया में करीब ₹36 करोड़ रुपये का व्यय दर्शाया गया है।

सिंघार का सीधा सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने तीखे शब्दों में कहा, 'जब मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले में ही भ्रष्टाचार और सरकारी धन की इस तरह बर्बादी हो रही है, तो पूरे मध्यप्रदेश का क्या हाल होगा?' उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सीधे सवाल किया कि ट्रांसफार्मर लगाने के नाम पर यह भ्रष्टाचार का खेल आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है।

RDSS योजना की पृष्ठभूमि

भारत सरकार की संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) विद्युत आपूर्ति के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई गई है। इसी योजना के तहत राज्यों में ट्रांसफार्मर लगाने सहित विद्युत अवसंरचना से जुड़े कार्य कराए जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार लगातार दावा करती रही है कि राज्य की बिजली व्यवस्था इतनी सशक्त हो गई है कि दिल्ली मेट्रो भी मध्य प्रदेश की बिजली से संचालित हो रही है।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने हाल ही में विद्युत व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 2,800 मेगावाट थर्मल पावर खरीदने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि इससे प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा माँग पूरी होगी और वर्ष 2037 तक की अनुमानित आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। हालाँकि, सिंघार के आरोपों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में लगाए गए हैं जब मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्ष के बीच प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर तनातनी बनी हुई है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इन आरोपों का जवाब देते हैं या जाँच का आदेश देते हैं। विपक्ष के इस हमले का असर आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सिंघार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और सरकार ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया — जो अपने आप में एक सवाल है। असली परीक्षा यह है कि क्या कोई जाँच आदेश होती है या यह मामला विधानसभा की आरोप-प्रत्यारोप की लंबी फेहरिस्त में खो जाता है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमंग सिंघार ने उज्जैन में क्या आरोप लगाए हैं?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि उज्जैन में RDSS योजना के तहत ट्रांसफार्मर लगाने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, जिसमें करीब ₹36 करोड़ की अनियमितता का दावा है। उनका कहना है कि ज़रूरतमंद गाँवों में ट्रांसफार्मर नहीं लगाए गए, जबकि अनावश्यक स्थानों पर दो-दो ट्रांसफार्मर लगाए गए।
RDSS योजना क्या है और यह विवाद क्यों है?
संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) भारत सरकार की एक केंद्रीय योजना है जिसका उद्देश्य विद्युत वितरण के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करना और वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता सुधारना है। विवाद इसलिए है क्योंकि इसी योजना के तहत उज्जैन में ट्रांसफार्मर लगाने में कथित अनियमितताएँ सामने आई हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का इस मामले में क्या कनेक्शन है?
उज्जैन मुख्यमंत्री मोहन यादव का गृह जिला है। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने इसी बात को रेखांकित करते हुए सवाल उठाया है कि जब मुख्यमंत्री के अपने जिले में ही इस तरह का भ्रष्टाचार होता है, तो पूरे मध्यप्रदेश की स्थिति क्या होगी।
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में बिजली के क्षेत्र में क्या बड़ा फैसला लिया?
राज्य सरकार ने हाल ही में 2,800 मेगावाट थर्मल पावर खरीदने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि इससे प्रदेश की बढ़ती विद्युत माँग पूरी होगी और वर्ष 2037 तक की अनुमानित आवश्यकता को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
इस विवाद में अब आगे क्या हो सकता है?
अभी तक सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा में उठाता है या स्वतंत्र जाँच की माँग तेज़ होती है, तो सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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