अयोध्या फंड गबन और उज्जैन जमीन विवाद: कांग्रेस के पवन खेड़ा बोले — यह अंतरराष्ट्रीय मामला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 24 जून को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अयोध्या के दान-निधि गबन और उज्जैन की जमीन खरीद विवाद को 'अंतरराष्ट्रीय स्तर का मामला' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्यमंत्री तीर्थस्थलों की दान-संपदा और सार्वजनिक भूमि का दुरुपयोग कर रहे हैं।
मुख्य आरोप: आस्था के साथ धोखा
खेड़ा ने कहा, 'यह मामला सिर्फ स्थानीय और राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मामला है। लोग अपना पेट काटकर और पैसा बचाकर तीर्थस्थलों पर जाते हैं और आस्था के साथ दानपेटी में पैसे डालते हैं। इन पैसों को लूटना लोगों की आस्था के साथ धोखा है — और यह अयोध्या में हुआ है।' उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या का मंदिर सीधे संघ की देखरेख में है, और मध्य प्रदेश में भी संघ समर्थित सरकार है — दोनों जगह की स्थिति जनता के सामने है।
मोहन यादव पर सीधे आरोप
उज्जैन जमीन विवाद पर खेड़ा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को सीधे निशाने पर लिया। उनके अनुसार, 'उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ आने वाला है। सभी फाइलें मुख्यमंत्री की जानकारी से गुजरती हैं और वे नक्शों व मास्टरप्लान में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इस अधिकार और कलम का दुरुपयोग किया गया है।'
खेड़ा के मुताबिक, मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद में उनके परिवार ने सैकड़ों एकड़ जमीन खरीदी। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद 168 एकड़ में से 111 एकड़ जमीन उस क्षेत्र में खरीदी गई जहाँ सिंहस्थ कुंभ आयोजित होना है। इसके अलावा पांड्याखेड़ी में 18 एकड़ और 2035 के मास्टरप्लान वाले क्षेत्रों में भी जमीन खरीदने के आरोप लगाए गए।
जीतू पटवारी का बयान: 30 घंटे बाद भी कोई जवाब नहीं
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने BJP, BJP अध्यक्ष, प्रदेश इकाई और मोहन यादव से सार्वजनिक रूप से सवाल पूछे थे, लेकिन 30 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया। पटवारी ने कहा, 'अगर भाजपा जवाब नहीं दे रही, तो दाल में कुछ काला है।' उन्होंने आरोप लगाया कि 'अयोध्या में चंदा चोरी और महाकाल में जमीन लूट — यह भाजपा का नया मॉडल बन गया है।'
मथुरा-काशी का संदर्भ: आगे और विवाद की आशंका
खेड़ा ने संकेत दिया कि यह विवाद यहीं नहीं रुकेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या और उज्जैन तो 'झांकी' मात्र हैं — मथुरा और काशी में भी कॉरिडोर बन रहे हैं और वहाँ से भी इसी तरह की 'लूट की तैयारी' है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कार्रवाई की उम्मीद नहीं जताई और तंज कसते हुए कहा कि वे विदेश में व्यस्त रहते हैं जबकि उनके मुख्यमंत्री जमीनें और दान का सोना-चाँदी निगल जाते हैं।
आगे क्या
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को संसद और न्यायालय दोनों स्तरों पर उठाने की तैयारी में है। BJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के बीच यह विवाद राजनीतिक रूप से और तीखा होने की संभावना है।