अरुण यादव का बड़ा हमला: अयोध्या में ₹200 करोड़ की गड़बड़ी, महाकाल क्षेत्र में जमीन लूट के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने 2 जुलाई 2026 को भोपाल से एक वीडियो जारी कर केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि अयोध्या से लेकर उज्जैन के महाकाल क्षेत्र तक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का सिलसिला जारी है। यादव के ये आरोप मंदिर निधि, भूमि आवंटन और प्रतियोगी परीक्षाओं — तीनों मोर्चों पर एक साथ केंद्रित हैं।
अयोध्या में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप
अरुण यादव ने आरोप लगाया कि अयोध्या में श्रीराम के नाम पर कथित तौर पर ₹200 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं। उन्होंने कहा कि 'हम सबके आराध्य श्रीराम के नाम पर लूट की जा रही है।' यह आरोप उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक किए। गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विकास कार्यों को लेकर विपक्ष पहले भी सवाल उठाता रहा है।
महाकाल क्षेत्र में भूमि आवंटन पर सवाल
यादव ने दावा किया कि उज्जैन में महाकाल क्षेत्र की कीमती सरकारी जमीनें बेहद कम मूल्य पर कई लोगों को आवंटित की गई हैं। उन्होंने विशेष रूप से आरोप लगाया कि यह कथित भूमि आवंटन मुख्यमंत्री मोहन यादव के संरक्षण में हो रहा है। इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं का मुद्दा
कांग्रेस नेता ने युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप है कि NEET, UPSC और CBSE की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं में घपले किए जा रहे हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर छात्र आंदोलन और न्यायिक हस्तक्षेप की माँग उठती रही है।
कांग्रेस की रणनीति और राहुल गांधी का नेतृत्व
अरुण यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में व्यापक स्तर पर उठा रही है। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेता एकजुट होकर जनता के सहयोग से कथित भ्रष्टाचार, भूमि घोटालों और युवाओं के मुद्दों के खिलाफ संघर्ष करेंगे। यादव ने रामभक्तों और देश-प्रदेश के युवाओं से अपील की कि वे इस अभियान में कांग्रेस का साथ दें।
आगे क्या होगा
अरुण यादव के ये आरोप विधानसभा सत्र से पहले विपक्ष की रणनीतिक सक्रियता के संकेत देते हैं। यदि कांग्रेस इन मुद्दों को औपचारिक शिकायत या विधायी प्रश्न के रूप में उठाती है, तो सरकार को जवाब देना होगा। फिलहाल ये सभी आरोप कथित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।