2 अगस्त 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी का BJP पर बड़ा हमला, बोले — 'सारे चंदा चोर भाजपा में'

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी का BJP पर बड़ा हमला, बोले — 'सारे चंदा चोर भाजपा में'

सारांश

कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर BJP पर सीधा निशाना साधा — ₹2 करोड़ की जमीन 10 मिनट में ₹18 करोड़ में बिकने और सोने-चाँदी पिघलाकर बेचने के आरोप लगाए। साथ ही चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के इस्तीफों पर प्रधानमंत्री मोदी से जवाबदेही माँगी।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने 2 अगस्त को राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर BJP को आड़े हाथों लिया।
दावा: ₹2 करोड़ की जमीन मात्र 10 मिनट में ₹18 करोड़ में बेची गई; 7 भूमि सौदों में सर्किल रेट से 17 गुना अधिक भुगतान।
आरोप: सोने-चाँदी पिघलाकर बेचा गया और धनराशि शेयर बाज़ार में लगाई गई।
ट्रस्ट पदाधिकारियों — चंपत राय , अनिल मिश्रा , गोपाल राव — के इस्तीफे पर PM मोदी से जवाबदेही माँगी।
तिवारी ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा में शंकराचार्यों को आमंत्रित न करना परंपरा के विरुद्ध था।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने 2 अगस्त को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। तिवारी ने दावा किया कि यह चोरी मंदिर के निर्माण के बाद नहीं, बल्कि शिलापूजन के समय से ही शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा, 'मैं ये नहीं कहता कि भाजपा में सभी चंदा चोर हैं, लेकिन बहुत जिम्मेदारी से कहता हूं कि सारे चंदा चोर भाजपा में हैं।'

मुख्य आरोप और दावे

तिवारी ने आरोप लगाया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के दौरान ₹2 करोड़ में खरीदी गई जमीन को मात्र 10 मिनट बाद ₹18 करोड़ में बेच दिया गया। उनके अनुसार, मंदिर निर्माण के दौरान सात बड़े भूमि सौदे हुए, जिनमें सर्किल रेट से 17 गुना अधिक राशि का भुगतान किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर के लिए दान में आए सोने-चाँदी को पिघलाकर बेचा गया और यह धनराशि शेयर बाज़ार में लगाई गई।

ट्रस्ट गठन और जवाबदेही पर सवाल

तिवारी ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, इसलिए किसी भी अनियमितता की जवाबदेही प्रधानमंत्री की बनती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सब कुछ सही था, तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों — चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव — ने इस्तीफा क्यों दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट में साधु-संतों को बाहर कर भाजपा और संघ से जुड़े लोगों को शामिल किया गया।

प्राण प्रतिष्ठा पर विवादित बयान

तिवारी ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव की निकटता के कारण प्रधानमंत्री मोदी ने अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करवाई, जिसे उन्होंने 'अशुभ काम' बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस समारोह में शंकराचार्यों को आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि परंपरा के अनुसार पूजा उन्हीं से करवानी चाहिए थी। तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि राम मंदिर भाजपा ने नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के परिणामस्वरूप बना।

भाजपा की नीयत पर सवाल

तिवारी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि वे 1985-90 के बीच उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री रहे हैं और अवध क्षेत्र के निवासी होने के नाते उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को करीब से देखा है। उनका आरोप था कि भाजपा कभी नहीं चाहती थी कि मंदिर वास्तव में बने — वह केवल इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती रही। उन्होंने कहा कि 'करोड़ों लोगों की आस्था पर डकैती हुई' और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों के इस्तीफों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें से अधिकांश दावे — जमीन सौदे, सोना-चाँदी की बिक्री, शेयर बाज़ार में निवेश — अभी तक किसी स्वतंत्र जाँच या न्यायिक प्रक्रिया से सत्यापित नहीं हुए हैं। गौरतलब है कि ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफों ने इन सवालों को एक राजनीतिक बहस से आगे ले जाकर शासन-जवाबदेही के दायरे में ला दिया है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर बयानबाज़ी पर केंद्रित रहती है, जबकि असली सवाल यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र लेखापरीक्षा (ऑडिट) क्यों सार्वजनिक नहीं की गई — यह पारदर्शिता का अभाव ही विपक्षी आरोपों को राजनीतिक ऑक्सीजन देता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रमोद तिवारी ने राम मंदिर को लेकर BJP पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के दौरान ₹2 करोड़ की जमीन 10 मिनट में ₹18 करोड़ में बेची गई और सात भूमि सौदों में सर्किल रेट से 17 गुना अधिक भुगतान हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि दान में आए सोने-चाँदी को पिघलाकर बेचा गया और पैसा शेयर बाज़ार में लगाया गया।
राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने इस्तीफा क्यों दिया?
तिवारी ने इन इस्तीफों को कथित अनियमितताओं का संकेत बताया और पूछा कि यदि सब कुछ ठीक था तो इन पदाधिकारियों ने पद क्यों छोड़ा। इस्तीफों के आधिकारिक कारण अभी तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर तिवारी ने क्या विवादित बात कही?
तिवारी ने कहा कि लोकसभा चुनाव की नज़दीकी के कारण PM मोदी ने अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करवाई, जो उनके अनुसार 'अशुभ' था। उन्होंने यह भी कहा कि इस समारोह में शंकराचार्यों को आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि परंपरा के अनुसार पूजा उन्हीं से करवानी चाहिए थी।
क्या राम मंदिर BJP ने बनवाया था?
तिवारी के अनुसार राम मंदिर भाजपा ने नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के परिणामस्वरूप बना। उन्होंने दावा किया कि BJP कभी नहीं चाहती थी कि मंदिर वास्तव में बने — वह केवल इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती रही।
प्रमोद तिवारी का राम जन्मभूमि आंदोलन से क्या संबंध है?
तिवारी ने बताया कि वे अवध क्षेत्र के निवासी हैं और 1985-90 के बीच उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री रहे, जिस दौरान उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को करीब से देखा। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने अपने बयानों को विश्वसनीय बताया।
राष्ट्र प्रेस
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