राम मंदिर चढ़ावा चोरी: महाराष्ट्र में सत्याग्रह का ऐलान, BJP-कांग्रेस में तीखी जुबानी जंग
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी जांच के बीच महाराष्ट्र की राजनीति भी तेज हो गई है। 7 जुलाई को महाराष्ट्र कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सत्याग्रह करने का ऐलान कर दिया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष खुलकर आमने-सामने आ गए। रोज़ाना नए खुलासों के बीच यह विवाद अब राज्य की राजनीति का केंद्रबिंदु बनता जा रहा है।
भाजपा का रुख: योगी के बयान को देश की मानसिकता बताया
भाजपा एमएलसी श्रीकांत भारतीय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'सपा-कांग्रेस कब से राम के हितैषी हो गई, यह राम का पैसा कब्रिस्तान में लगाते थे।' श्रीकांत भारतीय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने जो कहा है, वह देश की सवा सौ करोड़ जनता की मानसिकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब राम मंदिर निर्माण का संघर्ष चल रहा था, तब समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस और महाराष्ट्र में शिवसेना — इनमें से किसी भी दल का कोई नेता समर्थन में नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भी निगरानी कर रहा है। जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें कानून के अनुसार सजा मिलेगी।
एनसीपी का संतुलित रुख: राजनीति से बचने की अपील
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता जीशान सिद्दीकी ने कहा कि आस्था के किसी भी स्थान पर यदि घोटाला या गड़बड़ी सामने आती है, तो कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर न सपा और न कांग्रेस — किसी को भी राजनीति नहीं करनी चाहिए। जो भी इसके पीछे है, उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए।
सिद्दीकी ने मुंबई में बारिश जनित घटनाओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक मासूम बच्चे और एक व्यक्ति की मैनहोल में गिरने से मौत जैसी घटनाओं में जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्वीकार किया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर जब शिवसेना (UBT) का शासन था, तब भी बारिश की तैयारी पर्याप्त नहीं थी।
कांग्रेस का हमला: SIT जांच को बताया दिखावा
कांग्रेस नेता भाई जगताप ने राम मंदिर मामले पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग लूट कर रहे हैं, वे देश की आस्था को लूट रहे हैं। उनके अनुसार, 200 किलो चांदी का अब तक कोई पता नहीं चला है और लोगों द्वारा भारी मात्रा में दान किया गया सोना भी लापता है।
जगताप ने आरोप लगाया कि चंपत राय और अन्य संबंधित लोगों को बचाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अयोध्या जाना चाहते थे तो उन्हें कथित तौर पर नजरबंद कर लिया गया। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री और दिल्ली से कोई बड़ा मंत्री इस विषय पर मौन हैं, और एसआईटी जांच महज दिखावा है। महाराष्ट्र कांग्रेस अब इस मुद्दे पर प्रदर्शन करेगी।
वक्फ बोर्ड विवाद भी गरमाया
इसी बीच मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने का मुद्दा भी महाराष्ट्र की राजनीति में उठा। भाजपा एमएलसी श्रीकांत भारतीय ने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कोई भी बोर्ड का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। उन्होंने कांग्रेस की आपत्ति को 'तुष्टिकरण की राजनीति' करार दिया।
वहीं, एनसीपी नेता जीशान सिद्दीकी ने व्यक्तिगत मत देते हुए कहा कि जिस धर्म की संस्था हो, उसमें उसी समुदाय के लोगों का होना बेहतर है — लेकिन जो भी फैसला होगा, वह उन्हें मंजूर है।
आगे क्या
एसआईटी जांच जारी है और PMO की निगरानी के दावों के बीच यह देखना होगा कि आरोपियों के खिलाफ कब और क्या ठोस कार्रवाई होती है। महाराष्ट्र कांग्रेस के सत्याग्रह की घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।