राम मंदिर चढ़ावा चोरी: बृजभूषण शरण सिंह बोले — 'जांच रिपोर्ट आने तक बयानबाजी बंद करें'
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के राम मंदिर में हुई कथित चढ़ावा चोरी के मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने 7 जुलाई को अपील की कि जब तक जांच पूरी न हो, किसी को भी इस विषय पर सार्वजनिक बयानबाजी से बचना चाहिए। अयोध्या पुलिस अब तक आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है और आरोपियों के पास से ₹80 लाख से अधिक की नकदी व आभूषण बरामद किए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
6 जुलाई को हुई श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद दो पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। जांच एजेंसियों ने आरोपियों के पास से बरामद नकदी और गहनों की जांच जारी रखी है। मंदिर प्रबंधन की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
बृजभूषण शरण सिंह का रुख
बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिन लोगों का इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है, वे भी अनावश्यक बयान दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, 'मामले की जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट आने दीजिए — अगर उसमें कोई खामी नजर आती है तो हम जरूर बोलेंगे।' उन्होंने अयोध्या के साधु-संतों से भी अनुरोध किया कि वे इस विषय पर अधिक बयानबाजी न करें।
पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने संक्षेप में कहा, 'ये लोग कमजोर नहीं हैं। मैं अधिक नहीं बोलूंगा।' गौरतलब है कि इससे पहले उन्होंने कहा था कि यदि वह पूरी सच्चाई बोलेंगे तो 'संकट में आ जाएंगे' — इस बयान ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दी थी।
सरकार और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया
बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार, इस मामले को राज्य सरकार, केंद्र सरकार और ट्रस्ट — तीनों ने गंभीरता से लिया है। जांच की प्राथमिक जिम्मेदारी अयोध्या पुलिस के पास है और प्रक्रिया जारी है।
विपक्ष का हमला
इस पूरे प्रकरण को लेकर विपक्षी दल लगातार BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साध रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस मामले में बड़े लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है और जांच निष्पक्ष नहीं है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के कई नेता इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं।
आगे क्या
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की दिशा स्पष्ट होगी। ट्रस्ट की ओर से चढ़ावा प्रबंधन की व्यवस्था में सुधार की संभावना भी जताई जा रही है। यह मामला धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही के व्यापक सवाल खड़े करता है।