राम मंदिर चंदा चोरी मामला: बृजभूषण शरण सिंह बोले — 'पहले दिन से खेल चल रहा था'
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 4 जुलाई को अयोध्या में राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले पर एक बार फिर रहस्यमय टिप्पणी करते हुए कहा कि 'पहले दिन से खेल चल रहा था' और इसीलिए वे आज तक राम जन्मभूमि दर्शन करने नहीं गए। कैसरगंज (गोंडा) से पूर्व सांसद ने विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि इस विषय पर वे पहले ही अपनी बात कह चुके हैं।
बृजभूषण का बयान: 'चार साल पहले बोल चुका हूं'
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, 'इस मुद्दे पर जब कोई नहीं बोला था संसार में, चार साल पहले बोल चुका हूं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राम मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक से जुड़े सवाल उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इससे पहले वे कह चुके हैं कि यदि पूरी सच्चाई बोलेंगे तो 'संकट में आ जाएंगे।'
दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया से इनकार
जब उनसे कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के उस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई — जिसमें दिग्विजय सिंह ने कहा था कि वे भी राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर एफआईआर दर्ज कराएंगे क्योंकि उनका भी चढ़ावा चोरी हुआ है — तो बृजभूषण शरण सिंह ने कोई विस्तृत जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। उनके इस मौन ने मामले को और पेचीदा बना दिया है।
जांच में अब तक क्या हुआ
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों ने आरोपियों के पास से ₹80 लाख से अधिक की नकदी और आभूषण बरामद किए हैं। जांच के दौरान मंदिर प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। इसी बीच, ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरों ने विवाद को और हवा दे दी है।
विपक्ष और भाजपा की प्रतिक्रिया
विपक्षी दल इस पूरे प्रकरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर लगातार हमलावर हैं। विपक्ष का आरोप है कि कथित चढ़ावा चोरी मामले में 'बड़े लोगों' को बचाने की कोशिश की जा रही है और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो रही। वहीं, BJP की ओर से इन आरोपों का लगातार खंडन किया जाता रहा है।
आगे क्या
यह मामला ऐसे समय में और उलझता दिख रहा है जब ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे की अटकलें जारी हैं और जांच एजेंसियां अभी भी सक्रिय हैं। बृजभूषण शरण सिंह के बार-बार के अधूरे बयान राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठाते रहेंगे कि आखिर वे 'पूरी सच्चाई' से क्यों बच रहे हैं।