बृजभूषण बरी: प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं — जांच में कमियां थीं, न्याय नहीं मिला पहलवानों को
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 3 अगस्त को राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि जांच में शुरू से ही कमियां रही होंगी।
बृजभूषण बरी: प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया
चतुर्वेदी ने कहा, 'मुझे इसमें कोई हैरानी नहीं लग रही है। जिस तरह से लोगों और महिला प्रदर्शनकारियों ने इतने दिनों तक विरोध किया, फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिला और उन्हें सांसद बने रहने दिया गया।' उन्होंने आगे कहा कि जब बृजभूषण को सांसद का टिकट नहीं मिला, तो उनके बेटे को टिकट दे दिया गया। चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया, 'न्यायपालिका तथ्यों और सबूतों के आधार पर काम करती है — कहीं न कहीं, जांच में जरूर कोई कमी रही होगी।'
राम मंदिर चढ़ावा घोटाले पर सरकार से सवाल
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार को पहल करके सीबीआई जांच करवानी चाहिए थी, लेकिन वह इससे बच रही है। उन्होंने कहा, 'यह यूपी से नहीं, बल्कि पूरे देश से जुड़ा मुद्दा है। देशवासी अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं।' उनके अनुसार इस मामले में पूरे ट्रस्ट का इस्तीफा होना चाहिए था और सरकार ने 'कुछ लोगों को इधर-उधर करके जनता को गुमराह करने की कोशिश की है।' उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच आरोप-प्रत्यारोप पर टिप्पणी करने से परहेज किया।
सिद्धिविनायक मंदिर: ₹18 करोड़ की कथित हेराफेरी
मुंबई के श्री सिद्धिविनायक मंदिर के ट्रस्टियों ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर दानपेटी से ₹18 करोड़ की कथित हेराफेरी के आरोप लगाए हैं। चतुर्वेदी ने इस पर कहा, 'अगर सिद्धिविनायक जैसे मंदिर में भी ऐसी गड़बड़ियां हो रही हैं, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।' उन्होंने सवाल उठाया कि एकनाथ शिंदे ट्रस्ट के चेयरमैन हैं — ऐसे में उनकी देखरेख में यह सब होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
मुख्यमंत्री फडणवीस से जांच की मांग
चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अनुरोध किया कि वे पहल करें और सिद्धिविनायक मंदिर मामले में जल्द से जल्द जांच बिठाएं। उन्होंने कहा कि जब ट्रस्टी खुद ही चेयरमैन को पत्र लिख रहे हैं, तो यह स्थिति 'चोर ही चोर को पकड़ने' जैसी लगती है। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में नई उथल-पुथल का संकेत देता है और आने वाले दिनों में विपक्ष इसे और तेज़ी से उठा सकता है।