बृजभूषण बरी: विपक्ष बोला 'कथनी-करनी में फर्क', BJP ने कहा सत्य की जीत
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा 3 अगस्त को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया। सत्तारूढ़ पक्ष ने इस फैसले को 'सत्य और न्याय की जीत' करार दिया, जबकि विपक्षी दलों ने न्यायिक प्रक्रिया और महिला खिलाड़ियों की भावनाओं को केंद्र में रखते हुए सरकार पर निशाना साधा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक ओर सरकार युवा पीढ़ी, महिला सशक्तीकरण और महिला आरक्षण की बात करती है, वहीं ऐसे मामलों में जो संदेश समाज को जाता है वह 'चिंताजनक' है। उनके अनुसार, सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर स्पष्ट दिखाई देता है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संयमित रुख अपनाते हुए कहा कि वह न्यायालय के निर्णय पर टिप्पणी नहीं करना चाहते और न्यायिक प्रक्रिया को अपना काम करने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इस फैसले के विरुद्ध अपील दायर होती है तो आगे की कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किया जाना चाहिए। थरूर ने यह भी जोड़ा कि यदि अपील नहीं होती, तो कानून की दृष्टि से बृजभूषण शरण सिंह को 'सम्मानपूर्वक बरी' माना जाएगा — और 'न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।'
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने न्यायपालिका का सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि फैसले के खिलाफ कुछ नहीं कहेंगी, लेकिन महिला खिलाड़ियों और समाज के एक बड़े वर्ग में इस निर्णय को लेकर निराशा है। उन्होंने कहा कि जिन महिला पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया, उन्होंने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के ज़रिए अपनी बात रखी थी। माजी के अनुसार, लोगों के मन में जाँच और साक्ष्यों को लेकर कई सवाल हैं तथा आशंका है कि इस फैसले का खेलों में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही युवा महिला खिलाड़ियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सत्तापक्ष का स्वागत
BJP सांसद और बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र करण भूषण सिंह ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे 'न्याय और सत्य की जीत' बताया। उन्होंने कहा कि यह उनके परिवार और कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र के लिए खुशी का क्षण है। करण भूषण ने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने कठिन समय में साथ दिया और कहा कि जिन राजनीतिक दलों ने उनके पिता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी, उन्हें अब सामने आकर स्वीकार करना चाहिए कि यदि अन्याय हुआ है तो वे 'सम्मान के हकदार हैं।' उन्होंने इस फैसले को 'सनातनियों, हिंदुओं और पहलवानों की जीत' भी बताया।
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने भी फैसले का स्वागत किया और कहा कि बृजभूषण शरण सिंह हमेशा महिलाओं के सम्मान की बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका निष्पक्ष है और उसके फैसलों का सम्मान होना चाहिए।
कुश्ती संघ की प्रतिक्रिया
रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष संजय सिंह बबलू ने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोप 'पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीतिक' थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन आरोपों का उद्देश्य कुश्ती महासंघ पर कब्जा करना था। उनके अनुसार, बृजभूषण ने शुरू से ही अपनी बेगुनाही का दावा किया था और यहाँ तक कहा था कि यदि आरोप साबित हो जाएँ तो वह खुद फाँसी लगा लेंगे — अदालत के फैसले ने उनकी बात को सही साबित कर दिया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब महिला पहलवानों का आंदोलन पहले से ही देश में व्यापक चर्चा का विषय रहा है। गौरतलब है कि विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और अन्य पहलवानों ने जंतर-मंतर पर लंबे समय तक धरना दिया था। अब सवाल यह है कि क्या शिकायतकर्ता पहलवान उच्च न्यायालय में अपील का रास्ता चुनेंगी। इस फैसले के सामाजिक और कानूनी निहितार्थ आने वाले दिनों में और स्पष्ट होंगे।