बृजभूषण बरी: विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना, प्रियंका बोलीं — 'कथनी और करनी में फ़र्क'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को महिला पहलवानों द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया, जिसके बाद देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज़ हो गया। सत्तापक्ष ने इस फ़ैसले को 'सत्य और न्याय की जीत' करार दिया, जबकि विपक्षी दलों ने न्यायिक प्रक्रिया और महिला खिलाड़ियों की पीड़ा को केंद्र में रखते हुए केंद्र सरकार पर तीखे सवाल दागे।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने फ़ैसले के बाद केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार युवा पीढ़ी, महिला सशक्तीकरण और महिला आरक्षण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों में जो संदेश समाज तक पहुँचता है, वह गहरी चिंता का विषय है। उनके अनुसार, सरकार के दावों और ज़मीनी वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर साफ़ दिखाई देता है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अदालत के निर्णय पर संयमित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वह न्यायालय के फ़ैसले पर सीधी टिप्पणी नहीं करना चाहते और न्यायिक प्रक्रिया को अपना काम करने देना चाहिए। थरूर ने यह भी जोड़ा कि यदि इस फ़ैसले के विरुद्ध अपील दायर होती है, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया का इंतज़ार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि अपील नहीं होती, तो कानून की दृष्टि से बृजभूषण शरण सिंह को सम्मानपूर्वक बरी माना जाएगा — और न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने न्यायपालिका का सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वह फ़ैसले के विरुद्ध कुछ नहीं कहेंगी। हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि महिला खिलाड़ियों और समाज के एक बड़े वर्ग में इस फ़ैसले को लेकर निराशा है। उन्होंने याद दिलाया कि जिन महिला पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया, उन्होंने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के ज़रिए अपनी आवाज़ उठाई थी।
माजी ने यह भी कहा कि लोगों के मन में जाँच की प्रक्रिया और जुटाए गए साक्ष्यों को लेकर कई सवाल बाकी हैं। उनके अनुसार, कई महिलाओं को आशंका है कि इस फ़ैसले का खेलों में उभरती युवा महिला खिलाड़ियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सत्तापक्ष का स्वागत
BJP सांसद और बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र करण भूषण सिंह ने अदालत के फ़ैसले का खुलकर स्वागत किया और इसे न्याय एवं सत्य की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह उनके परिवार और कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र के लिए हर्ष का क्षण है। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया।
करण भूषण सिंह ने आगे कहा कि जब उनके पिता पर आरोप लगे थे, तब विभिन्न राजनीतिक दलों ने कड़ी कार्रवाई की माँग की थी — अब उन्हें सामने आकर स्वीकार करना चाहिए कि यदि उनके साथ अन्याय हुआ है तो वह अब सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने इसे सनातनियों, हिंदुओं और पहलवानों की जीत भी बताया।
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने भी फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बृजभूषण शरण सिंह हमेशा महिलाओं के सम्मान की बात करते रहे हैं और यह उनके आचरण में भी परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका निष्पक्ष है और उसके फ़ैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए।
कुश्ती महासंघ की प्रतिक्रिया
रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष संजय सिंह बबलू ने फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन आरोपों का असली मकसद कुश्ती महासंघ पर कब्ज़ा करना था। उन्होंने यह भी कहा कि बृजभूषण शरण सिंह ने शुरू से ही अपनी बेगुनाही का दावा किया था और अदालत के फ़ैसले ने उनकी बात को सही साबित किया है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब महिला पहलवानों का जंतर-मंतर पर हुआ विरोध प्रदर्शन पहले ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका था। अब सवाल यह है कि क्या पीड़ित पक्ष उच्च न्यायालय में अपील दायर करेगा। आलोचकों का कहना है कि यह फ़ैसला खेल जगत में यौन उत्पीड़न के मामलों की रिपोर्टिंग और जाँच प्रक्रिया पर व्यापक बहस को नई दिशा दे सकता है।