बृजभूषण शरण सिंह ने वृंदावन में रितेश्वर महाराज का लिया आशीर्वाद, बरी होने के बाद पहला कार्यक्रम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामले में न्यायालय द्वारा 3 अगस्त को सम्मानपूर्वक बरी किए जाने के बाद मंगलवार, 4 अगस्त को वृंदावन पहुंचे, जहाँ उन्होंने संत रितेश्वर महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। बृजभूषण ने स्पष्ट किया कि न्याय मिलने पर सबसे पहले गुरु के दर्शन करने का संकल्प उन्होंने पहले ही ले रखा था, और आज उसी संकल्प को पूरा करने वे मथुरा आए।
संकल्प और आस्था का पहला पड़ाव
मीडिया से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, '3 तारीख को न्यायपालिका ने मेरे ऊपर लगे सभी आरोपों को सहसम्मान खारिज कर दिया। इसके बाद यह मेरा पहला कार्यक्रम है।' उन्होंने बताया कि उन्होंने मन में यह निश्चय किया था कि न्याय मिलने पर घर जाने से पहले सर्वप्रथम रितेश्वर महाराज के दर्शन करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत के फैसले से पूर्व वे गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नागपुर गए थे।
आरोपों और आंदोलन पर बृजभूषण का पक्ष
पूर्व सांसद ने अपने खिलाफ चले आंदोलन को 'बहुत बड़ा षड्यंत्र' बताया। उन्होंने कहा कि उनके विरुद्ध जितना बड़ा प्रदर्शन हुआ, वैसा शायद दुनिया में कहीं नहीं हुआ होगा। उनके अनुसार इस आंदोलन में ओलंपिक पदक विजेता और विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता पहलवान शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन के पीछे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और वामपंथी दल खड़े थे, और यहाँ तक कि कनाडा व अमेरिका में भी आंदोलन चलाया गया। यह उनका अपना बयान है; आरोप लगाने वाले पहलवानों का पक्ष इस अवसर पर उपलब्ध नहीं था।
बृजभूषण ने अपने शुरुआती रुख को दोहराते हुए कहा, 'पहले दिन मेरा जो स्टैंड था, वही आज तक रहा। मैंने कहा था कि यदि एक भी बात सत्य पाई गई तो मैं स्वयं फांसी पर लटक जाऊंगा। आज न्यायपालिका ने मुझे बाइज्जत बरी किया है।' उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई 'होइहि सोइ जो राम रचि राखा' का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में जो होता है, वह ईश्वर की इच्छा से होता है।
रितेश्वर महाराज का वक्तव्य
संत रितेश्वर महाराज ने इस अवसर पर कहा कि उन्होंने शुरू से ही धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने तथा धैर्य बनाए रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा, 'न्यायपालिका के द्वारा न्याय मिला है। धर्म का दबदबा, सनातन का दबदबा और राष्ट्र का गौरव सदा था, है और रहेगा।' महाराज ने बृजभूषण को अपना पुत्र बताते हुए कहा कि जैसे किसी पिता को अपने पुत्र के निर्मल होकर लौटने पर प्रसन्नता होती है, वैसे ही उन्हें भी खुशी है। उन्होंने आशा जताई कि बृजभूषण आगे भी राष्ट्र और सनातन की सेवा करते रहेंगे।
पृष्ठभूमि और आगे की राह
गौरतलब है कि बृजभूषण शरण सिंह पर भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष रहते हुए महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। इस मामले ने 2023 में व्यापक राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया था, जब शीर्ष पहलवानों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनों तक धरना दिया था। न्यायालय के ताज़ा फैसले के बाद बृजभूषण की राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता किस दिशा में जाती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।