3 अगस्त 2026
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बृजभूषण शरण सिंह बरी: 'ओलंपियन भी झूठ बोल सकते हैं', WFI यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने किया दोषमुक्त

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बृजभूषण शरण सिंह बरी: 'ओलंपियन भी झूठ बोल सकते हैं', WFI यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने किया दोषमुक्त

सारांश

राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों से बरी कर दिया। जनवरी 2023 में विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया के जंतर-मंतर विरोध से शुरू हुआ यह मामला अब दोनों आरोपियों के बरी होने के साथ समाप्त हुआ — भारतीय खेल जगत का सबसे विवादास्पद कानूनी अध्याय।

मुख्य बातें

राउज़ एवेन्यू कोर्ट के ACJM अश्विनी पंवार ने 3 अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को यौन उत्पीड़न व डराने-धमकाने के सभी आरोपों से बरी किया।
कोर्ट ने कहा — अभियोजन पक्ष आरोप उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
बृजभूषण ने कहा — 'ओलंपियन और ओलंपिक मेडलिस्ट भी अपने फायदे के लिए झूठ बोल सकते हैं।' मामला जनवरी 2023 में विनेश फोगाट , साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ था।
WFI अध्यक्ष संजय सिंह बबलू ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया।
केंद्रीय खेल मंत्रालय ने विवाद के दौरान WFI का कामकाज निलंबित कर दिया था।

भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता बृजभूषण शरण सिंह को सोमवार, 3 अगस्त 2026 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने यौन उत्पीड़न और डराने-धमकाने के सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। बरी होने के तुरंत बाद सिंह ने कहा कि यह फैसला साबित करता है कि ओलंपियन भी अपने फायदे के लिए झूठ बोल सकते हैं।

कोर्ट का फैसला और मुख्य घटनाक्रम

राउज़ एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने बृजभूषण शरण सिंह और WFI के पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर — दोनों को बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष यौन उत्पीड़न और उत्पीड़न के आरोपों को निर्णायक रूप से सिद्ध करने में असमर्थ रहा। इस फैसले के साथ महिला पहलवानों की शिकायतों पर चला ट्रायल समाप्त हो गया।

बृजभूषण की ओर से अदालत में वकील राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान पेश हुए।

बृजभूषण का बयान: 'जूनियर खिलाड़ियों की जीत'

बरी होने के बाद सिंह ने कहा, 'यह मेरी जीत नहीं है बल्कि यह जूनियर खिलाड़ियों की जीत है। जूनियर खिलाड़ी जीते हैं। इस मामले ने साबित कर दिया है कि ओलंपियन और ओलंपिक मेडल जीतने वाले भी अपने फायदे के लिए झूठ बोल सकते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि उन पर यह आरोप खिलाड़ियों और जूनियर खिलाड़ियों के अधिकारों के लिए लड़ने की वजह से लगाया गया था।

विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा, 'देश में एक-दो पार्टियों को छोड़कर, सभी मेरी फांसी की मांग कर रहे थे। बहुत से लोग मुझे जिंदा जलाना चाहते थे, यह सभी जानते हैं।' हालांकि, उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार किया।

WFI अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

WFI के वर्तमान अध्यक्ष संजय सिंह बबलू ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित था। उनके अनुसार यह आरोप कुश्ती संघ पर कब्जा करने की कोशिश का हिस्सा था। उन्होंने कहा, 'नेताजी ने पहले दिन से ही कहा था कि अगर दोष सिद्ध हो जाएगा तो वह फांसी लगा लेंगे — यह बात उन्होंने पूरे विश्वास से कही थी, क्योंकि उन्हें हकीकत पता थी।'

विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला जनवरी 2023 में शुरू हुआ था, जब ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। उन्होंने बृजभूषण पर यौन शोषण और डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए WFI प्रमुख के रूप में उनके इस्तीफे और फेडरेशन को भंग करने की मांग की थी।

इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पी.टी. उषा को शिकायत के बाद मैरी कॉम और योगेश्वर दत्त जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की एक जांच समिति बनाई गई थी। WFI ने अपने तत्कालीन अध्यक्ष और कोचों पर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था। बाद में केंद्रीय खेल मंत्रालय ने WFI के कामकाज को निलंबित कर दिया था और विनोद तोमर को उनके पद से हटाया था।

आगे क्या होगा

ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अभियोजन पक्ष उच्च न्यायालय में अपील करता है। गौरतलब है कि यह मामला भारतीय खेल जगत में प्रशासनिक जवाबदेही और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस का केंद्र रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण ने भारतीय कुश्ती की अंतरराष्ट्रीय साख को नुकसान पहुँचाया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उन गहरे सवालों का जवाब नहीं है जो भारतीय खेल प्रशासन की संरचना पर उठे थे। जब ओलंपिक पदक विजेता खिलाड़ी सड़क पर उतरकर अपने संघ प्रमुख के खिलाफ आवाज़ उठाएँ, तो यह सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं — यह संस्थागत विफलता का संकेत है। 'अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर सका' और 'आरोपी निर्दोष था' — ये दो अलग निष्कर्ष हैं, और इस अंतर को मिटाना भारतीय खेल जगत के लिए उचित नहीं होगा। असली ज़रूरत एक स्वतंत्र, पारदर्शी शिकायत तंत्र की है जो खिलाड़ियों को संघ-प्रमुखों के राजनीतिक प्रभाव से बाहर सुनवाई दे सके।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृजभूषण शरण सिंह को किस मामले में बरी किया गया?
राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और WFI के पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न और डराने-धमकाने के मामले में बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
यह विवाद कब और कैसे शुरू हुआ था?
यह विवाद जनवरी 2023 में शुरू हुआ, जब ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बृजभूषण पर यौन शोषण और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे और WFI को भंग करने की मांग की थी।
कोर्ट के फैसले पर बृजभूषण ने क्या कहा?
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह उनकी नहीं बल्कि जूनियर खिलाड़ियों की जीत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले ने साबित कर दिया है कि ओलंपियन और ओलंपिक मेडल जीतने वाले भी अपने फायदे के लिए झूठ बोल सकते हैं।
इस मामले में सरकार ने क्या कदम उठाए थे?
केंद्रीय खेल मंत्रालय ने विवाद के बीच WFI के कामकाज को निलंबित कर दिया था और तत्कालीन असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को पद से हटाया था। IOA अध्यक्ष पी.टी. उषा को शिकायत के बाद मैरी कॉम और योगेश्वर दत्त की एक जांच समिति भी बनाई गई थी।
क्या इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है?
ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद अभियोजन पक्ष या शिकायतकर्ता उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। अभी तक ऐसी किसी अपील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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