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कैग रिपोर्ट पर MP सरकार श्वेत पत्र जारी करे — जीतू पटवारी की CM मोहन यादव को चेतावनी

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कैग रिपोर्ट पर MP सरकार श्वेत पत्र जारी करे — जीतू पटवारी की CM मोहन यादव को चेतावनी

सारांश

कैग ने मध्य प्रदेश को देश में सर्वाधिक मातृ-शिशु मृत्यु दर वाला राज्य बताया, 25 लाख से अधिक हितग्राही पोषण से वंचित। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर श्वेत पत्र और दोषी अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की माँग की।

मुख्य बातें

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कैग रिपोर्ट पर श्वेत पत्र जारी करने की माँग की।
कैग रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में देश की सर्वाधिक मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर दर्ज है।
25 लाख से अधिक हितग्राहियों को पोषण नहीं मिला; हज़ारों गाँव बिना आंगनवाड़ी; आधे से अधिक ज़िम्मेदार पद रिक्त।
पटवारी ने दोषी अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई और रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति की माँग की।
माँग है कि जिला-वार कार्ययोजना और मासिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर माँग की है कि राज्य सरकार नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताज़ा रिपोर्ट पर तत्काल श्वेत पत्र जारी करे। पटवारी ने कैग रिपोर्ट के हवाले से आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में देश की सर्वाधिक मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर दर्ज है, हज़ारों गाँव आंगनवाड़ी से वंचित हैं और 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को पोषण नहीं मिला।

कैग रिपोर्ट में क्या है

पटवारी के अनुसार, कैग रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि राज्य में हज़ारों गाँव बिना आंगनवाड़ी केंद्र के हैं और लाखों बच्चे तथा गर्भवती महिलाएँ पोषण से वंचित हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आधे से अधिक ज़िम्मेदार पद रिक्त हैं और बच्चों के भोजन की व्यवस्था अपंजीकृत समूहों के भरोसे छोड़ दी गई है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जवाबदेही पूरी तरह गायब है — योजनाएँ बनीं, बजट आया, रिकॉर्ड बने, लेकिन जिन बच्चों को भोजन नहीं मिला उनका कारण तक दर्ज नहीं किया गया।

पटवारी का सरकार पर सीधा हमला

पटवारी ने आरोप लगाया कि यह महज प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि उस माँ के विश्वास की हत्या है जो सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव का सपना लेकर जाती है। उन्होंने कहा, 'यह उस नवजात के अधिकार का अपमान है, जिसे जीवन की पहली लड़ाई ही सरकारी लापरवाही से लड़नी पड़ रही है।'

उन्होंने सरकार के विकास के दावों और कैग के निष्कर्षों के बीच विरोधाभास को रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य सरकार मध्य प्रदेश को विकास की दौड़ में आगे बताती है, जबकि कैग कह रहा है कि माताओं और बच्चों की सुरक्षा में मध्य प्रदेश सबसे पीछे है।

कांग्रेस की प्रमुख माँगें

पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने कई ठोस माँगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि कैग की पूरी रिपोर्ट पर श्वेत पत्र जारी कर जनता को सच्चाई से अवगत कराया जाए। जिन अधिकारियों की लापरवाही से यह स्थिति उत्पन्न हुई, उनके विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई हो।

इसके अलावा उन्होंने माँग की कि सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियाँ की जाएँ, प्रत्येक आंगनवाड़ी को न्यूनतम मूलभूत सुविधाएँ दी जाएँ और 25 लाख से अधिक वंचित हितग्राहियों के मामले में दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए जिला-वार कार्ययोजना और उसकी मासिक प्रगति सार्वजनिक की जाए।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में विकास के दावे कर रही है। गौरतलब है कि कैग रिपोर्ट एक संवैधानिक संस्था का दस्तावेज़ है, जिसे नकारना सरकार के लिए राजनीतिक रूप से कठिन होता है। कांग्रेस इस रिपोर्ट को विधानसभा और जन-मंचों पर हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार श्वेत पत्र जारी नहीं करती, तो विपक्ष इसे आगामी सत्र में विधानसभा में उठाएगा। बाल पोषण और मातृ स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे संवेदनशील होते हैं और इनका असर ज़मीनी राजनीति पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नीतिगत विफलता की ओर इशारा करता है। श्वेत पत्र की माँग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कई वर्षों में राज्य सरकार ने पोषण मिशन के नाम पर बड़े बजट की घोषणाएँ की हैं, लेकिन ज़मीनी जवाबदेही का कोई पारदर्शी तंत्र नहीं बना। अब देखना यह है कि BJP सरकार कैग के निष्कर्षों का खंडन करती है या उन्हें स्वीकार कर सुधार की राह चुनती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीतू पटवारी ने कैग रिपोर्ट पर क्या माँग की है?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर माँग की है कि कैग की पूरी रिपोर्ट पर श्वेत पत्र जारी किया जाए और दोषी अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई हो। साथ ही रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति और जिला-वार मातृ-शिशु मृत्यु कार्ययोजना सार्वजनिक करने की भी माँग है।
मध्य प्रदेश की कैग रिपोर्ट में क्या उजागर हुआ है?
कैग रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में देश की सर्वाधिक मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हज़ारों गाँव बिना आंगनवाड़ी हैं, 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को पोषण नहीं मिला, आधे से अधिक ज़िम्मेदार पद रिक्त हैं और करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद जवाबदेही नदारद है।
मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी की स्थिति कैग रिपोर्ट के अनुसार कैसी है?
कैग रिपोर्ट के अनुसार राज्य में हज़ारों गाँव अभी भी आंगनवाड़ी केंद्रों से वंचित हैं। बच्चों के भोजन की व्यवस्था कई जगह अपंजीकृत समूहों के भरोसे छोड़ी गई है और जिन बच्चों को भोजन नहीं मिला, उनका कारण तक आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।
क्या मध्य प्रदेश सरकार ने कैग रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
24 जुलाई तक राज्य सरकार की ओर से कैग रिपोर्ट या कांग्रेस की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार के रुख का इंतज़ार है, जो आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे की दिशा तय करेगा।
कांग्रेस ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई माँगी है?
पटवारी ने माँग की है कि 25 लाख से अधिक वंचित हितग्राहियों के मामले में जवाबदेही तय कर दोषी अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध समयबद्ध अनुशासनात्मक प्रक्रिया अपनाने की भी माँग है।
राष्ट्र प्रेस
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