24 जुलाई 2026
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कैग रिपोर्ट पर MP सरकार श्वेत पत्र जारी करे — जीतू पटवारी की मुख्यमंत्री मोहन यादव से माँग

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कैग रिपोर्ट पर MP सरकार श्वेत पत्र जारी करे — जीतू पटवारी की मुख्यमंत्री मोहन यादव से माँग

सारांश

कैग रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की मातृ-शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोली — देश में सर्वाधिक मातृ व शिशु मृत्यु दर, 25 लाख+ वंचित हितग्राही और करोड़ों खर्च के बाद भी जवाबदेही शून्य। कांग्रेस के जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से श्वेत पत्र और दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य बातें

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कैग रिपोर्ट पर श्वेत पत्र जारी करने की माँग की।
कैग रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में देश की सर्वाधिक मातृ मृत्यु दर और सर्वाधिक शिशु मृत्यु दर दर्ज है।
हज़ारों गाँव आंगनवाड़ी केंद्रों से वंचित; 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को पोषण नहीं मिला।
आधे से अधिक ज़िम्मेदार पद रिक्त; अपंजीकृत समूहों के भरोसे बच्चों का भोजन।
पटवारी ने लापरवाह अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई और जिला-वार कार्ययोजना की मासिक प्रगति सार्वजनिक करने की माँग की।

कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर माँग की है कि राज्य सरकार नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पर तत्काल श्वेत पत्र जारी करे। पटवारी ने आरोप लगाया कि कैग रिपोर्ट मध्य प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलताओं को उजागर करती है, जिन पर सरकार चुप्पी साधे बैठी है।

कैग रिपोर्ट में क्या उजागर हुआ

पटवारी ने अपने पत्र में कैग रिपोर्ट के हवाले से कहा कि मध्य प्रदेश में देश की सर्वाधिक मातृ मृत्यु दर और सर्वाधिक शिशु मृत्यु दर दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार हज़ारों गाँव अब भी आंगनवाड़ी केंद्रों से वंचित हैं, जबकि लाखों बच्चे और गर्भवती महिलाएँ पर्याप्त पोषण से महरूम हैं। आधे से अधिक ज़िम्मेदार पद रिक्त हैं और अपंजीकृत समूहों के भरोसे बच्चों का भोजन छोड़ा गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को पोषण नहीं मिला, करोड़ों रुपये खर्च हुए, फिर भी जवाबदेही पूरी तरह गायब है। जिन बच्चों को भोजन नहीं मिला, उनके कारण तक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किए गए।

पटवारी के तीखे आरोप

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसे महज़ प्रशासनिक विफलता मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'यह उस माँ के विश्वास की हत्या है, जो सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव का सपना लेकर जाती है। यह उस नवजात के अधिकार का अपमान है, जिसे जीवन की पहली लड़ाई ही सरकारी लापरवाही से लड़नी पड़ रही है।'

उन्होंने राज्य सरकार के विकास के दावों पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, 'सरकार कहती है मध्य प्रदेश विकास की दौड़ में आगे है, लेकिन कैग कह रहा है कि माताओं और बच्चों की सुरक्षा की दौड़ में मध्य प्रदेश सबसे पीछे खड़ा है।'

कांग्रेस की प्रमुख माँगें

पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष कई ठोस माँगें रखी हैं। उन्होंने माँग की कि कैग की पूरी रिपोर्ट पर श्वेत पत्र जारी कर प्रदेश की जनता को सच बताया जाए। लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई की जाए और सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियाँ की जाएँ।

इसके अलावा उन्होंने माँग की कि प्रत्येक आंगनवाड़ी को न्यूनतम मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए और 25 लाख से अधिक वंचित हितग्राहियों के मामले में दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए जिला-वार कार्ययोजना तैयार कर उसकी मासिक प्रगति सार्वजनिक की जाए।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मोहन यादव सरकार मध्य प्रदेश में विकास के आँकड़े प्रस्तुत कर रही है। कैग की रिपोर्ट ने विपक्ष को सरकार को कटघरे में खड़ा करने का अवसर दिया है। गौरतलब है कि आंगनवाड़ी और पोषण कार्यक्रमों से जुड़ी खामियाँ पहले भी केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर उजागर होती रही हैं।

आगे क्या होगा

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्य सरकार कांग्रेस की माँगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है। श्वेत पत्र जारी होता है या नहीं — यह आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति का केंद्रीय सवाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सुधार की गति नगण्य रही है। असली सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के बजट आवंटन के बावजूद जवाबदेही का ढाँचा इतना खोखला क्यों है। श्वेत पत्र की माँग राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है, लेकिन जब तक रिक्त पदों की भर्ती और आंगनवाड़ी की ज़मीनी निगरानी नहीं होती, दस्तावेज़ जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर के राष्ट्रीय तुलनात्मक आँकड़े मध्य प्रदेश के लिए एक गंभीर संरचनात्मक चुनौती की ओर इशारा करते हैं जिसे केवल राजनीतिक बयानबाज़ी से नहीं सुलझाया जा सकता।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीतू पटवारी ने कैग रिपोर्ट पर श्वेत पत्र की माँग क्यों की?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर माँग की कि कैग रिपोर्ट में उजागर मातृ-शिशु मृत्यु दर, आंगनवाड़ी की कमी और पोषण वितरण की विफलताओं पर सरकार जनता को सच बताए। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी जवाबदेही शून्य है।
मध्य प्रदेश की कैग रिपोर्ट में क्या-क्या खामियाँ सामने आईं?
कैग रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में देश की सर्वाधिक मातृ मृत्यु दर और सर्वाधिक शिशु मृत्यु दर है। हज़ारों गाँव आंगनवाड़ी केंद्रों से वंचित हैं, 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को पोषण नहीं मिला, आधे से अधिक ज़िम्मेदार पद रिक्त हैं और अपंजीकृत समूहों के भरोसे बच्चों का भोजन छोड़ा गया है।
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश सरकार से क्या-क्या कार्रवाई माँगी है?
कांग्रेस ने माँग की है कि कैग रिपोर्ट पर श्वेत पत्र जारी हो, लापरवाह अधिकारियों पर समयबद्ध और आपराधिक कार्रवाई हो, सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियाँ हों, हर आंगनवाड़ी को मूलभूत सुविधाएँ मिलें और मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए जिला-वार कार्ययोजना की मासिक प्रगति सार्वजनिक की जाए।
मध्य प्रदेश में कितने हितग्राही पोषण से वंचित रहे?
कैग रिपोर्ट के हवाले से जीतू पटवारी ने बताया कि 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को पोषण नहीं मिला। इसके बावजूद दोषियों की जवाबदेही तय नहीं की गई और वंचित बच्चों के कारण तक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं।
क्या मध्य प्रदेश सरकार ने कैग रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
24 जुलाई तक मुख्यमंत्री मोहन यादव या राज्य सरकार की ओर से कांग्रेस की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। श्वेत पत्र जारी होता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
राष्ट्र प्रेस
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