6 अगस्त 2026
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मध्य प्रदेश में बाल अपहरण के 11,594 मामले: जीतू पटवारी ने माँगा श्वेत पत्र

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मध्य प्रदेश में बाल अपहरण के 11,594 मामले: जीतू पटवारी ने माँगा श्वेत पत्र

सारांश

NCRB 2024 के आँकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में बाल अपहरण के मामले 2020 से 64% बढ़कर 11,594 हो गए हैं — देश में दूसरा सबसे ऊँचा आँकड़ा। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से श्वेत पत्र और संयुक्त टास्क फोर्स की माँग की है।

मुख्य बातें

जीतू पटवारी ने 6 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर बच्चों की सुरक्षा पर श्वेत पत्र जारी करने की माँग की।
NCRB 2024 के अनुसार मध्य प्रदेश में बाल अपहरण के 11,594 मामले दर्ज हुए — महाराष्ट्र के बाद देश में दूसरे सबसे अधिक ।
वर्ष 2020 के 7,058 मामलों की तुलना में यह वृद्धि 64 प्रतिशत है।
प्रदेश में 19,131 बच्चे लापता दर्ज हुए, जिनमें 15,282 लड़कियाँ और 4,886 लड़के शामिल हैं।
पटवारी ने मानव तस्करी रोकने के लिए विशेष संयुक्त टास्क फोर्स और जिला स्तर पर मासिक सार्वजनिक समीक्षा की माँग की।

कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 6 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य में बच्चों के अपहरण और गुमशुदगी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार से बच्चों की सुरक्षा पर राज्य स्तरीय श्वेत पत्र जारी करने और ठोस, समयबद्ध कदम उठाने की माँग की है।

आँकड़े क्या कहते हैं

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2024 के आँकड़ों का हवाला देते हुए पटवारी ने बताया कि वर्ष 2024 में मध्य प्रदेश में बच्चों के अपहरण के 11,594 मामले दर्ज किए गए — जो महाराष्ट्र के बाद पूरे देश में दूसरे सबसे अधिक हैं। वर्ष 2020 के 7,058 मामलों की तुलना में यह लगभग 64 प्रतिशत की वृद्धि है।

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में देशभर में दर्ज बाल अपहरण के 75,108 मामलों में से 15 प्रतिशत से अधिक अकेले मध्य प्रदेश से हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 19,131 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई, जिनमें 15,282 लड़कियाँ और 4,886 लड़के शामिल हैं।

पटवारी की प्रमुख माँगें

पटवारी ने अपने पत्र में कई ठोस सुझाव रखे। उन्होंने माँग की कि प्रत्येक जिले में बाल अपहरण मामलों की मासिक सार्वजनिक समीक्षा अनिवार्य की जाए और लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष जाँच अभियान चलाया जाए। साथ ही, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, रेलवे पुलिस और बाल संरक्षण संस्थाओं के बीच एक समन्वित तंत्र विकसित किया जाए।

उन्होंने मानव तस्करी और संगठित गिरोहों से जुड़े मामलों की जाँच के लिए विशेष संयुक्त टास्क फोर्स के गठन की भी माँग की। पिछले पाँच वर्षों में सरकार द्वारा इस विषय पर किए गए प्रयासों और उनकी प्रगति का सार्वजनिक विवरण जारी करने की भी अपील की गई।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार पर विपक्ष लगातार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर दबाव बना रहा है। पटवारी ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि 'बच्चों की सुरक्षा किसी भी राज्य की कानून-व्यवस्था का सबसे संवेदनशील पैमाना होती है, लेकिन मध्य प्रदेश में हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं।' मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार की ओर से इस पत्र पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस की इस माँग के बाद यह देखना होगा कि राज्य सरकार श्वेत पत्र जारी करती है या नहीं। बाल संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि NCRB आँकड़ों में लगातार हो रही वृद्धि के मद्देनज़र एक समन्वित बहु-विभागीय नीति की तत्काल आवश्यकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और देश के कुल मामलों में 15% से अधिक हिस्सेदारी चिंताजनक है। लेकिन श्वेत पत्र की माँग तब तक प्रतीकात्मक रहेगी जब तक उसमें जवाबदेही का ढाँचा न हो — यानी यह स्पष्ट हो कि कितने मामले सुलझे, कितने आरोपी दोषी ठहरे, और बचाए गए बच्चों के पुनर्वास की स्थिति क्या है। असली परीक्षा यह है कि सरकार केवल आँकड़े प्रकाशित करती है या एक सत्यापन-योग्य कार्ययोजना भी सामने रखती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में 2024 में बाल अपहरण के कितने मामले दर्ज हुए?
NCRB 2024 के आँकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में वर्ष 2024 में बाल अपहरण के 11,594 मामले दर्ज हुए, जो महाराष्ट्र के बाद देश में दूसरे सबसे अधिक हैं। यह 2020 के 7,058 मामलों की तुलना में लगभग 64 प्रतिशत की वृद्धि है।
जीतू पटवारी ने श्वेत पत्र की माँग क्यों की?
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि राज्य में बच्चों के अपहरण और गुमशुदगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार की ओर से कोई पारदर्शी जवाबदेही नहीं है। उन्होंने माँग की है कि पिछले पाँच वर्षों के प्रयासों और उनकी प्रगति का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाए।
मध्य प्रदेश में कितने बच्चे लापता हैं?
NCRB 2024 के अनुसार प्रदेश में 19,131 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज हुए, जिनमें 15,282 लड़कियाँ और 4,886 लड़के शामिल हैं।
पटवारी ने बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या माँगें रखी हैं?
पटवारी ने जिला स्तर पर मासिक सार्वजनिक समीक्षा, विशेष जाँच अभियान, बहु-विभागीय समन्वित तंत्र और मानव तस्करी रोकने के लिए संयुक्त टास्क फोर्स के गठन की माँग की है। साथ ही उन्होंने राज्य स्तरीय श्वेत पत्र जारी करने की भी अपील की है।
मध्य प्रदेश का राष्ट्रीय बाल अपहरण आँकड़ों में क्या स्थान है?
2024 में देशभर में दर्ज 75,108 बाल अपहरण मामलों में से 15 प्रतिशत से अधिक अकेले मध्य प्रदेश के हैं। राज्य इस मामले में महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर है।
राष्ट्र प्रेस
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